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बिजली विभाग के तीन एक्सईएन को चार्जशीट

Tue, 14 Feb 2017 12:54 AM IST
jhansi
jhansi Updated Tue, 14 Feb 2017 12:54 AM IST
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Three power department Xen chargesheet
बिजली विभाग के तीन एक्सईएन को चार्जशीट - फोटो : demo
राजस्व वसूली में पीछे रहने वाले विद्युत विभाग के तीन अधिशासी अभियंताओं (एक्सईएन) को चार्जशीट थमाई गई है। चुनावी बयार में शहरी क्षेत्रों में औसतन साढ़े तेइस घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में साढ़े उन्नीस घंटे बिजली दी जा रही है। लेकिन, अधिकारी उपभोक्ताओं से बिल नहीं जमा करवा पा रहे हैं। इस पर उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशकने झांसी देहात, मऊरानीपुर और ललितपुर के अभियंताओं पर कार्रवाई की है।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने घोषणा की थी कि 2016 से जनता को 24 घंटे बिजली मिलने लगेगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने दिसंबर से शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों को 20 घंटे बिजली देने का रोस्टर बना रखा है। विभागीय आंकड़ों के तहत पिछले दो माह से झांसी-ललितपुर के शहरी क्षेत्र में साढ़े 23 घंटे और ग्रामीण इलाकों में साढ़े उन्नीस घंटे बिजली देने का औसत आ रहा है। दोनों जनपदों को बिजली तो खूब मिल रही है, लेकिन राजस्व का बुरा हाल है। चुनावी बहार में लोग बिजली का बिल जमा करना भी भूल गए हैं। झांसी शहर में ही अकेले आठ करोड़ राजस्व कम मिला। वैसे औसतन यहां हर माह 25 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है। इसी तरह झांसी देहात, मऊरानीपुर और ललितपुर में तो साठ फीसदी राजस्व भी नहीं जुट सका है। इससे कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक ने उक्त तीनों क्षेत्रों के अधिशासी अभियंता को चार्जशीट थमा दी है। 
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राजस्व वसूलने के प्रयास तेज किए
इतनी अच्छी बिजली देेने के बाद भी लोग बिल जमा नहीं कर रहे हैं। लोगों को अपना दायित्व समझना चाहिए। राजस्व बढ़ाने के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं।’
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- संदीप अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता (ग्रामीण)। 

पहले वसूली, बाद में वेतन 
कारपोरेशन सूत्रों के अनुसार बिजली खरीद, वेतन, रखरखाव, बैंक कर्ज पर ब्याज आदि को जोड़कर पावर कारपोरेशन को लगभग 3565 करोड़ रुपये की हर माह आवश्यकता है, जबकि सभी स्रोतों से 22 से 24 सौ करोड़ रुपये राजस्व की प्राप्ति होती है। इस हिसाब से हर माह करीब बारह सौ करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। दूसरी तरफ कार्यालयों में अफसरों व कर्मचारियों की कमी कोढ़ में खाज का काम कर रही है, क्योंकि इससे वसूली प्रभावित हो रही है। इधर, चुनाव के चलते कारपोरेशन को खरीदी गई बिजली का पेमेंट पहले करना पड़ रहा है, जिससे कारपोरेशन की हालत पतली होती नजर आ रही है। ऐसे में कारपोरेशन ने सभी वितरण खंडों को निर्देश दे दिए हैं कि पहले अधिक से अधिक वसूली करो, इसके बाद वेतन दिया जाएगा। 
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