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स्मृतिशेष: एक ही पार्टी में संतुलित राजनीति करने वाले नेता थे अरुण जेटली

Sanjiv Pandeyसंजीव पांडेय Updated Sat, 24 Aug 2019 01:23 PM IST
अरुण जेटली
अरुण जेटली - फोटो : Facebook
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पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का निधन हो गया है। वह 9 अगस्त से एम्स में भर्ती थे। जेटली का निधन 12 बजकर सात मिनट पर हुआ है। अरुण जेटली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे करीबी नेताओं में गिने जाते थे। जेटली पिछले दो साल से गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे। साल 2019 में जब भारतीय जनता पार्टी प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई तो अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर मांग की थी उन्हें नई सरकार में कोई जिम्मेदार न दी जाए, क्योंकि वह अपने स्वास्थ्य पर फोकस करना चाहते हैं।

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जेटली ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और अखिल भारतीय विधार्थी परिषद से जुड़ अपनी राजनीति की शुरूआत की थी। दिल्ली विश्वविधालय में जेतली अखिल भारतीय विदार्थी परिषद की राजनीति करते रहे। बाद में वे भाजपा की राजनीति में आ गए। भाजपा की राजनीति में उन्होंने पूरी तरह से संतुलन की राजनीति की। हर बड़े नेता के खास अरुण जेटली रहे। बताया जाता है कि नरेंद्र मोदी ने नब्बे के दशक में ही अरुण जेटली का महत्व भाजपा की राजनीति में देख लिया था। 1990 के दशक में नरेंद्र मोदी के संबंध अरुण जेटली के संबंध बने जो अंतिम समय तक रहे।

भाजपा की राजनीति में गजब का संतुलन साधने की कला जेटली के पास थी। अरुण जेटली, अटल बिहारी वाजपेयी के भी खास रहे और एलके आडवाणी एवं नरेंद्र मोदी के भी खास रहे। जब भाजपा में सत्ता संघर्ष तेज हुआ तो भाजपा में दो से तीन गुट बनते नजर आए। 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा मे एक तरफ एलके आडवाणी का गुट आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने के लिए अंतिम समय तक प्रयास करता रहा। दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनना तय हो गया था। ऐसे में अरुण जेटली ने संतुलित राजनीति की।

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