श्रीलंकाः आश्चर्य में डाल देगी सीता वाटिका की कहानी, दुनिया के सामने है रामायण का ये सच
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5 हजार साल से ज्यादा साल हो गए। श्रीलंका में रामायण काल के ऐतिहासिक अवशेष आज पूरी दुनिया में चर्चा के केंद्र में हैं। भारत सहित पूरे विश्व से पर्यटक यहां पहुंचते हैं और श्रीलंका पहुंचकर एक अलग ही अनुभूति का अहसास करते हैं। श्रीलंका के नुवराएलिया स्थिति अशोक वाटिका भी एक ऐसा ही स्थान है जो आपको अचरज और आश्चर्य में डाल देता है। यह वही स्थान है जहां रावण सीता माता का अपहरण करके ले गया था। श्रद्वालु जब यहां पहुंचते हैं तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहता।
भारत सरकार ने दिया अशोक वाटिका को दर्शनीय स्वरूप
दरअसल, यह स्थान है भी ऐसा। अशोक वाटिका के मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही एक अजीब अनुभूति का एहसास होता है। इस जगह से भारतवासियों की विशेष जुड़ाव है। यही वजह है कि जो भी हिंदुस्तानी यहां पहुंचता है तो खुद को भाग्यशाली समझता है। श्रीलंका सरकार ने अशोक वाटिका को अब नया दर्शनीय स्वरूप दे दिया है।
बीते कुछ सालों में सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर पूरे क्षेत्र का आधुनिकीकरण कर दिया है। मंदिर से लेकर पूरे परिसर को संगमरमर से सुसज्जित कर दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम हैं और वहां रोजाना हजारों विदेशी पर्यटक सीता माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। वाटिका में प्रवेश निशुल्क है। श्रद्वालुओं से किसी भी तरह का कोई चार्ज नहीं वसूला जाता।
कैसे पहुंचे सीता वाटिका
नुवराएलिया स्थित सीता वाटिका अब श्रीलंका का हिल स्टेशन माना जाता है। वाटिका की कुछ दूरी पर एक बड़ी सी झील है जिसका पानी गहरा नीला है। यह स्थान बौद्व की प्रसिद्व स्थली कैंडी से सत्तर-अस्सी किलोमीटर दूर है और वहां जाने के लिए सरकार ने विशेष पब्लिक यातायात साधन मुहैया करा रखे हैं।
सामान्य किराए पर बसें और कारें 24 घंटे उपलब्ध रहती हैं। कैंडी से जैसे ही आप सीता वाटिका के लिए चलोगे तो आपको पूरे रास्ते में हरे-भरे चाय के बागान दिखाई देंगे। चारो तरफ बहता नीला पानी और बड़े-बड़े पर्वत मन मोह लेंगे। अशोक वाटिका में राम-सीता का भव्य मंदिर है, जहां श्रद्वालु श्रद्वा से अपना सिर झुकाकर मन्नत मांगते हैं। सुबह-शाम आरती होती है और भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाता है।
हनुमान के पद्चिन्ह
सीता वाटिका में हनुमान का पद्चिन्ह आज भी मौजूद हैं। वहां के पुजारी शिवराज शर्मा बताते हैं कि जब हनुमान सीता को खोजते-खोजते पहली बार वाटिका में आए थे, तो उनका पहला कदम जिस जगह पर पड़ा था वहां बड़ा सा गड्ढा बना हुआ है। गड्ढे को आस्था से स्पर्श कर श्रद्धा से से भर जाते हैं।
विदेशी श्रद्वालुओं की जिज्ञासा
श्रीलंका में भारत के अलावा दूसरे देशों के पहुंचने वाले श्रद्वालुओं में सीता वाटिका के इतिहास के संबंध में जानने की अभिरुचि ज्यादा रहती है। हालांकि इसके लिए वहां के व्यवस्थापकों ने पूरी इंतजाम किए हैं। रामायण व पुराने अभिलेखों के माध्यम से वहां के लोग विस्तार से बताते हैं। माता सीता के हरण के बाद रावण कब-कब वाटिका में आता था, सुरक्षा में कितनी दासियां लगाई थीं, पहरेदारी कैसी की गई थी, ऐसी तमाम बातें वहां के लोग बड़ी तल्लीनता से समझाते हैं। जो लोग रामायणकाल को काल्पनिक मानते हैं उनके लिए सीता वाटिका किसी बड़े सबूत से कम नहीं है।
मुख्य पुजारी शिवराज शर्मा कहते हैं रामायण की सभी बातें सच हैं। श्रीलंका रामायण रिसर्च सेंटर ने अपने दशकों की खोज के बाद रामयुग के अनसुलझे किस्सों का पता कर लोगों के भ्रम को तोड़ने का काम किया है।
यात्रा संस्मरण, श्रीलंका से लौटकर.
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