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अमेरिका में विरोध-प्रदर्शन: इतिहास के आइने में अश्वेत आंदोलन और नस्लवाद का शर्मनाक अतीत

Thu, 04 Jun 2020 11:12 AM IST
Himashu Joshi हिमांशु जोशी
Updated Thu, 04 Jun 2020 11:12 AM IST
सार

  • अमेरिकी समाज में अश्वेतों की स्थिति में कुछ खास सुधार नहींं आए।
  • ट्रंप का नस्लीय भेदभाव से पुराना नाता रहा है।
  • सुरक्षा कारणों से ट्रंप को बंकर में ले जाया गया।

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अश्वेत व्यक्ति की मौत के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter

विस्तार

महामारी कोरोना की वजह से एक लाख से ऊपर हो चुकी मौतों से पहले ही जूझ रहे अमेरिका में अब नस्लीय मौत के कारण हो रहे विद्रोह की वजह से संकट और गहरा गया है।

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मिनिपोलिस में बेहतर जिंदगी की तलाश के लिए टेक्सास से मिनिपोलिस आए एक अश्वेत अमेरिकी नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड को नकली डॉलर चलाने के प्रयास में पकड़ा गया था।

एक राह चलते व्यक्ति के द्वारा बनाई गई नौ मिनट की वीडियो में दिख रहा है कि मिनिपोलिस के एक पुलिसकर्मी डरेक चाउवीन ने जॉर्ज फ्लॉयड की गर्दन को अपने घुटनों से दबाया हुआ है और जार्ज फ्लॉयड उसमें अपने चारों ओर घिरे पुलिस कर्मियों से कह रहा है कि उसे सांस लेने में कठिनाई हो रही है। उसकी मृत्यु के बाद से पुलिस हिरासत में हुई इस मौत का विरोध पूरे अमेरिका में फैल गया है और अब इस विरोध ने हिंसक रूप ले लिया है।
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यह विरोध सिर्फ एक दिन हुई घटना की वजह से नही हो रहा है इसकी चिंगारी अमेरिका में काफी सालों से भड़क रही है। 

4 जुलाई 1776 में अमेरिका को स्वतंत्रता मिल गई थी, पर अफ्रीका से लाए गए अश्वेत गुलामों को दासता से मुक्ति नहींं मिली थी। उनसे घर के सारे कार्य कराए जाते थे, खेती में भी अश्वेतों से कार्य कराया जाता था और उनका शारीरिक शोषण आम बात थी।
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आजादी के बाद उनको अधिकार देने की बात शुरू हो गई थी पर उत्तर और दक्षिणी अमेरिका में इस बात को लेकर मतभेद था।

दक्षिणी राज्यों की बढ़ती नाराजगी को कम करने के लिए वर्ष 1850 में भगोड़ा दास कानून लाया गया जिसमें मालिक से भाग चुके अश्वेतों को पकड़कर वापस लाया जा सकता था।

उत्तर और दक्षिण राज्यों के बीच इन्हीं मतभेदों की वजह से 1861-1865 के बीच गृह युद्ध चला। अब्राहम लिंकन ने इन सभी आपसी मतभेदों को खत्म कर मुक्ति उद्धघोषणा लाने के बाद गृहयुद्ध समाप्त कराया।

उसके सौ साल बाद भी अमेरिकी समाज में अश्वेतों की स्थिति में कुछ खास सुधार नहींं आए और ना ही उन्हें श्वेतों के समान अधिकार प्राप्त हुए। इसी के परिणाम स्वरूप वर्ष 1955-68 तक मार्टिन लूथर किंग की अगुवाई में अमेरिका में अफ्रीकी अमेरिकी नागरिक अधिकार आंदोलन चला।

 

1992 में लांस एंजेल्स दंगों ने अमेरिका पर दाग लगाया...

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अमेरिका में अश्वेत के साथ भेदभाव का पुराना इतिहास है। - फोटो : Twitter

इसी आंदोलन के बीच 1963 में अपने दिए गए एक भाषण में मार्टिन लूथर किंग ने कहा था कि आज मुक्ति उद्घोषणा के सौ साल बाद भी अश्वेत अमेरिकी अपने देश में ही खुद को निर्वासित पाता है और समाज के कोनों में सड़ रहा है।

उन्होंने कहा था कि मेरा एक स्वप्न है कि भविष्य का अमेरिका ऐसा हो जहां मेरे बच्चे अपने रंग से नही अपने काम और चरित्र से पहचाने जाएं।

उसके बाद भी वर्ष 1919 में शिकागो दंगे हुए, 1992 में लांस एंजेल्स दंगों ने अमेरिका पर दाग लगाया। साल 2014 जुलाई में ठीक इसी तरह का वीडियो सामने आया था जब न्यूयॉर्क में एक अश्वेत पिता एरिक गार्नर को पुलिस द्वारा इसी तरह मारा गया था।

वर्ष 2014 में ही अमेरिका के क्लेवलेंड, ओहियो में एक बारह वर्षीय बच्चे तामिर राइस को पिस्तौल लेकर घूमने की सूचना पर पुलिस कर्मियों ने गोली मार दी जिससे उसकी मौत हो गई थी। जांंच में पाया गया कि बच्चे के पास वह पिस्तौल नकली थी।

इसी साल 23 फरवरी में अहमद अरबरी नामक अश्वेत अमेरिकी को जॉगिंग करते हुए उसके घर के पास ही लुटेरा समझ कर श्वेत पिता-पुत्र ने मिलकर गोली मार दी थी।

अमेरिकी अखबार 'द गार्जियन' द्वारा कराए गए एक सर्वे के अनुसार अमेरिका में पुलिस द्वारा प्रति दस लाख लोगों में मारे गए 7.13 लोग अश्वेत होते हैं वही मारे गए श्वेतों की संख्या 2.91 है। अमेरिका में पुलिस द्वारा एक साल में एक हजार लोग मारे जाते हैं।

व्हाइट हाउस के सामने यह प्रदर्शन इतना बढ़ गया था कि सुरक्षा कारणों से ट्रंप को बंकर में ले जाया गया

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बराक ओबामा जब अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने थे। - फोटो : अमर उजाला

बराक ओबामा जब अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने थे तब यह लगा था कि अब नस्लीय भेदभाव वाला अमेरिका पीछे छूट गया है पर ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद स्थिति और बदतर हो गई। ट्रंप का नस्लीय भेदभाव से पुराना नाता रहा है।

1973 में ट्रंप पर आरोप लगे थे कि उन्होंने रंग के आधार पर अपने फ्लैट किराए पर दिए थे। अश्वेतों को अपने फ्लैट किराए पर देने से उन्होंने साफ मना कर दिया था।

1980 में किप ब्राउन जो ट्रंप बिल्डिंग के पुराने कर्मचारी थे उन्होंने ट्रंप पर यह आरोप लगाया था कि जब ट्रंप कैसिनो में आते थे तो अश्वेतों को वहां से हटने के लिए कहा जाता था।

वर्ष 1989 में बलात्कार के आरोप में सजा होने के बाद मुक्त हो चुके पांच अश्वेत नागरिकों पर ट्रंप ने 2016 में बयान दिया था कि वह अब भी मानते हैं कि वो पांचों दोषी थे।

2015 में मेक्सिकन अप्रवासियों को ट्रम्प ने अपराधी, बलात्कारी और नशे का कारोबार करने वाला कहा था। 2016 में उन्होंने अश्वेतों को गरीबी में जीने वाला कहा था। ट्रंप हमेशा से ओबामा के विरोधी भी रहे हैं।

मिनिपोलिस पुलिस ने पिछले साल ट्रंप की एक रैली में 'कॉप्स फॅार ट्रंप' नारे की टीशर्ट पहन कर उनका स्वागत किया था। न

स्लीय भेदभाव के खिलाफ हो रहे इन विरोधों के बीच ट्रंप ने ट्विट कर इन प्रदर्शनकारियों को ठग्स(डाकू, अपराधी) कहा है। जिसे ट्विटर ने हिंसा भड़काने वाला ट्वीट कहा है।

व्हाइट हाउस के सामने यह प्रदर्शन इतना बढ़ गया था कि सुरक्षा कारणों से ट्रंप को बंकर में ले जाया गया। अब देखना यह होगा कि जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद हो रहे यह प्रदर्शन भविष्य के अमेरिका में कुछ बदलाव ला पाएंगे या नहीं।

कोरोना की वजह से पहले ही आर्थिक रूप से टूट रहे अमेरिका को अपनी विश्व महाशक्ति की छवि बरकरार रखने के लिए गोरे-काले के इस तिलिस्म को तोड़कर हर नागरिक को एक ही नजर से देखना शुरू करना होगा। मार्टिन लूथर किंग ने श्वेत अश्वेत की धारणा मुक्त जो अमेरिका देखा था वह तभी संभव हो पाएगा।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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