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दावे फेल, नगर निगम में चला टेंडर मैनेज करने का खेल

Thu, 17 Mar 2016 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Updated Thu, 17 Mar 2016 01:39 AM IST
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tender in nagar nigam
नगर न‌िगम
नगर निगम के काम में टेंडर के दौरान फिर माफिया का दखल भारी दिखा। हद तो तब हो गई, जबकि टेंडर में ज्यादातर लोगों के दखल के लिए फॉर्म का वितरण कलेक्ट्रेट से कराने की व्यवस्था पर भी कुछ दबंग भारी पड़ गए। बुधवार को पुलिस की मौजूदगी के बावजूद टेंडर मैनेज करने में माहिर लोगों की टीम ने ठेके के इच्छुक कई लोगों को टेंडर फॉर्म तक ही नहीं पहुंचने दिया।
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 नगर निगम में नगरीय अवस्थापना विकास निधि समिति की बैठक में शहर के कई वार्डों में नाली, सड़क निर्माण और सुंदरीकरण के लिए जरूरी काम कराने का निर्णय हुआ था। इसके लिए बुधवार को कलेक्ट्रेट में टेंडर फॉर्म बेचने की प्रक्रिया चल रही थी। सुबह दस बजे ही नगर निगम के कर्मचारी टेंडर फॉर्म लेकर पहुंच गए थे।
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उनसे पहले वहां ठेकों में एकछत्र राज्य चलाने की कोशिश करने वाला एक दल भी पहुंच गया। कुछ वार्ड ऐसे थे, जिनके लिए माफिया टेंडर मैनेज करने में लगे रहे। उन वार्डों के लिए फॉर्म लेने जा रहे ठेकेदारों को बिना फॉर्म हासिल हुए वापसी का रास्ता दिखा दिया गया। माहौल पर दबंगई की छाप देखकर ऐसे ठेकेदार विरोध का साहस नहीं कर सके। वहां मौजूद पुलिस भी खामोशी बरतकर एक किनारे तक सीमित रहे। दोपहर डेढ़ बजे के बाद धीरे-धीरे भीड़ छंटी। 
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टेंडर को लेकर माफिया के दखल को लेकर कलेक्ट्रेट में मौजूद रहे नगर निगम कर्मचारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। वैसे निविदा फॉर्म से चूके लोगों के पास ऑनलाइन मौजूद फॉर्म डाउनलोड करने का विकल्प मौजूद है। गुरुवार को भी टेंडर फॉर्म लिए जा सकते हैं।
- एसके केसरी, चीफ इंजीनियर, नगर निगम

42 प्रतिशत बिलो पर खुला पीडब्ल्यूडी का टेंडर

गोरखपुर। लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड 3 में सड़कों के मरम्मत के लिए लगभग दो करोड़ के टेंडर को ठेकेदारों ने 42 फीसदी बिलो रेट पर लिया है। इतने कम दर पर गुणवत्तापूर्ण कार्य ठेकेदार कैसे कराएंगे इसको लेकर सवाल उठाए जाने लगे हैं।


पीडब्ल्यूडी के निर्माण खंड 3 के 17 कार्यों का टेंडर बुधवार को खोला गया। जिसमें 33 से लेकर 42 प्रतिशत कम दर पर ठेकेदारों ने कार्य को लिया है। इतने कम रेट पर कार्य की गुणवत्ता बनाये रखना मुश्किल कार्य होगा। प्रतिस्पर्धा से सरकार को राजस्व का फायदा तो होगा पर इतने कम लागत पर कैसे बेहतर कार्य ठेकेदार करवाएंगे यह अपने आप में सवाल है। वैसे विभाग से जुड़े लोगाें का मानना है कि कम दर पर टेंडर तो अक्सर ठेकेदार लेते हैं, पर बचा हुआ धन कम ही वापस हुआ है। हालांकि विभाग के अधिशासी अभियंता का कहना है कि बचा हुआ धन शासन को वापस हो जाता है।



टेंडर चाहे जितना बिलो ठेकेदार ने लिया हो कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जो विभाग का मानक है उसे हर हाल में पूरा करना होगा। नहीं करने वाले ठेकेदार पर कार्रवाई होगी।
- वी के सिंह अधिशासी अभियंता निर्माण खंड 3

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