रोशन हुआ बुजुर्ग का घर: देश को एक नहीं अनेक अनुकृति शर्मा चाहिए
आईपीएस अफसर अनुकृति शर्मा ने हाल में एक वीडियो अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसमें वह एक बुजुर्ग के घर बिजली का कनेक्शन लगवा रही हैं। यदि हर स्तर पर अधिकारी यह ठान लें कि हमें योजनाओं का फायदा निचले स्तर तक पहुंचाना है तो शायद चंद दिनों में न केवल हमारे घर रोशन हो जाएं, साथ ही योजनाओं का फायदा वास्तविक लोगों को मिल जाए।
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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से मात्र 60 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश का बुलंदशहर जिला है। बुलंदशहर में पदस्थ आईपीएस अफसर अनुकृति शर्मा ने हाल में एक वीडियो अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसमें वह एक बुजुर्ग महिला नूरजहां के घर बिजली का कनेक्शन लगवा रही हैं। अनुकृति शर्मा ने इसे अपने जीवन में फिल्म स्वदेश वाला वाक्या बताया और इसी वीडियो को पाकिस्तान के चर्चित पत्रकार डॉ. कमर चीमा ने साझा करते हुए तंज कसा कि भारत में लाखों लोग बिना बिजली के जीवन यापन कर रहे हैं।
फिर क्या था, चीमा के तंज पर बहस सोशल मीडिया पर छिड़ी, जिसमें कुछ लोगों ने चीमा को ट्रोल करते हुए कई आंकड़े पेश कर दिए, जिनमें भारत में 99 प्रतिशत घरों में बिजली कनेक्शन लगने और पाकिस्तान में 75 प्रतिशत घरों में बिजली पहुंचने के तथ्य सामने रखे।
बिजली एक ऐसा मुद्दा है, जो पिछले कुछ दशकों में देश की राजनीति के केंद्र में बना हुआ है। वर्ष 2014 में जब दिल्ली की गद्दी पर नरेंद्र मोदी बैठे तो सितंबर 2017 में उन्होंने ''प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना यानी सौभाग्य'' योजना की शुरुआत की, जिसमें आर्थिक रूप से गरीब घरों के लिए निःशुल्क मीटर कनेक्शन और अन्य घरों के लिए 500 रुपये, जो 10 रुपये मासिक किश्त पर बिजली बिलों में समायोजित होता है, का ऐलान किया।
सरकार का दावा है कि अब तक इस योजना के तहत 2.86 करोड़ घर रोशन हो चुके हैं, यानी जब से बिजली भारत में आई है और देश की आजादी के करीब-करीब 70 सालों तक 2.86 करोड़ से अधिक घरों में बिजली नहीं पहुंची थी।
क्या वास्तव में हर घर पहुंची बिजली?
बिजली को लेकर अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के दूसरे मंत्री पूर्व की कांग्रेस सरकारों पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि उन्होंने लोगों के घरों को रोशन नहीं किया। इन दिनों मोदी सरकार के 9 वर्ष पूर्ण होने पर सरकार सौभाग्य योजना को भी बड़े गर्व के साथ जनता के आगे आंकड़ों के साथ पेश कर रही है, पर सवाल यह नहीं है कि सरकार ने कितने घरों में बिजली का कनेक्शन मुहैया करा दिया।
सवाल यह है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से 60 किलोमीटर दूर एक जिले का कोई घर बिजली कनेक्शन से वंचित कैसे रहा? निश्चित रूप से सरकार की नीतियों, लालफीताशाही और स्थानीय राजनीति को इसके लिए दोषी ठहराया जा सकता है।
वैसे इन दिनों बिजली का मुद्दा देश की राजनीति के केंद्र में भी बना हुआ है और मुफ्त बिजली देने की होड़ राजनीतिक पार्टियों में लगी हुई है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने मुफ्त बिजली से दो चुनाव जीते हैं। पंजाब में उनका यह फार्मूला सफल रहा है। पिछले दिनों कर्नाटक में कांग्रेस ने भी मुफ्त बिजली का वादा किया और राजस्थान में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार मुफ्त बिजली दे रही है। ऐसा ही छत्तीसगढ़ समेत दूसरे राज्यों में भी हो रहा है।
यह बात और है कि बिजली कंपनियां बेहद घाटे में हैं और राज्य सरकारों पर मुफ्त बिजली का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यों को आगाह भी कर चुके हैं, पर यह सिलसिला रुकेगा, ऐसा कहीं से प्रतीत नहीं होता है। हाल में केंद्र सरकार ने रात और दिन में अलग-अलग बिजली दरों की बात कह डाली, यानी दिन में सस्ती और रात में महंगी बिजली लोगों को दी जाएगी।
अधिकारियों को इसी तरह के प्रयास की आवश्यकता
आईपीएस अनुकृति शर्मा ने तो बुजुर्ग महिला नूरजहां के घर कनेक्शन लगवा कर वाह-वाही लूट ली और उनके इस ट्वीट को दुनिया भर में 13 लाख से अधिक लोगों ने देखा। अनुकृति ने नूरजहां के परिवार के साथ कई फोटो भी सोशल मीडिया पर साझा की है। चलिए यह मान लेते हैं कि एक शक्तिशाली अधिकारी के प्रयासों से नूरजहां का घर रोशन हो गया, पर अभी उन लाखों घरों का क्या? जिनके घर में रोशनी नहीं पहुंची है।
क्या जो प्रयास अनुकृति शर्मा ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर किया, वह अन्य अधिकारियों को नहीं करना चाहिए। यदि हर स्तर पर अधिकारी यह ठान लें कि हमें योजनाओं का फायदा निचले स्तर तक पहुंचाना है तो शायद चंद दिनों में न केवल हमारे घर रोशन हो जाएं, बल्कि जितनी भी योजनाएं सरकार समाज को ऊंचा उठाने के लिए चलाती है, उनका फायदा वास्तविक लोगों को मिल जाए।
आज जरूरत हर अधिकारी को अनुकृति शर्मा बनने की है।
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