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दान के खून की राशि के गबन में पुलिस ने रिकाॅर्ड कब्जे में लिया
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01jjrp14- अमर उजाला में 19 जून को प्रकाशित समाचार।
संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में दान के खून की राशि के गबन मामले में पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग से रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिया है। इस मामले में आरोपी की जल्द गिरफ्तारी होने की संभावना है। तत्कालीन एनएचएम लेखाकार अखिल पर 19 लाख रुपये से अधिक के गबन का आरोप है।
सिविल अस्पताल का ब्लड बैंक जरूरतमंद मरीजों को खून उपलब्ध कराता है। निजी अस्पतालों में दाखिल मरीजों को एक निर्धारित राशि जमा करने के बाद यह खून दिया जाता है। लेखाकार अखिल ने तीन साल के दौरान इसी राशि में गबन किया था। स्वास्थ्य विभाग ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच की थी। जांच समिति ने तीन साल में 19 लाख रुपये से अधिक का गबन पाया।
गबन का खुलासा होने के बाद आरोपी ने यह राशि विभाग के पास जमा करवा दी थी। उसने खुद पर कार्रवाई न करने की मांग की थी। हालांकि, विभाग ने अखिल को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। शहर थाना में उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।
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मंगलवार को शहर थाना से जांच अधिकारी रवींद्र स्वास्थ्य विभाग के पास पहुंचे। उन्होंने मामले से संबंधित सभी रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं। अब पुलिस इस मामले में आगे की जांच करेगी। जांच अधिकारी रवींद्र ने बताया कि ब्लड बैंक में हुए गबन के मामले में स्वास्थ्य विभाग से मंगलवार को रिकॉर्ड लिया गया है। उन्होंने जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी की उम्मीद जताई है।
यह गबन दान में मिले खून के बदले जमा की गई राशि में हुआ था। जांच समिति ने तीन साल की अवधि में 19 लाख रुपये से अधिक का गबन पाया। राशि जमा करने के बावजूद विभाग ने अखिल को बर्खास्त किया। उसके खिलाफ शहर थाना में एफआईआर दर्ज की गई। यह कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग की शिकायत के आधार पर की गई थी।
यह गबन दान में मिले खून के बदले जमा की गई राशि में हुआ था। जांच समिति ने तीन साल की अवधि में 19 लाख रुपये से अधिक का गबन पाया। राशि जमा करने के बावजूद विभाग ने अखिल को बर्खास्त किया। उसके खिलाफ शहर थाना में एफआईआर दर्ज की गई। यह कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग की शिकायत के आधार पर की गई थी।
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झज्जर। सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक में दान के खून की राशि के गबन मामले में पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग से रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिया है। इस मामले में आरोपी की जल्द गिरफ्तारी होने की संभावना है। तत्कालीन एनएचएम लेखाकार अखिल पर 19 लाख रुपये से अधिक के गबन का आरोप है।
सिविल अस्पताल का ब्लड बैंक जरूरतमंद मरीजों को खून उपलब्ध कराता है। निजी अस्पतालों में दाखिल मरीजों को एक निर्धारित राशि जमा करने के बाद यह खून दिया जाता है। लेखाकार अखिल ने तीन साल के दौरान इसी राशि में गबन किया था। स्वास्थ्य विभाग ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच की थी। जांच समिति ने तीन साल में 19 लाख रुपये से अधिक का गबन पाया।
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गबन का खुलासा होने के बाद आरोपी ने यह राशि विभाग के पास जमा करवा दी थी। उसने खुद पर कार्रवाई न करने की मांग की थी। हालांकि, विभाग ने अखिल को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। शहर थाना में उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है।
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मंगलवार को शहर थाना से जांच अधिकारी रवींद्र स्वास्थ्य विभाग के पास पहुंचे। उन्होंने मामले से संबंधित सभी रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं। अब पुलिस इस मामले में आगे की जांच करेगी। जांच अधिकारी रवींद्र ने बताया कि ब्लड बैंक में हुए गबन के मामले में स्वास्थ्य विभाग से मंगलवार को रिकॉर्ड लिया गया है। उन्होंने जल्द ही आरोपी की गिरफ्तारी की उम्मीद जताई है।
यह गबन दान में मिले खून के बदले जमा की गई राशि में हुआ था। जांच समिति ने तीन साल की अवधि में 19 लाख रुपये से अधिक का गबन पाया। राशि जमा करने के बावजूद विभाग ने अखिल को बर्खास्त किया। उसके खिलाफ शहर थाना में एफआईआर दर्ज की गई। यह कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग की शिकायत के आधार पर की गई थी।
यह गबन दान में मिले खून के बदले जमा की गई राशि में हुआ था। जांच समिति ने तीन साल की अवधि में 19 लाख रुपये से अधिक का गबन पाया। राशि जमा करने के बावजूद विभाग ने अखिल को बर्खास्त किया। उसके खिलाफ शहर थाना में एफआईआर दर्ज की गई। यह कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग की शिकायत के आधार पर की गई थी।