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शोध को पेटेंट कर बाजार तक पहुंचाएं : डॉ. अग्रवाल
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फोटो 28जेएनडी09-सीआरएसयू में आयोजित कार्यशाला में मौजूद कुलपति प्रोफेसर डॉ. रामपाल सैनी और मुख्
- फोटो : samvad
जींद। विश्वविद्यालयों में नए विचारों और नवाचारों पर शोध के साथ उनकी बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और व्यावसायिक उपयोग पर भी ध्यान देना जरूरी है। यह बात इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड, कोलकाता के निदेशक डॉ. धनपत राम अग्रवाल ने सीआरएसयू में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में कही।
सोमवार को बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) का अनुकूलन विषय पर कार्यशाला का आयोजन डॉ. बीआर आंबेडकर लाइब्रेरी एवं डिपार्टमेंट ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस की ओर से एनईपी सेल के सहयोग से किया गया। कुलपति प्रोफेसर डॉ. रामपाल सैनी ने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है। शोध और नवाचार को समाज की जरूरतों तथा उद्योग की अपेक्षाओं से जोड़ना समय की जरूरत है।
विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपने शोध की संभावनाओं के साथ उसकी बौद्धिक संपदा की सुरक्षा के बारे में भी जागरूक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शोध को प्रयोगशाला से समाज तक पहुंचाने के लिए उसके संरक्षण, मूल्यांकन और प्रभावी उपयोग पर समान रूप से ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा की सुरक्षा से शोधकर्ताओं के मौलिक कार्य को संरक्षण मिलने के साथ उसके व्यावसायिक उपयोग के रास्ते भी खुलते हैं। कार्यशाला ऑडिटोरियम टीबी-1 में हुई। प्रतिभागियों को आईपीआर के संरक्षण, प्रबंधन, मूल्यांकन और उपयोग के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।
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सोमवार को बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) का अनुकूलन विषय पर कार्यशाला का आयोजन डॉ. बीआर आंबेडकर लाइब्रेरी एवं डिपार्टमेंट ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस की ओर से एनईपी सेल के सहयोग से किया गया। कुलपति प्रोफेसर डॉ. रामपाल सैनी ने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है। शोध और नवाचार को समाज की जरूरतों तथा उद्योग की अपेक्षाओं से जोड़ना समय की जरूरत है।
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विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपने शोध की संभावनाओं के साथ उसकी बौद्धिक संपदा की सुरक्षा के बारे में भी जागरूक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शोध को प्रयोगशाला से समाज तक पहुंचाने के लिए उसके संरक्षण, मूल्यांकन और प्रभावी उपयोग पर समान रूप से ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बौद्धिक संपदा की सुरक्षा से शोधकर्ताओं के मौलिक कार्य को संरक्षण मिलने के साथ उसके व्यावसायिक उपयोग के रास्ते भी खुलते हैं। कार्यशाला ऑडिटोरियम टीबी-1 में हुई। प्रतिभागियों को आईपीआर के संरक्षण, प्रबंधन, मूल्यांकन और उपयोग के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।
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