योगी सरकार की दोटूक- गोशालाएं एनजीओ चलाएं

टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 22 Apr 2017 08:35 AM IST
yogi goverment comment on cow shed
योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
बुंदेलखंड में अन्ना जानवरों के मामले में प्रदेश सरकार का कहना है कि गोशालाएं स्वयंसेवी संस्था (एनजीओ) संचालित करती हैं। गोशालाओं से मिले प्रस्तावों पर गुणदोष के आधार पर रजिस्ट्रेशन किया जाता है। 

यह जानकारी प्रदेश के पूर्व पशुधन विभाग मंत्री जियाउद्दीन रिजवी द्वारा बांदा के तिंदवारी क्षेत्र के विधायक रहे दलजीत सिंह द्वारा 22 दिसंबर को विधान सभा में नियम- 301 के तहत दी गई सूचना के जवाब में दिया है। उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड के सातों जिलों में कुल 40 गोशालाएं पंजीकृत हैं। बांदा जनपद में 12 गोशालाएं रजिस्टर्ड हैं।

न्याय पंचायत स्तर पर गोशालाएं खोलने के सवाल पर तत्कालीन मंत्री ने कहा है कि गोशालाएं स्वयंसेवी संस्था संचालित करती हैं। उनके द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर गुणदोष के आधार पर उत्तर प्रदेश गोशाला अधिनियम 1964 के तहत पंजीयन कार्रवाई की जाती है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि गोशालाओं में संरक्षित गोवंशीय पशुओं के भरण पोषण के लिए अनुदान दिए जाने का प्राविधान है। इसके लिए पंजीकृत गोशालाएं अपनी संस्था का डीपीआर जिला स्तरीय सक्षम कमेटी की संस्तुति के साथ उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग को भेज सकते हैं। 

पशुधन विभाग मंत्री ने पत्र में यह भी बताया है कि बुंदेलखंड के सभी जिलों में अन्ना प्रथा उन्मूलन योजना चलाई जा रही है। इसके तहत निम्न कोटि के सांडों का बधियाकरण करके उनकी संतति उत्पादन को रोकना और उच्च गुणवत्तायुक्त वीर्य से पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान कराना शामिल है। साथ ही नैसर्गिक अभिजनन के लिए पशु चिकित्सालय से दूर की न्याय पंचायतों में उच्च गुणवत्तायुक्त नस्ल के सांडों का वितरण किया जा रहा है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इस कार्यक्रम में गोशालाएं बनवाकर उनमें अन्ना जानवरों को रखवाने और उनके खाने-पीने की व्यवस्था शामिल नहीं है। 

सपा सरकार में सवाल, भाजपा सरकार में जवाब
विधान सभा जैसे महत्वपूर्ण सदन में उठाए जाने वाले मुद्दे भी लेट-लतीफी का शिकार हो रहे हैं। इसकी ताजी बानगी यहां के तत्कालीन विधायक दलजीत सिंह द्वारा बुंदेलखंड में अन्ना समस्या पर विधान सभा में उठाया गया मुद्दा है। चार माह बाद विधायक को मंत्री का जवाब मिला। वह भी प्रदेश में सत्ता पलट के बाद।

तत्कालीन विधायक दलजीत सिंह ने 22 दिसंबर को नियम- 301 के तहत बुंदेलखंड में अन्ना पशुआें की समस्या का मुद्दा विधान सभा में उठाया था। अब करीब चार माह बाद 20 अप्रैल 2017 को दलजीत सिंह को तत्कालीन पशुधन विभाग के मंत्री जियाउद्दीन रिजवी का पत्र मिला है। मंत्री ने इसे 10 मार्च को जारी किया था। यह पत्र सचिवालय के मुख्य भवन स्थित मंत्री के कार्यालय से जारी हुआ है। दलजीत सिंह के पास आने तक इसे 40 दिन लग गए। वह भी तब जब वह न विधायक रहे, न सपा सरकार और उसके मंत्री जियाउद्दीन रिजवी। 
 

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