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कोरोना से जंग: 5 अप्रैल की रात पटाखे फोड़ने की मूर्खता को कैसे देखेंगे? पर्यावरण को पहुंचा नुकसान

Wed, 08 Apr 2020 10:56 AM IST
Yogita Yadav योगिता यादव
Updated Wed, 08 Apr 2020 10:56 AM IST
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5 april sunday 9 baje 9 minutes massive fire crackers burn fire incidents reported air quality index increases in india
हमने जो पटाखों की लडि़यां फूंकी, उससे एयर क्वालिटी इंडेक्स 216 प्वाइंट तक पहुंच गया। - फोटो : pti

हम प्रकाश के संकल्प के साथ अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को जाग्रत करने निकले थे, पर अति उत्साह में हमने जो पटाखों की लड़ियां फूंकी, उससे एयर क्वालिटी इंडेक्स 216 प्वाइंट चढ़कर अनहेल्दी स्तर पर जा पहुंचा। इसे मूर्खता का एक्सक्ट्रा एफर्ट न कहा जाए तो और क्या कहें... 

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‘तमसो मा ज्योसतिर्गमय’ अर्थात् अंधकार से प्रकाश की ओर। प्रकाश एक शक्ति है। अंधेरे के विरूद्ध अनवरत छेड़ा गया युद्ध है। इसी संकल्प के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समस्त देशवासियों से प्रकाश की एकजुटता दिखाने को कहा था। कोरोना का संकट अब भी जस का तस बरकरार है।
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संक्रमण और संक्रमण से होने वाली मृत्यु के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले दो दिनों में संक्रमण के मामलों में खासी बढ़ोतरी देखी गई है। अब तक संक्रमण के 3000 मामले सामने आ चुके हैं, जबकि इससे 83 लोगों की मृत्यु़ भी हो चुकी है। इस जंग में स्वास्थ्य कर्मी दिन रात एक किए हुए हैं। 
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प्रधानमंत्री ने शुक्रवार 3 अप्रैल को राष्ट्र  के नाम अपने संबोधन में सभी देशवासियों से कोरोना के खिलाफ जंग में प्रकाश का योगदान करने को कहा। इसके लिए सभी को पांच अप्रैल को रात नौ बजे नौ मिनट के लिए स्वयं प्रकाश करना था। फिर चाहें वह दीया हो, मोमबत्ती  या मोबाइल की फ्लैश लाइट।

भारत में यह संभव ही नहीं है कि किसी भी काम में लोग एक्ट्रा एफर्ट न दिखाएं...

5 april sunday 9 baje 9 minutes massive fire crackers burn fire incidents reported air quality index increases in india
अतिवादियों ने प्रकाश के इस संकल्प को भी दूषित कर दिया - फोटो : file photo

कई लोगों ने हताशा के इस माहौल में प्रधानमंत्री के इस आह्वान को स्वागत योग्य बताया तो कुछ लोगों ने इसकी आलोचना भी की। पर 5 अप्रैल को रात्रि नौ बजे की तस्वीर बयां कर रहीं थी कि देशवासियों ने एक स्वतर में प्रधानमंत्री के इस आह्वान का अनुपालन किया है।

लोगों ने एक दीया ही नहीं जलाया, बल्कि दीपों की अवलियां सजाकर एक तरह से दीपावली ही मना दी। आध्यात्मिक तौर पर देखें तो यह कोरोना के समय में बढ़ते जा रहे भय, आशंका और अवसाद के खिलाफ अपना-अपना प्रकाश पुंज लेकर तैयार होना था।

पर भारत में यह संभव ही नहीं है कि किसी भी काम में लोग  एक्स्ट्रा न दिखाएं। जिन लोगों ने वैज्ञानिकता का समर्थन करते हुए दीप जलाने को अंधविश्वास कहा था उन्हें भी यह दृश्य रोमांचित कर रहा था। पर अतिवादियों ने प्रकाश के इस संकल्प को भी दूषित कर दिया। वे पटाखे, बम और लड़ियां लेकर घरों की छतों पर चढ़ गए।

मौन रहकर सोशल डिस्टेंपसिंग के साथ अंधेरों के विरुद्ध छेड़ी गई इस जंग को अतिवादियों ने दूषित कर दिया। प्रकाशावलियों के साथ पटाखे और बम की झड़ी ने उस आध्यात्मिक माहौल को चोट पहुंचाई। जिन नौ मिनट का इस्तेमाल अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को जाग्रत कर डर और अवसाद को हराना था, उन्हींस नौ मिनटों में पटाखे के शोर ने मन में खटास भर दी और लोग यह सोचने पर मजबूर हो गए कि क्या हम अपने देशवासियों की मृत्यु पर पटाखे फोड़ रहे हैं?

 

लॉकडाउन में हम आप तो जैसे तेसे अपनी जरूरतें मैनेज कर पा रहे हैं पर....

5 april sunday 9 baje 9 minutes massive fire crackers burn fire incidents reported air quality index increases in india
नौ बजे बम पटाखों की आवाज के साथ-साथ प्रदूषण का धुआं फिर से घुल गया - फोटो : file photo

अभी रविवार शाम तक यह खबर आ रही थी कि लॉकडाउन के चलते पानी और हवा दोनों का ही प्रदूषण न्यूनतम स्तर पर आ गया है। रविवार की सुबह ही कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें पोस्ट कि जिनमें इसे साफ महसूस किया जा सकता था।

कुछ लोगों ने पंजाब में अपने घर की छत से नजर आ रही हिमाचल प्रदेश की धौलाधार रेंज के पहाड़ों की फोटो पोस्ट की। यह तभी संभव हो पाया जब हवा में से प्रदूषण समाप्त हो गया है। पर नौ बजे बम पटाखों की आवाज के साथ-साथ प्रदूषण का धुआं फिर से घुल गया।

लॉकडाउन में हम आप तो जैसे-तैसे अपनी जरूरतें मैनेज कर पा रहे हैं पर पशु पक्षियों के भी मुसीबतें बढ़ गईं हैं। खासतौर से वे आवारा पशु पक्षी जो लोगों का डाला गया खाना खाकर ही अपना पेट भरते हैं। गलियों में घूमने वाले कुत्तेे आदि इन्हीं रोटियों पर पलते हैं।

जबकि कुछ लोग सामान्य दिनों में बंदरों और कबूतरों को भी उनके खाने का सामान डालते हैं। परंतु अब लॉकडाउन में यह भी नहीं हो पा रहा, जिससे वे भी भूखे मरने की स्थिति में आ गए हैं। इसके बावजूद संतोष इस बात का था कि वे खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं।

परंतु रविवार की रात पटाखों के प्रदूषण ने उनकी सांसों को भी मुश्किल में डाल दिया। मात्र नौ मिनट पटाखे फूंकने से दिल्ली की कुछ जगहों का एयर क्वालिटी इंडेक्स 216 पर पहुंच गया, जिसे जामुनी रंग में मार्क किया जाता है और यह ‘वैरी अनहेल्दी’ माना जाता है। जबकि देश के ज्यादातर इलाकों का एयर क्वालिटी इंडेक्स 150 से 200 के बीच पहुंच गया जिसे अनहेल्दी  माना जाता है।

हमारे अति उत्साह ने एक और समस्या पैदा कर दी...

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पटाखे जलाने से कई जगहों पर भीषण आग लग गई

कहां तो हम प्रकाश के संकल्प के साथ अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को जाग्रत कर रहे थे और कहां हमने अपनी प्राण वायु को ही दूषित कर दिया। पर मूर्खता का परिणाम इतना भर ही नहीं है।

पटाखे जलाने से कई जगहों पर आगजनी की खबर भी आई। जयपुर के वैशाली नगर में भीषण आग लग गई। यहां लोग दीये जलाने के अलावा पटाखे जला रहे थे, जिससे आग फैल गई। सौभाग्यवश किसी को जान का नुकसान नहीं हुआ और समय पर पहुंचे फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पा लिया।

सोलापुर एयरपोर्ट पर भी आग लगने की खबर आई हैं। हालांकि यह साफ नहीं हो सका है कि वहां आग किस वजह से लगी पर एयरपोर्ट खाली होने की वजह से अधिक नुकसान नहीं हुआ है। समय गुजरने के साथ ही कई ओर जगहों से भी इस तरह की खबरें आ सकती हैं।   

हम आपातकाल का सामना कर रहे हैं। नौ मिनट के प्रकाश का यह संकल्प इसी आपातकाल में भावनात्मक संबल और आध्यात्मिक ऊर्जा को बनाए रखने के लिए किया गया था। यह कोई उत्सव नहीं था, जिसे मनाने के लिए हम पटाखों की लडि़यां ले आएं।

आपातकाल में हमारे अति उत्साह ने एक और समस्या पैदा कर दी। अब वे बुजुर्ग और बच्चे जिन्हें  सांस लेने में दिक्कत होती हैं, जिन्हें  र्ट पार्टिकल से एलर्जी है, जिनकी आंखों में प्रदूषण से जलन होने लगती है, उनके लिए परेशानी बढ़ा दी है।

यह सब किया हमारे मूर्खतापूर्ण एक्ट्रा एफर्ट ने। हर बार यह जरूरी है कि जोश में भी होश संभाले रखें। प्रकृति के साथ हम पहले ही बहुत खिलवाड़ कर चुके हैं। यह आपातकाल हमें आत्मिमंथन का भी अवसर दे रहा। जरूरत है इस समय अपने दायित्वों और प्रकृति के संरक्षण को गंभीरता से समझने की। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 

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