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जनता ने जिंदा कर दी झील

Sun, 10 Jul 2016 01:50 AM IST
मनोज चौरसिया  /कानपुर
मनोज चौरसिया  /कानपुर Updated Sun, 10 Jul 2016 01:50 AM IST
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The people were alive lake
औनहा झील अब - फोटो : amarujala
कानपुर देहात के मैथा के पास स्थित सैकड़ों साल पुरानी औनहा झील जनता के प्रयास से करीब 11 साल बाद जिंदा हुई है। सालों से मछली माफिया के शिकंजे में फंसकर गड्ढों में बदल चुकी झील को क्राइस्टचर्च के प्रोफेसर एसपी सिंह, डीजी कॉलेज की प्रो.साधना सिंह ने जनता के साथ मिलकर बचा लिया।
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वही झील जिसकी सूखी छाती से पानी की बूंद भी नहीं रिसती थी और जिस पर कुछ मछली माफिया ने शिकार के लिए बंधे तक बना दिए थे। ‘डर के आगे जीत’ के संकल्प के साथ तीन महीने पहले बढ़े कुछ कदम, जो देखते ही देखते हुजूम में तब्दील हो गए। गिरा दिए अवरोध और जो कर दिखाया, वह नजीर बन गया। झील लबालब हो गई। 11 साल बाद पहली बार अब इस झील में पानी ही पानी नजर आ रहा है। 2006 के बाद अब पहली बार झील पानी से लबालब भरी है। 
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‘अमर उजाला’ ने कानपुर देहात जिला प्रशासन की उपेक्षा की शिकार औनहा झील का मामला लगातार उजागर किया था। यह झील वीआईपी कन्नौज संसदीय क्षेत्र में आती है जहां से डिंपल यादव सांसद हैं। प्रो. सिंह बताते हैं कि कई एकड़ में फैली औनहा झील कानपुर देहात जिले कि इकलौती ऐसी झील है, जिसके दो तरफ सड़कें बनीं हैं और तीसरी तरफ बौद्धकालीन टीला है। इसमें हर साल हजारों साइबेरियन पक्षी और सारस आते थे।
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गेस्ट हाउस वाले इस पर्यावरण पार्क के आसपास अवैध कब्जे भी नहीं हैं, पर जिला प्रशासन की उपेक्षा से धीरे-धीरे इस झील में मछली माफिया सक्रिय हो गए। झील में पानी की आवक कम करने के बाद मछलियां पकड़ने के लिए उसमें जगह-जगह बंधे बना लिए थे। 2005-06 तक जो झील लबालब दिखाई देती थी, उसके बाद से सूख गई।

अप्रैल माह में पूर्व विधायक राजा रघुनाथ सिंह के बेटे क्राइस्टचर्च कालेज के प्रोफेसर एसपी सिंह के आह्वान पर औनहां गांव के लोगों, बाहर से आए तमाम पर्यावरण प्रेमियों ने झील बचाने की मुहिम शुरू की।


अप्रैल-मई-जून की तेज धूप में हजारों ग्रामीणों ने फावड़े-कुदाल लेकर झील को साफ करना शुरू किया। धीरे-धीरे मुहिम आगे बढ़ी, जिला प्रशासन ने भी रामगंगा सहित दो नहरों को इस झील से जोड़ दिया। सामूहिक प्रयासों के चलते झील पुन: पुराने स्वरूप में नजर आने लगी। अब झील को गहरा करने की जरूरत है ताकि यह हमेशा लबालब रहे।

ये हैं सुझाव
-अगले साल पानी कम होने पर राजस्थान की तर्ज पर मनरेगा के तहत झील की सिल्ट हटवाकर गहरा करा दिया जाए
-मछली माफिया को दोबारा सक्रिय न होने दिया जाए
-हरियाली को भी बढ़ावा दिया जाए
-यहां बदहाल पड़े पर्यावरण पार्क, गेस्ट हाउस को सुधारा जाए
-मुख्यमंत्री की ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना में शामिल किया जाए
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