बस्ती में महर्षि वशिष्ठ की कुटिया हो सकती है लेकिन कुटिया के अंदर बस्ती का होना संभव नहीं

anveshan singhअन्वेषण सिंह Updated Fri, 06 Mar 2020 08:38 AM IST
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बस्ती का नाम वशिष्ठनगर करने की कवायद आकार लेती दिख रही है
बस्ती का नाम वशिष्ठनगर करने की कवायद आकार लेती दिख रही है - फोटो : Self

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इलाहाबाद का नाम प्रयागराज और फैजाबाद का नाम अयोध्या करने के बाद बस्ती का नाम वशिष्ठनगर करने की कवायद आकार लेती दिख रही है। जहां इलाहाबाद और फैजाबाद की पहचान को साम्प्रदायिकता के चश्मे से देखा और दिखाया गया और इन शहरों के नाम के बदलाव को सांस्कृतिक संरक्षण के रूप में प्रचारित किया गया लेकिन यह सभी तर्क बस्ती की चौहद्दी पर आकर हांपने लगते हैं। 
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बस्ती नाम न तो किसी गुलामी का प्रतीक है और न ही किसी सम्प्रदाय विशेष की आस्था का प्रतीक है बल्कि यह कस्बाई विश्वास का प्रतीक है जिसके मूल में आपसी सहयोग और भाईचारा है जो यह बतलाता है कि यहां कोई भी बस सकता है। यहां बसने वालों से कोई कागज नहीं मांगता क्योंकि यह कागज पर बना कस्बा नहीं है यह भावनात्मक लगाव से बना है जिसकी जड़े आपको घाट और कब्रिस्तान पर जाकर देखने को मिलेगी, जहां उनके पुरखे विलीन हुए हैं।
शहर के बड़े बुजुर्ग पूछने पर बताते हैं कि इस क्षेत्र में महर्षि वशिष्ठ रहा करते थे और यह जगह उनके नाम पर वैशिश्ठी हुई लेकिन कालांतर में नाम बिगड़ते बिगड़ते बस्ती हो गई, लेकिन शहर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की छानबीन के बाद इस बात का एहसास हुआ कि बस्ती नाम बिगड़ते बिगड़ते नहीं बल्कि इस जगह का क्रमिक विकास होते होते हुआ। ऐसा कस्बा जिसकी पहचान सिर्फ नाम से ही सेक्युलर नहीं है बल्कि अपने मिजाज से भी है। 
शहर की एक सीधी लाइन में आपको मंदिर, पार्क, मदरसा, मस्जिद, इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, गुरुद्वारा, बाजार, सब्जी मंडी,अस्पताल, बस अड्डा दिख जाएगा। जिस शहर में मुस्लिम दर्जी भगवान के कपड़े सिलते हों, रमजान के समय मुसलमान हिंदुओं की दुकान से खजूर लेते हों, किसी के भी धार्मिक और वैवाहिक आयोजन में टेंट सिखों के यहां से आता है। 

बस्ती शहर की खूबसूरती का अन्दाज़ा इस बात से लगाइये कि यहां आवास विकास के मुसलमान अपना पता स्पष्ट करने के लिए लैंडमार्क काली जी का मंदिर बताते हैं और त्रिपाठी गली में रहने वाले पंडित जी लोग का लैंडमार्क गुरुद्वारा है और दरिया खां में रहने वाले कायस्थ लोगों का लैंडमार्क दारूल उलूम है, पछपेड़िया के मुसलमानों के लिए लैंडमार्क गायत्री मंदिर है। मालीटोला से फूल संघ-भाजपा के कार्यक्रम और ताजिया में दोनों में जाता है।
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