गुजरात-हिमाचल का परिणाम 2022: जीत और हार को किस रूप में देखा जाए?
यदि यह कहा जाए कि आज लोकतंत्र की जीत हुई है तो गलत नहीं होगा, क्योंकि वर्ष 2014 के संभवतः पहला चुनाव परिणाम है, जब लोकतंत्र खत्म करने की दुहाई देने वाले विपक्ष ने ईवीएम पर दोषारोपण नहीं किया है।
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यदि यह कहा जाए कि आज लोकतंत्र की जीत हुई है तो गलत नहीं होगा, क्योंकि वर्ष 2014 के संभवतः पहला चुनाव परिणाम है, जब लोकतंत्र खत्म करने की दुहाई देने वाले विपक्ष ने ईवीएम पर दोषारोपण नहीं किया है। जहां तक गुजरात और हिमाचल प्रदेश के परिणामों की बात है तो करीब-करीब एग्जिट पोल्स के अनुमान सही साबित हुए हैं।
गुजरात और हिमाचल प्रदेश में मुख्य रूप से चुनाव लड़ रहीं भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने अपने-अपने तरीके से परिणामों की व्याख्या की है। सभी नतीजों से संतुष्ट दिख रहे हैं और आगे गलतियों से सबक लेने की बात कर रहे हैं। लोकतंत्र में इसे सुखद ही कहा जाएगा।
गुजरात में भाजपा की जीत का सेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिर ही बांधा जाएगा, क्योंकि यदि पार्टी यहां परास्त होती तो हार का ठिकरा उन्हीं के सिर फोड़ा जाता। भाजपा ने इस बार गुजरात में सभी रिकॉर्ड तोड़ 156 सीटें जीती हैं, जो 27 साल के राज में सर्वाधिक हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करिश्मा तो पार्टी के साथ था ही, लेकिन कांग्रेस का अनमने ढंग से चुनाव लड़ना और आम आदमी पार्टी की एंट्री ने भी भाजपा को इस मुकाम तक लाने में काफी सहयोग किया।
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प्रधानमंत्री मोदी ने पूरा चुनाव स्वयं के ऊपर लिया और महंगाई, बेरोजगारी, मुफ्त बिजली, पानी जैसे मुद्दे प्रचार के शोर में खो गए। हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दों पर जनता ने मोहर लगाई। पार्टी को बंपर 52.5% वोट मिले।
चुनाव के दौरान जिस तरह से भाजपा अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थी, उससे एक बात तो साफ थी कि पार्टी बहुमत हासिल कर रही है, लेकिन लैंडस्लाइड विक्ट्री की उम्मीद शायद चुनाव विश्लेषकों को भी नहीं थी। इस जीत ने एक नई ऊर्जा भाजपा में भरी है और अगले साल होने वाले तीन महत्वपूर्ण राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनावों में पार्टी पूरे दमखम से उतरेगी।
गुजरात के परिणाम का असर वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिलेगा। साथ ही, विपक्ष का कोई भी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने की स्थिति में नहीं दिख रहा है। गुजरात के नतीजों ने इसे शीशे की तरह और साफ कर दिया है।
कांग्रेस की क्या रही स्थिति?
कांग्रेस जो वर्ष 2017 के गुजरात चुनाव में भाजपा को टक्कर देती नजर आ रही थी, वह इस बार चारों खाने चित हो गई। अगर यह कहा जाए कि कांग्रेस नेतृत्व ने गुजरात चुनाव लड़ने की अनिच्छा जताई तो कहना गलत नहीं होगा। कांग्रेस के मुख्य प्रचारक राहुल गांधी पूरी तरह अपनी भारत जोड़ो यात्रा के प्रति समर्पित रहे।
वह केवल एक दिन के लिए गुजरात में कैंपेनिंग करने आए। पार्टी कहीं से भी मतदाताओं को यह संदेश नहीं दे पाई कि वह 27 साल पुराने भाजपा के राज को उखाड़ फेंकेगी। शायद यही कारण रहा कि पार्टी के 12% से अधिक वोटर आम आदमी पार्टी की तरफ चले गए।
कई विधानसभा क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को भारी नुकसान पहुंचाया और वो 27.3% वोटों और 17 सीटों तक सिमट गई, जबकि उसे पिछले चुनावों में 35-40% के बीच मत मिलते रहे हैं।
कांग्रेस के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा भी है कि लोकतंत्र में हार-जीत होती है। गुजरात की जनता का जनादेश हम स्वीकार करते हैं। हम अपनी विचारधारा से समझौता करें बिना लड़ते रहेंगे और जो कमियां हैं, उन्हें हम दूर करेंगे। निश्चित रूप से कांग्रेस को कमियों को दूर करने की आवश्यकता है, क्योंकि लोकतंत्र में एक सशक्त विपक्ष का रहना भी जरूरी है। सत्ता पक्ष पर चेक-बैलेंस नहीं होगा तो लोकतंत्र ही हारेगा।
जहां तक आम आदमी पार्टी की बात है तो जो लंबे-चौड़े वादे संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुजरात को लेकर किए थे, वह सभी गलत साबित हुए। पार्टी 5 सीटों पर सिमट गई। उसके सभी प्रमुख नेता हार गए।
हालांकि, उसने 12.92% वोट हासिल करने में सफलता प्राप्त की है, जो कांग्रेस पार्टी से करीब-करीब आधा है। आम आदमी पार्टी ने भले सीटें कम हासिल की हों, पर एक माहौल अपने पक्ष में बनाने की कोशिश गुजरात में जरूर की है। यदि अगले 5 साल पार्टी गंभीरता के साथ गुजरात में काम करेगी और मुद्दे उठाएगी तो बहुत संभव है कि अगला चुनाव भाजपा बनाम आम आदमी पार्टी का हो।
जहां तक हिमाचल प्रदेश के नतीजों की बात है तो वहां राज बदल गया, रिवाज नहीं बदला। भाजपा के लिए यह कहा जा सकता है कि पार्टी बहुत गंभीरता से लड़ी। सत्ता विरोधी लहर के बावजूद 25 सीटें हासिल करने में कामयाब रही।
पार्टी को 43% वोट मिले हैं, जो कांग्रेस को मिले वोटों से मात्र .9% कम हैं, यानी सीटें भले कम आई हैं, लेकिन जनता का विश्वास पार्टी के प्रति वोटरों ने जताया भी है। इसका श्रेय भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया जा सकता है, क्योंकि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सरकार के डबल इंजन को खींचने में उनकी अहम भूमिका रही है।
कांग्रेस को 5 साल बाद हिमाचल प्रदेश में वापसी का मौका मिला है। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि पार्टी का मुख्यमंत्री का चेहरा कौन होगा? पर, यहां कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की तारीफ की जानी चाहिए। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में बहुत ही सक्रियता दिखाई।
जबरदस्त कैंपेनिंग की और पार्टी को 21 से 40 सीटों तक ले आईं। छोटा राज्य है, इसलिए हिमाचल प्रदेश में चुनौतियां भी गंभीर हैं। राज्य की केंद्र सरकार पर निर्भरता ज्यादा रहती है। चूंकि, बहुमत से सीटें भी बहुत अधिक नहीं हैं, इसलिए कांग्रेस के लिए पांच साल सत्ता चलाना आसान भी नहीं होगा। एक डर जो पूरे विपक्ष को बना रहता है कि भाजपा कभी भी तख्तापलट कर देगी है, उससे निपटना भी कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण रहने वाला है, जिसकी शुरुआत उसने अपने नवनिर्वाचित विधायकों को हिमाचल प्रदेश से बाहर शिफ्ट करके कर दी है।
आम आदमी पार्टी की दिशा और संभावना
आम आदमी पार्टी ने गुजरात की तरह हिमाचल प्रदेश को गंभीरता से नहीं लिया और मात्र 1% वोट हासिल कर सकी। उसका खाता नहीं खुला। आम आदमी पार्टी को छोटे राज्यों में किस्मत आजमाने की ज्यादा जरूरत है, पर शायद उत्तराखंड का जो अनुभव रहा, वह अरविंद केजरीवाल को रास नहीं आया।
उनकी महत्वाकांक्षा राष्ट्रीय स्तर के नेता के रूप में स्थापित होने की है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधी चुनौती देकर ही संभव हो सकता है। गुजरात के नतीजों से आम आदमी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने का मार्ग भी साफ हो गया है। मात्र 10 साल में आम आदमी पार्टी ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वह काफी बड़ी हैं। अब समय आ गया है कि अरविंद केजरीवाल पार्टी की विचारधारा भी जनता को बताएं, क्योंकि कई गंभीर मुद्दों पर उनका मौन अखरता है।
अब वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कौन सा विपक्ष का नेता चुनौती देता है? भारत जोड़ो यात्रा को सफल बताने वाली कांग्रेस राहुल गांधी को नरेंद्र मोदी के सामने खड़ा कर रही है, जबकि आम आदमी पार्टी अरविंद केजरीवाल को प्रधानमंत्री का विकल्प बता रही है। ममता बनर्जी, के.चंद्रशेखर राव, नीतीश कुमार जैसे नेता क्या रणनीति अपनाएंगे? यह भी देखना दिलचस्प होगा।
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