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आपकी जिंदगी का बीमा न हो फर्जी
अमर उजाला
Updated Tue, 03 Dec 2013 10:53 PM IST
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पंजाब में फर्जी बीमा कंपनियों का जाल फैलता जा रहा है और लोगों से करोड़ों ठगे जा रहे हैं। ऐसा ही खुलासा एक फर्जी बीमा कंपनी के एजेंट रहे योगेश कुमार ने किया।
सामाजिक सियासी जागृति लहर के अध्यक्ष यादविंदर सिंह सिद्धू (सरपंच) और अन्य नेताओं ने योगेश कुमार को पत्रकारों के सामने लाया। मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने बताया कि योगेश ने 15 दिनों में लोगों से 17 लाख रुपये एकत्रित किए।
सिद्धू ने बताया कि फर्जी कंपनी ने उनके पिता की सात लाख, 13 हजार रुपये की एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस की फाइल पास करवा देने और दो-तीन दिन में पैसा दिलाने का ड्रामा रचा था। अपने जाल में फंसा देख फर्जी बीमा कंपनी ने एजेंट योगेश को 71200 रुपये का चेक लेने के लिए सिद्धू के पास भेज दिया।
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उन्होंने एजेंट को काबू करके पुलिस को सौंप दिया। यह युवा बेरोजगारी के चलते कंपनी का मोहरा बन गया था।
इस दौरान योगेश कुमार ने कबूल किया कि वह गरीब परिवार का है और उसको किसी जानकार ने डेविस कलब नामक कंपनी में लगवाया था।
कंपनी ने नौ हजार रुपये प्रति माह वेतन और आने जाने का किराया देने का वादा किया। कंपनी ने दो महीने बाद उसे वेतन दोगुना करने का भी भरोसा दिया था। कंपनी ने योगेश को लोगों का बीमा करने और रुपये लाने का काम दिया।
वह लोगों से लाए गए पैसों को कंपनी द्वारा बताए एड्रेस पर भेज देता था और कंपनी संबंधित व्यक्ति का पता एसएमएस के जरिए देती थी। कंपनी सभी के साथ पैन नंबर, दो फोटो, पासबुक की कापी और सेल्फ चेक देने की बात करती थी। 15 दिन ही हुए थे कि यह फ्रॉड सामने आ गया।
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सामाजिक सियासी जागृति लहर के अध्यक्ष यादविंदर सिंह सिद्धू (सरपंच) और अन्य नेताओं ने योगेश कुमार को पत्रकारों के सामने लाया। मंगलवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने बताया कि योगेश ने 15 दिनों में लोगों से 17 लाख रुपये एकत्रित किए।
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सिद्धू ने बताया कि फर्जी कंपनी ने उनके पिता की सात लाख, 13 हजार रुपये की एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस की फाइल पास करवा देने और दो-तीन दिन में पैसा दिलाने का ड्रामा रचा था। अपने जाल में फंसा देख फर्जी बीमा कंपनी ने एजेंट योगेश को 71200 रुपये का चेक लेने के लिए सिद्धू के पास भेज दिया।
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उन्होंने एजेंट को काबू करके पुलिस को सौंप दिया। यह युवा बेरोजगारी के चलते कंपनी का मोहरा बन गया था।
इस दौरान योगेश कुमार ने कबूल किया कि वह गरीब परिवार का है और उसको किसी जानकार ने डेविस कलब नामक कंपनी में लगवाया था।
कंपनी ने नौ हजार रुपये प्रति माह वेतन और आने जाने का किराया देने का वादा किया। कंपनी ने दो महीने बाद उसे वेतन दोगुना करने का भी भरोसा दिया था। कंपनी ने योगेश को लोगों का बीमा करने और रुपये लाने का काम दिया।
वह लोगों से लाए गए पैसों को कंपनी द्वारा बताए एड्रेस पर भेज देता था और कंपनी संबंधित व्यक्ति का पता एसएमएस के जरिए देती थी। कंपनी सभी के साथ पैन नंबर, दो फोटो, पासबुक की कापी और सेल्फ चेक देने की बात करती थी। 15 दिन ही हुए थे कि यह फ्रॉड सामने आ गया।