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बहादुरगढ़ में कुत्तों के बधियाकरण के लिए नहीं मिला ठेकेदार, प्रक्रिया अटकी
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फोटो-58: शहर में कुत्तों को पकड़ ले जाने का फाइल फोटो।
संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। शहर में चार हजार बेसहारा कुत्तों की बधियाकरण की योजना फिर अटक गई है। नगर परिषद की ओर से दोबारा टेंडर जारी करने के बावजूद कोई ठेकेदार सामने नहीं आया। उधर शहर के सिविल अस्पताल में रोजाना कुत्तों के काटने के 50 से ज्यादा मामले पहुंच रहे हैं।
ऐसे में बेसहारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण की योजना को अमलीजामा पहनाना नगर परिषद के लिए चुनौती बना हुआ है। नगर परिषद की चेयरपर्सन सरोज राठी ने बताया कि शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निर्देश पर करीब सात माह बाद बधियाकरण की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की योजना बनाई गई थी।
इसके तहत चार हजार कुत्तों की नसबंदी और छह माह के लिए एजेंसी नियुक्त करने का प्रस्ताव था। टेंडर में किसी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में काम शुरू नहीं हो सका। अब नगर परिषद को दोबारा टेंडर जारी करने या दूसरे विकल्प तलाशने होंगे।
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फिलहाल टेंडर में कोई एजेंसी सामने नहीं आने से नसबंदी का काम शुरू नहीं हो पाया है। शहर में कुत्तों के काटने के मामलों के बीच नगर परिषद के सामने योजना को आगे बढ़ाने के लिए नई एजेंसी तलाशने की चुनौती है।
पहले भी विरोध के चलते रद्द करना पड़ा था टेंडर
करीब सात माह पहले भी नगर परिषद ने कुत्तों का बधियाकरण के लिए टेंडर जारी किया था। उस समय चयनित एजेंसी कुत्तों को पकड़कर नसबंदी के लिए रोहतक ले जा रही थी। जीव प्रेमियों मंजीत, शालू सहित अन्य लोगों ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि कुत्तों को उनके मूल क्षेत्र से दूर ले जाना उचित नहीं है। विरोध के बाद नगर परिषद को टेंडर रद्द करना पड़ा था। इसके बाद विभागीय निर्देशों पर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन इस बार ठेकेदार नहीं मिलने से योजना फिर अटक गई।
नसबंदी के बाद उसी जगह छोड़ने होंगे कुत्ते
योजना के तहत एजेंसी को कुत्तों को पकड़ने, उनके उपचार, नसबंदी के बाद देखभाल और शेल्टर होम की व्यवस्था करनी थी। नियमों के अनुसार कुत्तों को पकड़ते समय क्रूरता नहीं की जा सकती। नसबंदी के बाद उनके दाहिने कान पर वी आकार का निशान लगाकर उन्हें उसी स्थान पर छोड़ना होगा, जहां से पकड़ा गया था। छह माह से कम उम्र के कुत्तों और दो माह से कम उम्र के पिल्लों वाली मादा कुत्तों को नहीं पकड़ा जाना है। एजेंसी का पशु कल्याण बोर्ड में पंजीकृत होना भी अनिवार्य है।
फोटो-58: शहर में कुत्तों को पकड़ ले जाने का फाइल फोटो।
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बहादुरगढ़। शहर में चार हजार बेसहारा कुत्तों की बधियाकरण की योजना फिर अटक गई है। नगर परिषद की ओर से दोबारा टेंडर जारी करने के बावजूद कोई ठेकेदार सामने नहीं आया। उधर शहर के सिविल अस्पताल में रोजाना कुत्तों के काटने के 50 से ज्यादा मामले पहुंच रहे हैं।
ऐसे में बेसहारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण की योजना को अमलीजामा पहनाना नगर परिषद के लिए चुनौती बना हुआ है। नगर परिषद की चेयरपर्सन सरोज राठी ने बताया कि शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निर्देश पर करीब सात माह बाद बधियाकरण की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की योजना बनाई गई थी।
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इसके तहत चार हजार कुत्तों की नसबंदी और छह माह के लिए एजेंसी नियुक्त करने का प्रस्ताव था। टेंडर में किसी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में काम शुरू नहीं हो सका। अब नगर परिषद को दोबारा टेंडर जारी करने या दूसरे विकल्प तलाशने होंगे।
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फिलहाल टेंडर में कोई एजेंसी सामने नहीं आने से नसबंदी का काम शुरू नहीं हो पाया है। शहर में कुत्तों के काटने के मामलों के बीच नगर परिषद के सामने योजना को आगे बढ़ाने के लिए नई एजेंसी तलाशने की चुनौती है।
पहले भी विरोध के चलते रद्द करना पड़ा था टेंडर
करीब सात माह पहले भी नगर परिषद ने कुत्तों का बधियाकरण के लिए टेंडर जारी किया था। उस समय चयनित एजेंसी कुत्तों को पकड़कर नसबंदी के लिए रोहतक ले जा रही थी। जीव प्रेमियों मंजीत, शालू सहित अन्य लोगों ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि कुत्तों को उनके मूल क्षेत्र से दूर ले जाना उचित नहीं है। विरोध के बाद नगर परिषद को टेंडर रद्द करना पड़ा था। इसके बाद विभागीय निर्देशों पर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन इस बार ठेकेदार नहीं मिलने से योजना फिर अटक गई।
नसबंदी के बाद उसी जगह छोड़ने होंगे कुत्ते
योजना के तहत एजेंसी को कुत्तों को पकड़ने, उनके उपचार, नसबंदी के बाद देखभाल और शेल्टर होम की व्यवस्था करनी थी। नियमों के अनुसार कुत्तों को पकड़ते समय क्रूरता नहीं की जा सकती। नसबंदी के बाद उनके दाहिने कान पर वी आकार का निशान लगाकर उन्हें उसी स्थान पर छोड़ना होगा, जहां से पकड़ा गया था। छह माह से कम उम्र के कुत्तों और दो माह से कम उम्र के पिल्लों वाली मादा कुत्तों को नहीं पकड़ा जाना है। एजेंसी का पशु कल्याण बोर्ड में पंजीकृत होना भी अनिवार्य है।
फोटो-58: शहर में कुत्तों को पकड़ ले जाने का फाइल फोटो।