J&K में भी उत्तराखंड जैसे आसार, पीडीपी में बगावत की सुगबुगाहट
- भाजपा के कड़े संदेश के बाद शनिवार को दिल्ली से लौटीं महबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से सरकार गठन और पार्टी की रणनीति पर बातचीत की।
- पीडीपी में 15 से अधिक विधायकों का गुट चाहता है कि राज्य में सरकार बने।
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रियासत में सरकार गठन पर पिछले ढाई महीने से चल रहे गतिरोध के बीच नई सरकार को लेकर यहां भी उत्तराखंड जैसे हालात पैदा होने के आसार बन गए हैं। कहा जा रहा है कि ताजा स्थितियों से पीडीपी में टूट की भी नौबत उत्पन्न हो सकती है।
इसके लिए 15 से अधिक विधायक तैयार बैठे हैं। इस बीच भाजपा के कड़े संदेश के बाद शनिवार को दिल्ली से लौटीं महबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से सरकार गठन और पार्टी की रणनीति पर बातचीत की।
कहा जा रहा है कि पीडीपी प्रमुख जल्द ही पार्टी की बैठक बुला सकती हैं। अगले एक-दो दिनों में वे इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ सकती हैं। पीडीपी के रुख का इंतजार कर रही भाजपा की ओर से भी अन्य विकल्पों की तलाश में जुटने की खबर है।
15 से अधिक विधायकों का गुट चाहता है कि राज्य में सरकार बने
रियासत के कानून के मुताबिक दो तिहाई बहुमत से विधायक दल का नेता बदला जा सकता है। इसमें किसी प्रकार का दलबदल निरोधक कानून लागू नहीं होगा। सूत्रों के अनुसार सरकार गठन में हो रही देरी और आम जन के बीच बढ़ती नाराजगी को देखते हुए पीडीपी विधायकों में जबर्दस्त असंतोष है।
पार्टी की पिछली बैठकों में वे इसका इजहार भी कर चुके हैं। ऐसे में उनके बीच आपसी तालमेल के आधार पर 15 से अधिक विधायकों का गुट चाहता है कि राज्य में सरकार बने। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि पीडीपी के 18 विधायकों के गुट ने भाजपा के साथ हाथ मिला लिया तो रियासत में नई सरकार संभव है।
सूत्रों का कहना है कि ताजा परिस्थितियों में महबूबा मुफ्ती जल्द ही पार्टी नेताओं की बैठक बुलाकर सरकार गठन की दिशा में हुई प्रगति की जानकारी दे सकती हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि अभी बैठक की तिथि तय नहीं है क्योंकि जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद होने की वजह से कई नेता जम्मू में हैं।
हालांकि, पीडीपी की ओर से यह कहा जा रहा है कि भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि सरकार गठन के लिए पीडीपी ने नई शर्तें रखी हैं। जबकि ऐसा नहीं है। पार्टी ने तो सिर्फ एजेंडा आफ एलायंस की बात की है जिसमें सभी बातों का जिक्र है।