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मोदी सरकार के 11 साल : तीन बड़े कदम, जिन्होंने बदल दी 'आम' जिंदगी

Mon, 09 Jun 2025 05:54 PM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Mon, 09 Jun 2025 05:54 PM IST
सार

11 Years Of Modi Government: 9 जून को सरकार के 11 साल पूरे हो गए हैं। यह जनता का विश्वास है, जो लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी सत्ता में बने हुए हैं। पिछले 11 सालों में दुनिया ने भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति को देखा है, लेकिन गरीब कल्याण को लेकर नरेंद्र मोदी ने कुछ ऐसी योजनाएं शुरू की, जो युग परिवर्तनकारी हैं।

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11 Years Of Modi Government Three Best Schemes Including UPI Payment and Swachh Bharat Mission
प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी के 11 साल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इस साल की शुरुआत में महाकुंभ प्रयागराज में था। वहां छोटे से छोटा रेहड़ी वाला भी यूपीआई पेमेंट ले रहा था। एक बार एक रेहड़ी वाले से बातचीत में पता चला कि उसके अकाउंट में एक लाख से ऊपर रुपए की बचत हो गई है, क्योंकि यूपीआई से आए पेमेंट के अधिकांश हिस्से को वह बचत के रूप में सुरक्षित कर लेता है। कैश से ही कारोबार को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है। पहले शायद उसके लिए यह संभव नहीं था। यह चमत्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन-धन योजना और डिजिटल पेमेंट की क्रांति के कारण संभव हो पाया है। यदि जन-धन योजना में गरीब रेहड़ी वाले का बैंक अकाउंट जीरो बैलेंस पर न खुलता तो शायद वह कभी बैंक खाता खोलने का सपना नहीं देख पाता।

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मोदी सरकार का यह तीसरा कार्यकाल चल रहा है। 9 जून को सरकार के 11 साल पूरे हो गए हैं। यह जनता का विश्वास है, जो लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी सत्ता में बने हुए हैं। पिछले 11 सालों में दुनिया ने भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति को देखा है, लेकिन गरीब कल्याण को लेकर नरेंद्र मोदी ने कुछ ऐसी योजनाएं शुरू की, जो युग परिवर्तनकारी हैं।

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योजनाओं से बदलती देश की तस्वीर 

अगस्त 2014 में प्रधानमंत्री बनने के चंद महीने बाद नरेंद्र मोदी ने जन-धन योजना की शुरुआत की। इसमें जीरो बैलेंस में बैंक खाता खोला गया। शुरुआत में विपक्ष ने इस योजना को लेकर मोदी सरकार का उपहास उड़ाया, लेकिन योजना के तहत 55 करोड़ से ऊपर खाते खुले, जिनमें ग्रामीण और अर्द्ध शहरी क्षेत्र के लगभग 36.63 करोड़ खाते हैं। इन खातों में 2.30 लाख करोड़ रुपए की धनराशि जमा है। अच्छी बात है कि 55.6% यानी 29.37 करोड़ खाते महिलाओं के नाम पर हैं।

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यह भी सच है कि दिसंबर 2023 में 20% खाता निष्क्रिय थे। हालांकि, निष्क्रिय खातों में भी 12,779 करोड़ रुपए की धनराशि जमा है। डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में जब क्रांति आई तो सबसे बड़ा गेम चेंजर यूपीआई पेमेंट बना। यूपीआई से रुपये सीधे बैंक खाते में जाता है। यदि इतनी बड़ी संख्या में बैंक खाते न खोले गए होते तो शायद यूपीआई पेमेंट को भी सफल नहीं किया जा सकता था।

मुझे याद है, जब मैं किशोर था और उत्तर प्रदेश में अपने गांव जाता था, तब गांवों के अधिकांश लोग खुले में शौच के लिए जाया करते थे। महिलाओं के लिए तो शौच जाने का एक निश्चित समय निर्धारित था। या वो अलसुबह अंधेरे में या शाम को सूरज छिपने के बाद शौच के लिए खेतों में जा सकती थीं। इससे ज्यादा पीड़ादायक उनके जीवन में कुछ नहीं था। ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार पहली बार स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजना लेकर आई, लेकिन ईमानदारी से किसी ने इस मिशन को पूरा किया तो वह यही सरकार है। 2 अक्टूबर 2014 को नरेंद्र मोदी ने गांधी जयंती पर स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी।

आज 9.63 करोड़ से अधिक शौचालय बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों को खुले में शौच से मुक्त किया जा चुका है। यह एक ऐसा कदम है, जिसने महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। भारत के सिर से एक कलंक भी मिट गया।

11 Years Of Modi Government Three Best Schemes Including UPI Payment and Swachh Bharat Mission
पिछले एक साल में सरकार चलाने का तरीका लगभग वही है, जो पहले दो कार्यकाल में था। - फोटो : ANI


अतीत और बदलती राजनीति 

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार आने से पहले मुझे याद है, जब भी मैं सड़क मार्ग से एक से दूसरे शहर की यात्रा करता था, एक सिंगल रोड हुआ करती थी। यात्रा बड़ी कष्टदायक और जोखिम भरी होती थी। भले टोल टैक्स नहीं था, लेकिन यह सफर मुश्किल होता था। वाजपेयी सरकार ने देश में कुछ हाईवे बनाने की शुरुआत की, जिन में दिल्ली-आगरा, दिल्ली-जयपुर जैसे हाईवे शामिल हैं, लेकिन वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में सड़कों की सूरत बदली है। अच्छी सड़कों ने न्यू इंडिया में गेमचेंजर का काम किया है। भले हमारी जेब से टोल टैक्स लिया जा रहा है, लेकिन आज कनेक्टिविटी के मामले में भारत विकसित देशों से पीछे नहीं है। देश में एक्सप्रेस-वे और हाई-वे का जाल बिछा हुआ है। अच्छी सड़कों का लाभ खास के साथ आम भारतीय को भी हुआ है।


हालांकि, कुछ विफलताएं भी मोदी सरकार के साथ जुड़ी हुई हैं, जिनमें प्रमुख रूप से बेरोजगारी प्रमुख है। बेरोजगारी के मुद्दे पर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर रहती है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 से 2024 के बीच शहरी युवा बेरोजगारी दर 15 से 23% तक पहुंची।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार बेरोजगारी के वास्तविक आंकड़े जारी नहीं कर रही है। एक बड़ा मुद्दा आज भी वर्ष 2016 में की गई नोटबंदी का है। उस समय सरकार ने यह कहते हुए नोटबंदी की गई थी कि काले धन पर प्रहार किया जा रहा है। नकली नोटों को रोकना है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना है। डिजिटल भुगतान तो बढ़ा, लेकिन आज भी बड़ी मात्रा में कालाधन और नकली नोटों का मिलना जारी है।

राजनीतिक मोर्चे की बात करें तो नरेंद्र मोदी ने अपने पहले दो कार्यकाल पूर्ण बहुमत की सरकार के रूप में सफलतापूर्वक चलाए। तीसरे कार्यकाल में वो अल्पमत सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। वैसे, पिछले एक साल में सरकार चलाने का तरीका लगभग वही है, जो पहले दो कार्यकाल में था। सरकार के दो प्रमुख सहयोगी दल जनता दल (यू) और तेलुगू देशम पार्टी सरकार को पूरा सहयोग दे रहे हैं।

बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव के बाद क्या समीकरण बनते हैं, यह देखना होगा। तेलुगू देशम पार्टी भी सरकार के पक्ष में दिखती है, लेकिन क्या वह आगे चार साल सरकार को यूं ही सहयोग देती रहेगी, यह बड़ा प्रश्न है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए सबसे सुखद बात यह है कि विपक्ष की भूमिका बेहद निराशाजनक है। विपक्ष मूल मुद्दों पर सरकार को घेरने के बजाय नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोलता है, जिसका लाभ नरेंद्र मोदी को ही हो रहा है।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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