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पुरातत्व संग्रहालय की प्रक्रिया तेज, डीपीआर के लिए निविदाएं आमंत्रित
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झज्जर। हरियाणा सरकार झज्जर में स्वामी ओमानंद सरस्वती पुरातत्व संग्रहालय के निर्माण को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है। संग्रहालय की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने 24 अगस्त को निविदाएं आमंत्रित की हैं। तकनीकी मूल्यांकन के लिए बोली 5 सितंबर को खोली जाएगी।
विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने विधानसभा में झज्जर की विधायक गीता भुक्कल द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। मंत्री ने बताया कि संग्रहालय का शिलान्यास दो बार हो चुका है, लेकिन निर्माण प्रस्ताव अभी सरकार के विचाराधीन है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के 29 मई 2014 के निर्णय के बाद विरजानंद देवकरनी को निदेशक-कम-संग्रहपाल नियुक्त किया गया था। उन्होंने जुलाई 2014 से फरवरी 2016 तक इस पद पर सेवाएं दीं। इसके बाद से पद रिक्त है और कोई अधिकारी कार्यरत नहीं है।
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इधर, उच्चतर शिक्षा मंत्री महीपाल सिंह ढांडा ने बताया कि झज्जर में प्रारंभ/सियासते भवन और छात्रावास के निर्माण को लेकर लोक निर्माण विभाग से जुलाई 2026 में संशोधित अनुमानित लागत मांगी गई है। इसमें फर्नीचर और अन्य आवश्यक सामान की लागत भी शामिल होगी।
संशोधित अनुमान प्राप्त होने के बाद सक्षम अधिकारी से प्रशासनिक मंजूरी ली जाएगी। इसके बाद कार्यकारी एजेंसी टेंडर जारी करेगी और नियमानुसार निर्धारित समय सीमा में निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
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विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने विधानसभा में झज्जर की विधायक गीता भुक्कल द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। मंत्री ने बताया कि संग्रहालय का शिलान्यास दो बार हो चुका है, लेकिन निर्माण प्रस्ताव अभी सरकार के विचाराधीन है।
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उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के 29 मई 2014 के निर्णय के बाद विरजानंद देवकरनी को निदेशक-कम-संग्रहपाल नियुक्त किया गया था। उन्होंने जुलाई 2014 से फरवरी 2016 तक इस पद पर सेवाएं दीं। इसके बाद से पद रिक्त है और कोई अधिकारी कार्यरत नहीं है।
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इधर, उच्चतर शिक्षा मंत्री महीपाल सिंह ढांडा ने बताया कि झज्जर में प्रारंभ/सियासते भवन और छात्रावास के निर्माण को लेकर लोक निर्माण विभाग से जुलाई 2026 में संशोधित अनुमानित लागत मांगी गई है। इसमें फर्नीचर और अन्य आवश्यक सामान की लागत भी शामिल होगी।
संशोधित अनुमान प्राप्त होने के बाद सक्षम अधिकारी से प्रशासनिक मंजूरी ली जाएगी। इसके बाद कार्यकारी एजेंसी टेंडर जारी करेगी और नियमानुसार निर्धारित समय सीमा में निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।