फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   City & states ›   special green corridor for 3 patients: got new life in PGI

48 घंटे की मेहनत के बाद पीजीआई ने तीन को दी नई जिंदगी

Thu, 28 Apr 2016 01:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 28 Apr 2016 01:25 AM IST
विज्ञापन
special green corridor for 3 patients: got new life in PGI
पीजीआई चंडीगढ़ - फोटो : demo pics

पीजीआई की 48 घंटे की मेहनत के बाद तीन लोगों को नई जिंदगी मिल गई है। एक रोड एक्सीडेंट में घायल युवक को ब्रेन डेड घोषित करने के बाद उसके अंग पीजीआई ने सुरक्षित निकाले और तीन अलग-अलग लोगों में ट्रांसप्लांट किया। एक को किडनी, दूसरे को किडनी- पेनक्रियाज और तीसरे को लीवर ट्रांसप्लांट किया गया।

विज्ञापन


एक्सीडेंट में घायल पेशेंट को जीएमसीएच 32 से पीजीआई लाया गया था। युवक के परिजनों ने बताया कि उसकी आखिरी ख्वाहिश थी कि यदि उसके साथ कोई अनहोनी होती है तो उसके अंग दान कर दिए जाएं। युवक का तीन दिन पहले ही चंडीगढ़ में एक्सीडेंट हुआ था।
विज्ञापन


बनाया गया स्पेशल ग्रीन कॉरिडोर
आर्गन डोनेशन के प्रति पीजीआई की सक्रियता एक बार से फिर से देखने को मिली। इंडस्ट्रियल एरिया में एक्सीडेंट के बाद 17 वर्षीय युवक को जीएसमीएच 32 में दाखिल कराया गया था। उस दौरान उसकी हालत काफी गंभीर थी। ब्रेन डेड जैसी हालत हो चुकी थी। जीएमसीएच 32 से पीजीआई को इस बारे में सूचना दी गई। उसके बाद पीजीआई ने युवक के परिजनों से आर्गन डोनेशन के बारे में बातचीत की। परिजनों ने पीजीआई को अनुमति दे दी।
विज्ञापन
विज्ञापन


उसके बाद पीजीआई ने चंडीगढ़ पुलिस से संपर्क किया और सोमवार की रात जीएमसीएच 32 से लेकर पीजीआई तक स्पेशल ग्रीन कॉरिडोर बनाया। मात्र छह मिनट के भीतर युवक को लेकर पीजीआई पहुंच गए। सोमवार की रात से पीजीआई की टीम अपने काम में जुट गई। टीम के सदस्यों ने उसे दो बार ब्रेन डेड घोषित किया और उसके बाद अंग सुरक्षित निकालकर जरूरतमंद लोगों में ट्रांसप्लांट कर दिया।

लग गए पूरे 48 घंटे
जीएमसीएच 32 से पेशेंट को पीजीआई लाने के बाद आर्गन डोनेशन और ट्रांसप्लांट में पूरे 48 घंटे लग गए। दो बार पेशेंट को ब्रेन डेड घोषित करना पड़ा। इस दौरान युवक के परिजनों का हौसला देखने लायक था। उन्होंने हार नहीं मानी और अपने बेटे की आखिरी ख्वाहिश पूरी करने के लिए पीजीआई की टीम का पूरा साथ दिया। पीजीआई ने बताया कि कुछ तकनीकी कारणों से उन्हें थोड़ा ज्यादा समय लगा। युवक की उम्र थोड़ी कम थी, इस लिहाज हम थोड़ा ज्यादा समय ले रहे थे। सोमवार शाम शुरू हुई कार्रवाई बुधवार शाम सात बजे जाकर खत्म हुई।


पिछले साल पीजीआई ने सबसे ज्यादा ट्रांसप्लांट किए थे
साल 2015 में पीजीआई ने प्रति मिलियन आबादी के हिसाब से सबसे ज्यादा ट्रांसप्लांट किए थे। यह पूरे देश में सबसे ज्यादा था। 26 डोनर से 50 व्यक्तियों में किडनी ट्रांसप्लांट की गई। इसका पूरा श्रेय पीजीआई की टीम को जाता है। पिछले साल से पीजीआई ने कई बार ग्रीन कारिडोर बनाकर प्रैक्टिस भी की। इसके अलावा उसका कमांड हास्पिटल, जीएमसीएच 32, चंडीगढ़ पुलिस और अन्य प्राइवेट हास्पिटल के साथ गजब का कोआर्डिनेशन भी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed