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सेल्फ स्टडी को बनाई सफलता की सीढ़ी, कोचिंग से परहेज

Amar Ujala Bureau Updated Thu, 14 May 2026 10:35 PM IST
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Self-study was made the ladder to success, coaching was avoided.
14jjrp04- क​शिश
झज्जर। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने वीरवार को दसवीं का परीक्षा परिणाम जारी कर दिया। विद्यार्थियों ने टाॅप थ्री में स्थान बनाया है। जिले में टॉप करने वाली कशिश के पिता सोमबीर किसान हैं। दूसरे स्थान पर रहने वाली वंशिका के पिता जोनी आर्मी में क्लर्क से सेवानिवृत्त हैं। तीसरे स्थान पर रहने वाले भावेश यादव के पिता नरेंद्र सिंह आर्मी में जोधपुर में तैनात हैं। इसी प्रकार महक के पिता संजीत किसान है और अंकिता के पिता राकेश ट्रांसपोर्टर है। ज्यादातर परीक्षार्थियों ने सेल्फ स्टडी से यह सफलता पाई है। कोचिंग से दूरी बनाए रखा।
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कशिश ने कहा कि अभी केवल पढ़ाई पर फोकस है। साइंस संकाय में दाखिला लिया है। दसवीं में नियमित रूप से तीन से चार घंटे पढ़ाई करती थी। परीक्षा के दिनों में 10 घंटे तक पढ़ाई की। सेल्फ स्टडी की है और कभी ट्यूशन नहीं लगाई। पिता सोमबीर किसान हैं और माता ज्योति गृहिणी हैं।
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वंशिका ने बताया कि लक्ष्य सीए और एमबीए करना है। वह खुद का बिजनेस करेंगी। वंशिका के पिता अभी लेबर विभाग फरीदाबाद में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। माता बंटी गृहिणी है। वंशिका न सातवीं तक की पढ़ाई आर्मी स्कूल से की। पिता की सेवानिवृत्ति के बाद गांव माजरा दूबलधन आ गए तो यहां दाखिला लिया। वंशिका ने बताया कि उन्होंने भी सेल्फ स्टडी है। जो स्कूल में शिक्षक कराते थे, उसे बेहतर तरीके से किया। स्कूल से आकर पांच से छह घंटे पढ़ाई की। परीक्षाओं के दिनों में सुबह 4 बजे पढ़ना शुरू कर देती थी।
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वहीं अंकिता ने बताया कि वह आईआईटी की तैयारी करेंगी। दसवीं के दौरान गर्मियों में शाम पांच बजे से पढ़ाई शुरू हाे जाती थी और बीच में एक घंटे का ब्रेक लेकर रात तक पढ़ती थी। सर्दियों मे शाम 6 बजे के बाद पढ़ाई शुरू करती, जो देर रात तक चलती थी। उसकी बड़ी बहनों पायल व नेता ने उसे राह दिखाई, जिसकी बदौलत वह आज जिले में टॉप थ्री में स्थान बना पाई हूं। उन्होंने हमेशा सेल्फ स्टडी की।
इंसेट
महक डॉक्टर बनना चाहती हैं
खुड्डन गांव निवासी संजीत की बेटी महक डॉक्टर बनना चाहती हैं। वह आगे चलकर नीट की तैयारी करेंगी। महक ने बताया कि स्कूल से जाने के बाद चार से पांच घंटे रोज पढ़ती थी। जो शिक्षिकों ने सिखाया, उसकी रोज तैयारी करती थी। अपना खुद का टाइम टेबल बनाया हुआ था, उसके अनुसार परीक्षाओं में तैयारी की। महक की माता रवीना गृहिणी हैं।

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इंजीनियर बनना चाहते हैं भावेश
घाटोली निवासी सेना में जवान नरेंद्र सिंह के बेटे भावेश यादव इंजीनियर बनना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल से जाने के बाद चार से पांच घंटे प्रतिदिन पढ़ाई की। सोशल मीडिया का प्रयोग कभी नहीं किया। सेल्फ स्टडी ही की है। भावेश ने बताया कि वह इंजीनियर बनना चाहते हैं और आईआईटी क्रै करेंगे। उनके पिता नरेंद्र की पोस्टिंग जोधपुर में है। उनकी माता कविता गृहिणी हैं।

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