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मनरेगा से जुड़ेगी न्यूनतम मजदूरी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Dec 2013 11:21 PM IST
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केंद्र की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण गारंटी योजना (मनरेगा) की मजदूरी को लेकर मंथन जारी है। विभिन्न राज्यों में मनरेगा की मजदूरी को न्यूनतम मजदूरी के साथ जोड़ने की कवायद शुरू कर दी गई है।
कई राज्य ऐसे हैं जिनमें मनरेगा में कम दिहाड़ी दी जाती है। पंजाब में न्यूनतम मजदूरी और मनरेगा की दिहाड़ी में करीब 56 रुपये का अंतर है।
सूत्रों के अनुसार, महंगाई के कारण मनरेगा की मजदूरी को हर साल संशोधित करने का फार्मूला तलाशने के लिए केंद्र ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। जो कई बैठकें भी कर चुकी है।
इस कमेटी में अरुणा राय और जीन ड्रेजी जैसे गैर सरकारी संगठनों से जुड़े नेता और अर्थशास्त्री शामिल हैं। कमेटी के एक सदस्य ने बताया कि बैठकों में लगभग सभी सदस्य इस बात पर सहमत दिखे कि मनरेगा की दिहाड़ी सभी राज्यों की न्यूनतम मजदूरी के बराबर की जाए।
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इस संशोधन के बारे में फिलहाल विमर्श किया जा रहा है। पंजाब में मनरेगा की मौजूदा दिहाड़ी 184 रुपये है जबकि एक सितंबर 2013 से राज्य में न्यूनतम मजदूरी 240 रुपये दी जा रही है। इस तरह मनरेगा के मजूदरों को न्यूनतम मजदूरी से भी 56 रुपये कम मिलते हैं।
गौरतलब है कि मनरेगा का 90 फीसदी पैसा केंद्र सरकार देती है। राज्य सरकार को 10 फीसदी पैसा ही देना पड़ता है। मनरेगा से संबंधित पंजाब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मनरेगा कानून बनने से 100 दिन का रोजगार बुनियादी अधिकार बन गया और न्यूनतम मजदूरी कानून 1948 के तहत किसी भी गैर कुशल, अर्द्ध कुशल और कुशल मजदूर को न्यूनतम मजदूरी से कम दिहाड़ी नहीं दी जा सकती।
मनरेगा और न्यूनतम मजदूरी कानून आपस में टकराते हैं। मनरेगा के तहत काम भले ही 100 दिन देने की गारंटी है, लेकिन इन दिनों में भी न्यूनतम मजदूरी के कानून को लागू करना अनिवार्य होगा।
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कई राज्य ऐसे हैं जिनमें मनरेगा में कम दिहाड़ी दी जाती है। पंजाब में न्यूनतम मजदूरी और मनरेगा की दिहाड़ी में करीब 56 रुपये का अंतर है।
सूत्रों के अनुसार, महंगाई के कारण मनरेगा की मजदूरी को हर साल संशोधित करने का फार्मूला तलाशने के लिए केंद्र ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। जो कई बैठकें भी कर चुकी है।
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इस कमेटी में अरुणा राय और जीन ड्रेजी जैसे गैर सरकारी संगठनों से जुड़े नेता और अर्थशास्त्री शामिल हैं। कमेटी के एक सदस्य ने बताया कि बैठकों में लगभग सभी सदस्य इस बात पर सहमत दिखे कि मनरेगा की दिहाड़ी सभी राज्यों की न्यूनतम मजदूरी के बराबर की जाए।
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इस संशोधन के बारे में फिलहाल विमर्श किया जा रहा है। पंजाब में मनरेगा की मौजूदा दिहाड़ी 184 रुपये है जबकि एक सितंबर 2013 से राज्य में न्यूनतम मजदूरी 240 रुपये दी जा रही है। इस तरह मनरेगा के मजूदरों को न्यूनतम मजदूरी से भी 56 रुपये कम मिलते हैं।
गौरतलब है कि मनरेगा का 90 फीसदी पैसा केंद्र सरकार देती है। राज्य सरकार को 10 फीसदी पैसा ही देना पड़ता है। मनरेगा से संबंधित पंजाब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मनरेगा कानून बनने से 100 दिन का रोजगार बुनियादी अधिकार बन गया और न्यूनतम मजदूरी कानून 1948 के तहत किसी भी गैर कुशल, अर्द्ध कुशल और कुशल मजदूर को न्यूनतम मजदूरी से कम दिहाड़ी नहीं दी जा सकती।
मनरेगा और न्यूनतम मजदूरी कानून आपस में टकराते हैं। मनरेगा के तहत काम भले ही 100 दिन देने की गारंटी है, लेकिन इन दिनों में भी न्यूनतम मजदूरी के कानून को लागू करना अनिवार्य होगा।