सैनिक कालोनी मुद्दे पर विधानसभा में जोरदार हंगामा, महबूबा-उमर के बीच तीखी तकरार
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सैनिक कालोनी के मुद्दे पर राज्य विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों इस मामले में आमने-सामने आ गए। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और विपक्ष के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बीच तीखी तकरार हुई। मुख्यमंत्री ने विपक्ष तथा मीडिया के एक वर्ग पर जम्मू-कश्मीर की अमन और शांति में आग लगाने का आरोप लगाया।
साथ ही कहा कि वे ऐश और एय्याशी के लिए इस कुर्सी पर नहीं हैं। चाहे दो दिन, चार दिन या दो साल कुर्सी पर रहेें, लेकिन रियासत के हितों के साथ खिलवाड़ की कतई इजाजत नहीं दी जाएगी। महबूबा के आरोपों का उमर ने कड़ा प्रतिवाद करते हुए कहा कि यदि हम अपने कार्यकाल के दौरान उठाए गए आपके नक्शे कदम पर चलने लगें तो रियासत में निश्चित रूप से आग लग जाएगी।
रहा सवाल ट्वीट करने का तो वह सरकार को जवाबदेह बनाने और लोगों के हित के लिए करते हैं। यह कभी बंद नहीं होगा और वह इसके लिए माफी भी नहीं मांगने जा रहे।
विपक्ष और मीडिया का एक वर्ग रियासत में आग लगाना चाहता है
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद ने एक अखबार की प्रति के साथ वेल में पहुंचकर हंगामा शुरू कर दिया और सरकार से सैनिक कालोनी के मुद्दे पर जवाब देने को कहा। उनका कहना था कि अखबार की रिपोर्ट के अनुसार पुराने एयरपोर्ट के पास सैनिक कालोनी का निर्माण कराया जा रहा है। अखबार ने फोटो सहित यह रिपोर्ट प्रकाशित की है।
इस पर नेकां और कांग्रेस ने हंगामा शुरू कर दिया। पीठासीन अध्यक्ष और स्पीकर के समझाने के बाद भी जब विपक्ष ने हंगामा बंद नहीं किया तो सदन में मौजूद मुख्यमंत्री ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा कि सात मई को एयरपोर्ट के पास सैनिक कालोनी बनाए जाने संबंधी ट्वीट को आधार बनाकर रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। विपक्ष तथा मीडिया का एक वर्ग यहां के अमन में आग लगाना चाहता है।
यहां के लोगों को सूली पर चढ़ाना चाहते हैं। पहले तहकीकात कर लें फिर रिपोर्ट प्रकाशित करें। सेना को आवंटित जमीन पर वह अपनी जरूरतों के अनुरूप निर्माण कार्य कराती है। जेकेएलआई की ओर से निर्माण कराया जा रहा है और उसे सैनिक कालोनी बना दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड की चार मीटिंग में हिस्सा लिया है और हर बार जमीन चिह्नित करने के आदेश दिए गए।
सैनिक कालोनी शेख अब्दुल्ला के कार्यकाल में जम्मू में बनी थी
उनके कार्यकाल में मीटिंग हुई और बाद में कह दिया गया कि जमीन उपलब्ध नहीं है। पहली सैनिक कालोनी शेख अब्दुल्ला के कार्यकाल में जम्मू में बनी थी। उसे सेना ने नहीं बल्कि राज्य सरकार ने बनवाया था। उन्होंने उमर की ओर इशारा करते हुए तंज कसा कि ट्वीट पर ट्वीट किया जा रहा है और कहा जाता है कि अमन लाएंगे।
दो-तीन अखबारों के बीच रेस लगी हुई है कि सदन में किसका अखबार लहराता है। रोज कोई न कोई रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है। कोई बात सही हो तो रिपोर्ट करें उसे सलाम करेंगी।
साथ ही चेताया कि यदि जम्मू-कश्मीर के अमन में आग लगाने की कोशिश की गई तो सख्ती से निबटा जाएगा। जो मुद्दे नहीं हैं उस पर राजनीति की जा रही है। विपक्ष तथा मीडिया को जिम्मेदारी से अपनी भूमिका का निर्वाह करना चाहिए।
ट्विटर एकाउंट बंद कर दूं ताकि आपको शांति मिले
मुख्यमंत्री के आरोपों का सदन में जवाब देते हुए उमर ने कहा कि सदन की नेता बार-बार ट्वीटर का हवाला देती हैं। मुख्यमंत्री ने सैनिक कालोनी के मुद्दे पर इशारा किया है कि शायद वे रियासत में आग लगाना चाहते हैं। छह साल में आपने क्या क्या किया यह सब जानते हैं। यदि हम भी आपके नक्शे कदम पर चल उठे तो निश्चित रूप से आग लग जाएगी।
उन्होंने कहा कि ट्वीट किया है और सही तथ्यों पर किया है। आपकी सरकार ने पुराने एयरपोर्ट क्षेत्र में सैनिक कालोनी के लिए जमीन चिह्नित करने का आदेश निकाला है जिसका ट्वीट में जिक्र है। यदि मेरे कार्यकाल का कोई आदेश हो तो उसे सार्वजनिक किया जाए।
उमर ने कहा कि आप चाहती हैं कि ट्विटर एकाउंट बंद कर दूं ताकि आपको शांति मिले। लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे। वे ट्वीटर पर अपनी बात नहीं करते हैं? सरकार को जवाबदेह बनाने तथा लोगों के हित के लिए ट्वीट करता हूं। जरा सा ट्वीट से आप उछल पड़ती हैं। उमर ने कहा कि जब आपने सैनिक कालोनी के मुद्दे पर स्पष्ट कर दिया तो उन्होंने यह मुद्दा छोड़ दिया। इस वजह से प्लीज इस मुद्दे में उन्हें न घसीटें।