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पंछियों का संसार: वायुमार्ग से आए शिशिर के प्रवासी

Priyamvada Bagaria प्रियम्वदा बगरिया  
Updated Tue, 19 Dec 2023 02:10 PM IST
सार

ये कहानी गूज के मध्य एशिया से भारत तक की यात्रा से जुड़ी है। झुंड में से एक वायुराज नामक युवा हंस, थोड़ा उत्सुक और जिज्ञासु  है जो बिछड़ जाता है। फिर...

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Adventures Journey Of Bar Headed Goose Across Border
कहानी गूज के मध्य एशिया से भारत तक की यात्रा का से जुड़ी है - फोटो : ऐशा

विस्तार

यह सबसे ऊंची उड़ान भरने वाले पक्षियों में से एक, बार-हेडेड गूज (सफेद हंस) के झुंड में एक नन्हे परिंदे की कहानी है। कहानी गूज के मध्य एशिया से भारत तक की यात्रा से जुड़ी है। झुंड में से एक वायुराज नामक युवा हंस, थोड़ा उत्सुक और जिज्ञासु  है।

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यह वायुराज की, तिब्बत पठार से निकल कर, हिमालय पर्वत श्रृंखला पर उड़ान भरते हुए भारत पहुंचने की पहली यात्रा थी। वह नए दृश्यों और अन्य पक्षियों को देखने समझने के लिए अत्यंत उत्सुक था। उड़ान शुरू होने से पहले वायुराज की मां ने उसे हल्की चेतावनी भी दी कि उसे झुंड के साथ-साथ रहना होगा।  
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झुंड 5500-6000 मीटर की ऊंचाई पर लम्बी यात्रा तय कर हिमालय को पार कर, गुजरात में कच्छ के छोटे रण पर ठहराव लेने को उतरा। झुंड का एक हिस्सा रास्ते में पहले ही भारत के पूर्वी भाग असम की और अग्रसर हो चुका था।
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वायुराज का झुंड जैसे ही कच्छ के छोटे रण पर उतरा, वायुराज फ्लेमिंगो (राजहंस) और दसमोसाइल क्रेन से मंत्रमुग्ध हो झुंड से कुछ बिछड़ सा गया। वह फ्लेमिंगो और क्रेन को उत्साहित हो निहार ही रहा था कि रण के एक सुदूर कोने में वायुराज को बादामी रंग के स्तन वाले अद्भुत रेड-ब्रेस्टेड गूज दिखाई दिए।


रेड-ब्रेस्टेड गूज को देखना दुर्लभ और रोमांचक

उसने पास खड़े फ्लेमिंगो जोड़े से पूछा तो पाया कि यह रेड-ब्रेस्टेड गूज सामान्य तौर पर अपनी सर्दियां बिताने भारत आते हैं और उन्हें यहां देख पाना एक दुर्लभ दृश्य ही था। वायुराज बादामी रंज वाले गुज को देख इतना मोहित हो गया था कि उसने अपने झुंड के हॉर्न की आवाज पर ध्यान नहीं दिया और वह पीछे रह गया। गूज का झुंड दक्षिण भारत के पॉइंट कैलीमेर सैंक्चुअरी की और बढ़ गया था।  

नन्हे वायुराज को जब ज्ञात हुआ कि वह अपने झुंड से बिछड़ गया है, वह घबरा गया और बेचैन हो पास बैठे डेमोइसेल क्रेन से पूछा कि उसका झुंड संभवतः किस और गया होगा? डेमोइसेल क्रेन ने वायुराज को बताया कि हर वर्ष बार-हेडेड गूज भारत के कई हिस्सों में अपनी सर्दियां बिताते हैं, जैसे ही असम, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान एंड लगभग सभी तटीय स्थानों पर उनके पाए जाने की संभावना हो सकती है। वायुराज चिंतित हुआ कि इतने बड़े देश में वह अपने झुंड से पुनः कैसे मिल पाएगा?

डेमोइसेल क्रेन के साथ-साथ फ्लेमिंगो ने वायुराज को सुझाव दिया कि क्यों न वह गुजरात के ही नल सरोवर में अपने झुंड को ढूंढने का प्रयास करे, क्या पता झुंड नलसरोवर के आर्द्रभूमि में उगने वाले घास खाने गया हो। वायुराज ने फ्लेमिंगो से नल सरोवर का रास्ता पूछ, वहां की उड़ान भरी।

नलसरोवर में वायुराज ने घास की नोक पर फारेस्ट वैगटेल बैठा मिला। पूछने पर वैगटेल ने वायुराज को बताया कि नलसरोवर में तो गूज का कोई झुंड नहीं उतरा, किन्तु संभवतः वे राजस्थान के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान गए होंगे, क्युंकि राजस्थान गुजरात के समीप है और पहले नदजीकी स्थानों पर तलाशना आसान होगा, इसलिए वायुराज केवलादेव जाने का निश्चय करता है।  

Adventures Journey Of Bar Headed Goose Across Border
सुंदरता और पक्षियों की विविधता को देख अत्यन्त उत्साहित हो जाता है - फोटो : ऐशा

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान- पक्षियों की विविधता भरा संसार

केवलादेव पहुंचने पर वायुराज एक बार पुनः वहां कि सुंदरता और पक्षियों की विविधता को देख अत्यंत उत्साहित हो जाता है। एक बार को तो वह भूल भी गया की वह अपने झुंड से बिछड़ गया है। वहां उसे झुंड के झुंड ढोक (पेंटेड स्टोर्क), राजीव अम्बुकुक्कुटी (पर्पल मूरहेन), ग्लॉसी इबिस, ग्रे बगुला (ग्रे हेरॉन) डार्टर व अन्य अद्भुत पक्षियों का परिचय मिला और वह पक्षी प्रजातियों कि विविधता में खो गया। तभी उसे केवलादेव के जलाशय में बार-हेडेड गूज का एक झुंड दिखा।

गूज के झुंड को देख कर वह अत्यंत प्रफुल्लित हुआ और समीप जाकर अपनी मां को ढूंढने लगा। कुछ ही पलों में वह अपनी मां से मिल गया और थोड़ी झिरकी पाने के बाद, उसने अपनी मां को अपनी यात्रा कि कहानी सुनाई।

वायुराज की मां ने उसे बताया की झुंड तमिलनाडु के पॉइंट कैलीमेर सैंक्चुअरी की ओर ही अग्रसर था, किंतु वायुराज के पीछे छूट जाने के कारण, झुंड ने केवलादेव में अपने ठहराव की अवधि बढ़ा ली थी। झुंड को यकीन था कि वायुराज की चंचलता और उत्सुकता उसे केवलादेव तक ले ही आएगी।          

झुंड ने वायुराज के पुनः मिल जाने पर जोरों से हॉर्न की आवाज में खुशी मनाई और तय किया की वह जल्द ही पॉइंट कैलीमेर की यात्रा पर निकलेंगे, भारत में अपनी शिशिर यात्रा पूर्ण करने। अब वायुराज पहले जितना ही उत्सुक तो था किन्तु अब सचेत भी था।

झुंड आखिर पॉइंट कैलीमेर पहुंचता है और मध्य एशियाई सर्दियों से बचने के लिए पॉइंट कैलीमेर के आरामदेह हल्के उष्ण वातावरण में अपनी भारत की यात्रा का समापन करता है।  वायुराज को यहां भी अन्य शिशिर प्रवासी पक्षियों से मित्रता करने का मौका मिलता है।

स्पॉट बिल्ड पेलिकन, कर्ल्यू सैंडपाईपर, ब्लैक नेक्ड स्टोर्क जैसे पक्षियों से मिल वह जान पाया की भारत में शिशिर प्रवासी पक्षियों की विविधता अत्यंत सुखद है। वायुराज जैसे पक्षी प्रेमी, शिशिर का वर्ष पर्यन्त इंतजार करते हैं, ताकि वायुराज समेत वे अन्य सभी भिन्न प्रजाति के प्रवासी प्रक्षियों का स्वागत कर सकें।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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