{"_id":"6adbcedfbbcceb64020f339b","slug":"worked-in-silence-success-made-all-the-noise-jhajjar-news-c-195-1-jjr1004-141667-2026-10-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"खामोशी से की मेहनत, सफलता ने मचाया शोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खामोशी से की मेहनत, सफलता ने मचाया शोर
विज्ञापन
हनी ने भाला फेंक में विश्व रिकॉर्ड के साथ जीता स्वर्ण, गांव गोरिया में खुशी की लहर
एक दिन पहले ही डिस्कस थ्रो में जीता था कांस्य, दीपावली से मिली दोहरी खुशी
-- -- -
फोटो-20
नरेश दहिया
साल्हावास (झज्जर)। जापान के नागोया में पैरा एशियन गेम्स में गांव गोरिया के लाल हनी ने जैसे ही भाले से सोने पर निशाना साधा, ग्रामीणों के साथ टीवी देख रहे पिता और दादा का चेहरा खुशी से खिल उठा। एक दिन पहले डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीतने वाले बेटे ने शुक्रवार को जब भाला फेंक में 60.49 मीटर का थ्रो कर विश्व रिकॉर्ड बनाया तो पिता बोल उठे- बेटे ने जो कहा था, कर दिखाया।
हनी के पिता सुरेंद्र उर्फ बंटी नंबरदार ने बताया कि जिंदगी के उतार-चढ़ाव और दिव्यांग होने के बावजूद हनी ने कभी हौसला नहीं खोया। परेशानियों को दरकिनार कर लगातार लक्ष्य पर फोकस रखा। वह बोलने में कम, काम में ज्यादा विश्वास रखता है। पिछले तीन साल से बेटा रोहतक में कोच सुनील फौगाट के मार्गदर्शन में अभ्यास कर रहा है।
बेटे की सफलता से गांव में दीपावली से पहले ही खुशी का माहौल है। दादा भूप सिंह नंबरदार , ताऊ हवा सिंह नंबरदार और चाचा डॉ. ओमवीर सिंह विजेता बेटे के स्वागत की योजना बना रहे हैं। हनी को केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई दी है।
विज्ञापन
बहन युक्ता को मानते हैं प्रेरणास्रोत
हनी की बड़ी बहन युक्ता गोरिया भी नौकायन और भाला फेंक की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं। दोनों भाई-बहन कोच सुनील फौगाट के मार्गदर्शन में रोहतक में प्रशिक्षण ले रहे हैं। हनी अपनी बहन को प्रेरणास्रोत मानते हैं। दोनों को कोच सुनील फौगाट और उनकी पत्नी ज्योति फौगाट का सहयोग मिल रहा है।
-- -- -- -- -- -- -- --
मां को ब्लड कैंसर होने के कारण छोड़ी शूटिंग
डिस्कस और जैवलिन थ्रो करने से पहले हनी गोरिया ने शूटिंग में भाग्य आजमाया था, लेकिन मां को ब्लड कैंसर होने के कारण शूटिंग को समय नहीं दे पाए। फिर बहन युक्ता गोरिया ने नौकायन तथा जैवलिन थ्रो की तरफ तथा हनी गोरिया ने भी डिस्कस थ्रो व जैवलिन थ्रो की तरफ रुख किया। प्रतियोगिता में जाने से पहले हनी ने पिता से वादा किया था कि वे पदक प्राप्त कर ही लौटेंगे।
-- -- --
जब कुछ अलग करने का जुनून हो तो मेहनत और लगन से सफलता जरूर मिलती है। हनी गोरिया ने कड़ी मेहनत और समर्पण के दम पर विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता है। यह उपलब्धि उनके निरंतर अभ्यास, दृढ़ संकल्प और सभी के आशीर्वाद का परिणाम है। हनी की इस सफलता पर हमें गर्व है।
सुनील फोगाट, कोच
विज्ञापन
एक दिन पहले ही डिस्कस थ्रो में जीता था कांस्य, दीपावली से मिली दोहरी खुशी
फोटो-20
नरेश दहिया
साल्हावास (झज्जर)। जापान के नागोया में पैरा एशियन गेम्स में गांव गोरिया के लाल हनी ने जैसे ही भाले से सोने पर निशाना साधा, ग्रामीणों के साथ टीवी देख रहे पिता और दादा का चेहरा खुशी से खिल उठा। एक दिन पहले डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीतने वाले बेटे ने शुक्रवार को जब भाला फेंक में 60.49 मीटर का थ्रो कर विश्व रिकॉर्ड बनाया तो पिता बोल उठे- बेटे ने जो कहा था, कर दिखाया।
हनी के पिता सुरेंद्र उर्फ बंटी नंबरदार ने बताया कि जिंदगी के उतार-चढ़ाव और दिव्यांग होने के बावजूद हनी ने कभी हौसला नहीं खोया। परेशानियों को दरकिनार कर लगातार लक्ष्य पर फोकस रखा। वह बोलने में कम, काम में ज्यादा विश्वास रखता है। पिछले तीन साल से बेटा रोहतक में कोच सुनील फौगाट के मार्गदर्शन में अभ्यास कर रहा है।
विज्ञापन
बेटे की सफलता से गांव में दीपावली से पहले ही खुशी का माहौल है। दादा भूप सिंह नंबरदार , ताऊ हवा सिंह नंबरदार और चाचा डॉ. ओमवीर सिंह विजेता बेटे के स्वागत की योजना बना रहे हैं। हनी को केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई दी है।
विज्ञापन
बहन युक्ता को मानते हैं प्रेरणास्रोत
हनी की बड़ी बहन युक्ता गोरिया भी नौकायन और भाला फेंक की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं। दोनों भाई-बहन कोच सुनील फौगाट के मार्गदर्शन में रोहतक में प्रशिक्षण ले रहे हैं। हनी अपनी बहन को प्रेरणास्रोत मानते हैं। दोनों को कोच सुनील फौगाट और उनकी पत्नी ज्योति फौगाट का सहयोग मिल रहा है।
मां को ब्लड कैंसर होने के कारण छोड़ी शूटिंग
डिस्कस और जैवलिन थ्रो करने से पहले हनी गोरिया ने शूटिंग में भाग्य आजमाया था, लेकिन मां को ब्लड कैंसर होने के कारण शूटिंग को समय नहीं दे पाए। फिर बहन युक्ता गोरिया ने नौकायन तथा जैवलिन थ्रो की तरफ तथा हनी गोरिया ने भी डिस्कस थ्रो व जैवलिन थ्रो की तरफ रुख किया। प्रतियोगिता में जाने से पहले हनी ने पिता से वादा किया था कि वे पदक प्राप्त कर ही लौटेंगे।
जब कुछ अलग करने का जुनून हो तो मेहनत और लगन से सफलता जरूर मिलती है। हनी गोरिया ने कड़ी मेहनत और समर्पण के दम पर विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता है। यह उपलब्धि उनके निरंतर अभ्यास, दृढ़ संकल्प और सभी के आशीर्वाद का परिणाम है। हनी की इस सफलता पर हमें गर्व है।
सुनील फोगाट, कोच