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श्रीकृष्ण ने कुंती के दुख मांगने पर आश्चर्य व्यक्त किया
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संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। श्री सत जीन्दा कल्याणा सेवा समिति झज्जर द्वारा पंजाबी धर्मशाला में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। इसके तीसरे दिन श्री धाम वृंदावन से आए कथा व्यास हित शरण अतुल कृष्ण शास्त्री ने कुंती माता और श्रीकृष्ण प्रसंग सुनाया।
महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद युधिष्ठिर ने हस्तिनापुर की राजगादी संभाल ली थी। सब कुछ सामान्य होने पर भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका लौट रहे थे। पांडव इस बात से दुखी थे क्योंकि वे श्रीकृष्ण को अपने शरीर का हिस्सा मानते थे। श्रीकृष्ण ने एक-एक कर अपने सभी स्नेहीजनों से मिलकर उन्हें उपहार दिए और विदा ली।
अंत में वे पांडवों की माता कुंती से मिले। श्रीकृष्ण ने कुंती से कहा कि उन्होंने आज तक कुछ नहीं मांगा। इसलिए आज कुछ मांग लें। कुंती की आंखों में आंसु आ गए और उन्होंने श्रीकृष्ण से बहुत सारा दुख मांगने की इच्छा जताई।
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श्रीकृष्ण ने कुंती के दुख मांगने पर आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने कुंती से इस अनोखी इच्छा का कारण पूछा। कुंती ने समझाया कि जीवन में दुख रहने पर ही श्रीकृष्ण का स्मरण बना रहता है। उन्होंने कहा कि सुख में उनकी याद कभी-कभार ही आती है, जबकि दुख में वे हर पल याद आते हैं। इस स्मरण से ही वे श्रीकृष्ण की पूजा और प्रार्थना कर सकेंगी। कथा के दौरान मधुर भजन सुनाकर उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया गया।
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झज्जर। श्री सत जीन्दा कल्याणा सेवा समिति झज्जर द्वारा पंजाबी धर्मशाला में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। इसके तीसरे दिन श्री धाम वृंदावन से आए कथा व्यास हित शरण अतुल कृष्ण शास्त्री ने कुंती माता और श्रीकृष्ण प्रसंग सुनाया।
महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद युधिष्ठिर ने हस्तिनापुर की राजगादी संभाल ली थी। सब कुछ सामान्य होने पर भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका लौट रहे थे। पांडव इस बात से दुखी थे क्योंकि वे श्रीकृष्ण को अपने शरीर का हिस्सा मानते थे। श्रीकृष्ण ने एक-एक कर अपने सभी स्नेहीजनों से मिलकर उन्हें उपहार दिए और विदा ली।
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अंत में वे पांडवों की माता कुंती से मिले। श्रीकृष्ण ने कुंती से कहा कि उन्होंने आज तक कुछ नहीं मांगा। इसलिए आज कुछ मांग लें। कुंती की आंखों में आंसु आ गए और उन्होंने श्रीकृष्ण से बहुत सारा दुख मांगने की इच्छा जताई।
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श्रीकृष्ण ने कुंती के दुख मांगने पर आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने कुंती से इस अनोखी इच्छा का कारण पूछा। कुंती ने समझाया कि जीवन में दुख रहने पर ही श्रीकृष्ण का स्मरण बना रहता है। उन्होंने कहा कि सुख में उनकी याद कभी-कभार ही आती है, जबकि दुख में वे हर पल याद आते हैं। इस स्मरण से ही वे श्रीकृष्ण की पूजा और प्रार्थना कर सकेंगी। कथा के दौरान मधुर भजन सुनाकर उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया गया।