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Hindi News ›   City & states ›   Stay order on arrest of former chief minister's close Dhankar sedition

राजद्रोह में पूर्व सीएम के करीबी धनकड़ की गिरफ्तारी पर रोक

Thu, 21 Apr 2016 10:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Thu, 21 Apr 2016 10:43 PM IST
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Stay order on arrest of former chief minister's close Dhankar sedition
court

पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी और कांग्रेस के पूर्व ग्रामीण जिलाध्यक्ष जयदीप धनखड़ की गिरफ्तारी पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। धनखड़ को हाल ही में प्रोफेसर विरेंद्र सिंह पर दर्ज राजद्रोह के मामले में आरोपी बनाया गया था। हालांकि अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश जसबीर सिंह की अदालत ने धनखड़ को जांच में शामिल होने के आदेश दिए हैं।

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अब अग्रिम जमानत के मामले में अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। बता दें कि आरोपी धनखड़ ने कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। इसी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई है।
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वहीं, जब मामले में गठित एसआईटी के इंचार्ज डीएसपी पवन कुमार से पुलिस का पक्ष रखने के लिए कहा गया तो उन्होंने अजीब तर्क दिया। पुलिस ने कहा कि उन्हें सुनवाई से संबंधित नोटिस ही नहीं मिला है। इस कारण उन्हें सुनवाई की तारीख के बारे में पता नहीं चल सका। इसके बाद कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए सुनवाई की अगली तारीख तय कर दी।
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आरोपी के वकील जे. के. गक्खड़ ने बताया कि प्रो. विरेंद्र और मान सिंह के बीच हुई बातचीत में सिर्फ धनखड़ का मोबाइल फोन प्रयोग किया गया था। मोबाइल पर दोनों के बीच क्या बातचीत हुई, इस बारे में जयदीप को कुछ मालूम नहीं। इस पर सरकारी वकील ने कहा कि मामला संगीन है। आरोपी से पूछताछ करनी जरूरी है। लेकिन जयदीप के वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल पहले भी इस मामले की जांच में शामिल हो चुका है।

वह भविष्य में भी जांच में शामिल होने के लिए तैयार है। इस पर कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। बता दें कि इस मामले में  मुख्य आरोपी प्रो. विरेंद्र सिंह को पहले ही जमानत मिल चुकी है, जबकि तीसरे आरोपी मान सिंह दलाल का स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

 

जयदीप पर आरोप है कि जिस विवादित ऑडियो टेप में प्रोफेसर सिरसा में जाम लगवाने की बात कर रहे हैं, वह कॉल धनखड़ के मोबाइल से ही की थी। बातचीत के लिए विरेंद्र ने अपना मोबाइल प्रयोग नहीं किया था। इस कारण एसआईटी ने उन्हें आरोपी बनाया।

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