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सात फेरे लेने के बाद फिर जेल भेजा गया कुख्यात मैनपाल
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बादली। हत्या, हत्या के प्रयास, अवैध हथियार और आपराधिक षड्यंत्र के मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बादली निवासी मैनपाल ढिल्ला ने गुरुवार को 12 घंटे की पैरोल के दौरान कंबोडिया निवासी मेटा चान के साथ हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लिए। झज्जर-गुरुग्राम रोड स्थित दुलीना फार्म हाउस में हुए विवाह समारोह के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे।
निर्धारित पैरोल के तहत मैनपाल सुबह करीब 8 बजे जेल से बाहर आया। समय सीमा को देखते हुए विवाह की प्रमुख रस्में तय कार्यक्रम के अनुसार पूरी कराई गईं।
विवाह स्थल को पुलिस सुरक्षा घेरे में रखा गया था। समारोह में पहुंचने वाले रिश्तेदारों की जांच की गई। सुरक्षा व्यवस्था के चलते मीडिया को फार्म हाउस के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई और पुलिसकर्मी पूरे समय तैनात रहे।
मेटा चान अपने चार बच्चों और परिवार के सदस्यों के साथ विवाह समारोह में शामिल होने झज्जर पहुंची। विवाह को लेकर परिवार में खुशी का माहौल रहा। मेहमानों के लिए विभिन्न प्रकार के पकवान तैयार किए गए और करीब 500 से 600 लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई। पैरोल की अवधि को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम को निर्धारित समय के अनुरूप संपन्न कराया गया।
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मैनपाल को वर्ष 2013 में वर्ष 2007 के बहादुरगढ़ सदर थाने में दर्ज मामले में हत्या, हत्या के प्रयास, अवैध हथियारों के इस्तेमाल और आपराधिक षड्यंत्र के आरोपों में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वह अन्य दो मामलों में भी दोषी ठहराया जा चुका है।
17 जुलाई 2018 को उसे हिसार सेंट्रल जेल से छह सप्ताह की पैरोल मिली थी। पैरोल समाप्त होने के बाद जेल नहीं लौटने पर वह विदेश चला गया। बाद में उसके कंबोडिया में होने की जानकारी सामने आई।
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निर्धारित पैरोल के तहत मैनपाल सुबह करीब 8 बजे जेल से बाहर आया। समय सीमा को देखते हुए विवाह की प्रमुख रस्में तय कार्यक्रम के अनुसार पूरी कराई गईं।
विवाह स्थल को पुलिस सुरक्षा घेरे में रखा गया था। समारोह में पहुंचने वाले रिश्तेदारों की जांच की गई। सुरक्षा व्यवस्था के चलते मीडिया को फार्म हाउस के अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई और पुलिसकर्मी पूरे समय तैनात रहे।
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मेटा चान अपने चार बच्चों और परिवार के सदस्यों के साथ विवाह समारोह में शामिल होने झज्जर पहुंची। विवाह को लेकर परिवार में खुशी का माहौल रहा। मेहमानों के लिए विभिन्न प्रकार के पकवान तैयार किए गए और करीब 500 से 600 लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई। पैरोल की अवधि को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम को निर्धारित समय के अनुरूप संपन्न कराया गया।
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मैनपाल को वर्ष 2013 में वर्ष 2007 के बहादुरगढ़ सदर थाने में दर्ज मामले में हत्या, हत्या के प्रयास, अवैध हथियारों के इस्तेमाल और आपराधिक षड्यंत्र के आरोपों में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वह अन्य दो मामलों में भी दोषी ठहराया जा चुका है।
17 जुलाई 2018 को उसे हिसार सेंट्रल जेल से छह सप्ताह की पैरोल मिली थी। पैरोल समाप्त होने के बाद जेल नहीं लौटने पर वह विदेश चला गया। बाद में उसके कंबोडिया में होने की जानकारी सामने आई।