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भड़के किसानों ने रोकी दी शहर की रफ्तार
उन्नाव
Updated Sat, 02 Sep 2017 01:05 AM IST
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The farmers stopped the speed of the city
- फोटो : अमर उजाला
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भड़के किसानों ने रोकी दी शहर की रफ्तार
स्पेशल इकोनॉमिक जोन के लिए सरकार ने नियमों को ताख पर रखकर भूमि अधिग्रहित करने का आरोप लगाते हुए सिकंदरपुर सरोसी के तीन गांवों के करीब डेढ़ हजार किसानों ने शुक्रवार को शुक्लागंज से उन्नाव तक विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान शहर की रफ्तार थम गई। करीब चार घंटे तक कई स्कूली वाहन, एंबुलेंस जाम में फंसे रहे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को किसानों को समझाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। शाम करीब चार बजे किसानों का गुस्सा ठंडा हुआ।
शहर में एसपी दफ्तर के सामने धरने पर बैठे किसान किसान जिलाधिकारी को बुलाने की जिद पर अड़ गए। इस दौरान कई घंटे तक सभी किसान सड़क पर ही बैठे रहे और नारेबाजी की। किसान प्रदर्शन में आए सैकड़ाें वाहनों और भारी पुलिस बल के कारण एसपी आफिस तिराहे पर भीषण जाम लगा रहा। जाम में कचहरी के पास एंबुलेंस भी फंसी रही। किसानों के इस प्रदर्शन के दौरान कई घंटों का पुलिस फोर्स मौके पर मौजूद रहा।
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इससे पहले किसानों के जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करने के लिए आने की भनक लगते ही कलक्ट्रेट को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। डीएम कार्यालय जाने वाले कई रास्तों पर बैरीकेडिंग लगा दी गई थी। चौपहिया वाहनों की अंदर से गुजरने पर पाबंदी लगा दी गई थी। इस जाम में फंसकर लोग बेहाल भी हो गए। शाम 4 बजे के करीब जब किसान मौके से हटे तब कहीं जाकर प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों ने राहत की सांस ली।
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राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में किसानों ने यूपीएसआईडीसी और जिला प्रशासन के अफसरों पर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। साथ ही 8 अगस्त 2008 को आयुक्त लखनऊ मंडल विजयशंक र पांडेय के आदेश को लागू करने की गुहार लगाई है। किसानों ने ट्रांसगंगा सिटी योजना के प्रचार प्रसार को रोकने और सेज व इसमें की गई भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। वहीं नेता अजय अनमोल के लिए किसानों द्वारा खरीदी गई चार पहिया गाड़ी को किसानों को वापस दिलवाए जाने को कहा गया है।