फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   City & states ›   MDA and roadways coming under pressure of NGT

एनजीटी के दबाव में आने लगे एमडीए और रोडवेज

Tue, 30 May 2017 03:14 AM IST
amar ujala meerut
amar ujala meerut Updated Tue, 30 May 2017 03:14 AM IST
विज्ञापन
रोडवेज बस अड्डों को बाहर करने के मामले में एनजीटी की सख्ती से एमडीए व रोडवेज दबाव में आने लगे हैं। मामले को लेकर एमडीए ने जहां पूर्व में मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड को लोहिया नगर में दी 5 एकड़ जमीन छीनकर रोडवेज को देने का मन बना लिया हैं वहीं रोडवेज के उच्चाधिकारियों ने भी जमीन का सर्वे कर इसे लेने के लिए हरी झंडी दिखा दी है।
विज्ञापन


रोडवेज का भैसाली व सोहराबगेट बस अड्डा शहर की आबादी के बीच होने से ने केवल जाम का पर्याय बन चुके हैं बल्कि हजारों बसों से वायु प्रदूषण भी फैल रहा है। एमडीए के मास्टर प्लान में बस अड्डों को शहर से बाहर शिफ्ट करने के प्रस्ताव पर अमल नहीं होने पर मामला एनजीटी में चला गया है। आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना की रिट पर एनजीटी ने एमडीए, रोडवेज, प्रदूषण नियंत्रण विभाग और वन एवं पर्यावरण विभाग आदि को नोटिस देकर जवाब मांगा है।
विज्ञापन


एमडीए व रोडवेज तो अपना जवाब दाखिल कर चुके हैं। प्रदूषण नियंत्रण विभाग व वन एवं पर्यावरण विभाग को 8 जून तक अपना जवाब दाखिल करना है। वहीं एमडीए और रोडवेज में बस अड्डों को बाहर करने के लिए हरकत होनी शुरू हो गई है। एमडीए ने पूर्व में लोहिया नगर में एमसीटीएसल को लीज पर दी 5 एकड़ जमीन को वापस लेकर रोडवेज को देने की कवायद शुरू कर दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जमीन का किया निरीक्षण
एमडीए के प्रस्ताव पर रोडवेज मुख्यालय से पहुंचे जीएम अतुल भारती व अधिशासी अभियंता मोहम्मद इरफान ने लोहिया नगर की 5 एकड़ जमीन को देखा। निरीक्षण करने के बाद अधिकारियों ने जमीन को बस अड्डे के लिए पूरी तरह उपयोगी पाया। टीम ने कहा कि अगर एमडीए एमसीटीएसएल का पट्टा खारिज करके रोडवेज के नाम लीज करता है तो विभाग इसे लेने को तैयार है।

एमसीटीएसएल नहीं कर सका पांच साल में निर्माण
मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड को एमडीए ने लोहियानगर में बस अड्डा बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन 99 साल की लीज पर दी थी। शर्त के मुताबिक कंपनी को पांच साल के अंदर इस पर अड्डे का निर्माण करना था। लेकिन कंपनी निर्माण नहीं कर सकी। अब एमडीए कंपनी से जमीन लेकर रोडवेज को दे रहा है।

1934 में मिली थी जमीन
कैंट बोर्ड ने सन 1934 में प्रदेश सरकार को भैसाली अड्डे की जमीन दी थी। 1952 से जमीन पर यूपी रोडवेज काबिज हुआ था। वहीं सोहराबगेट डिपो की स्थापना 1978 में हुई थी। दोनों बस अड्डों को निगम मुख्यालय द्वारा एक श्रेणी में रखा गया है।

ये है स्थिति
भैसाली अड्डे का क्षेत्रफल           11 हजार 671 वर्गमीटर
मेरठ कार्यशाला का क्षेत्रफल         13 हजार 430 वर्गमीटर
सोहराबगेट बस अड्डे का क्षेत्रफल        4 हजार 954 वर्गमीटर
सोहराबगेट कार्यशाला का क्षेत्रफल       12 हजार 733 वर्गमीटर
दोनों बस अड्डों से संचालित बसें          करीब 650
भैसाली अड्डे के यात्रियों की संख्या        करीब 60 हजार प्रतिदिन
सोहराबगेट अड्डे के यात्रियों की संख्या      करीब 12 हजार प्रतिदिन

एमडीए ने बस अड्डे के लिए लोहियानगर में एमसीटीएसएल को दी गई जमीन दिखाई है। लखनऊ से आए अधिकारियों की टीम को यह जमीन बस अड्डे के लिए पर्याप्त व उपयोगी लगी है। अगर एमडीए यह जमीन देगा तो रोडवेज को कोई एतराज नहीं है। एसके बनर्जी, आरएम, मेरठ रोडवेज रीजन


शर्त अनुसार पांच साल में बस अड्डा नहीं बनाने पर एमसीटीएसएल से जमीन लेकर रोडवेज को देने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। सैटेलाइट बस अड्डा बनाने के लिए यह जमीन उपयुक्त है। प्रस्ताव को जल्द ही मंडलायुक्त के सामने पेश किया जाएगा। योगेंद्र यादव, वीसी एमडीए
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed