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Madhya Pradesh: HC ने विभागीय जांच व आपराधिक कार्रवाई को बताया अलग-अलग पहलू, आपराधिक मामला खारिज करने से इनकार
Wed, 08 Feb 2023 03:18 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मध्य प्रदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मध्य प्रदेश
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Wed, 08 Feb 2023 03:18 PM IST
सार
याचिकाकर्ता प्रदीप कुमार ने याचिका में कहा था कि वह रेलवे में लोको पायलट है। उसके खिलाफ विभागीय जांच की गई थी और दोषी पाने पर दंडित भी किया गया था। इसके अलावा उसके खिलाफ चोरी की FIR भी दर्ज हुई थी। चोरी का मामला रेलवे मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित है। लेकिन मामला खारिज करने के आवेदन को रेलवे मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दिया था।
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट
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विस्तार
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जस्टिस राजेंद्र कुमार वर्मा ने बुधवार को अहम फैसले में कहा है कि विभागीय जांच व आपराधिक कार्रवाई अलग-अलग पहलू हैं। कर्तव्यों के उल्लंघन तथा अनुशासन बनाए रखने के लिए विभागीय जांच की कार्रवाई होती है। कानून का उल्लंघन करने पर आपराधिक कार्रवाई होती है। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ न्यायालय में लंबित आपराधिक मामले को खारिज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।
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रेलवे मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दिया था मामला खारिज करने का आवेदन
कटनी निवासी प्रदीप कुमार यादव की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि वह रेलवे विभाग में लोको पायलट है। उसके खिलाफ विभागीय जांच की गई थी और दोषी पाते हुए दंडित भी किया गया था। इसके अलावा उसके खिलाफ चोरी की एफआईआर भी दर्ज करवाई गई थी। चोरी का मामला रेलवे मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित है। मामला खारिज किए जाने के आवेदन को रेलवे मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दिया था। इस कारण उक्त याचिका दायर की गई है।
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याचिका में कहा गया था कि विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है। इसलिए आपराधिक मामला प्रचलन योग्य नहीं है। एक अपराध के लिए दो सजा देना न्याय के सिध्दांत के खिलाफ है।
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एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि अपराधिक मामले में सबूत का बोझ अभियोजन पक्ष पर होता है। अभियोजन को मामला उचित संदेह के परे साबित करना होता है। विभागीय जांच में अपराधिक कार्रवाई नहीं होती है। विभागीय जांच व आपराधिक कार्रवाई सामांतर तौर पर चल सकती है। उक्त आदेश से साथ एकलपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।