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महापुरुषों की स्मृति को जीवंत रखना जिम्मेदारी है : धर्मदेव
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23jjrp27- दुजाना में आयोजित कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते वक्ता। स्रोत : आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
बेरी। गांव दुजाना में बुधवार को श्रीमज्जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य द्वार का उद्घाटन आश्रम हरि मंदिर पटौदी के अधिष्ठाता महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव ने किया। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की स्मृति को जीवंत रखना सांस्कृतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है। उनके नाम पर बनाए गए स्मारक और द्वार नई पीढ़ी को उनके आदर्शों एवं विचारों से परिचित कराने का माध्यम बनते हैं। महापुरुष किसी एक समाज के नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के मार्गदर्शक होते हैं।
श्री जगन्नाथ धाम ऋषिकेश के अधिष्ठाता महंत लोकेश दास ने कहा कि यह द्वार स्वामी हंसदेवाचार्य के जीवन, तपस्या और समाजसेवा की स्मृति का प्रतीक है। उन्होंने निर्माण में जिला परिषद अध्यक्ष कप्तान बिरधाना के सहयोग के लिए आभार जताया। कार्यक्रम को फिल्म निदेशक हरीश अरोड़ा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर मनीष बंसल, पूर्णचंद सुनेजा, सीताराम शर्मा, कृष्णलाल सरदाना सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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बेरी। गांव दुजाना में बुधवार को श्रीमज्जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य द्वार का उद्घाटन आश्रम हरि मंदिर पटौदी के अधिष्ठाता महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव ने किया। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की स्मृति को जीवंत रखना सांस्कृतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है। उनके नाम पर बनाए गए स्मारक और द्वार नई पीढ़ी को उनके आदर्शों एवं विचारों से परिचित कराने का माध्यम बनते हैं। महापुरुष किसी एक समाज के नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के मार्गदर्शक होते हैं।
श्री जगन्नाथ धाम ऋषिकेश के अधिष्ठाता महंत लोकेश दास ने कहा कि यह द्वार स्वामी हंसदेवाचार्य के जीवन, तपस्या और समाजसेवा की स्मृति का प्रतीक है। उन्होंने निर्माण में जिला परिषद अध्यक्ष कप्तान बिरधाना के सहयोग के लिए आभार जताया। कार्यक्रम को फिल्म निदेशक हरीश अरोड़ा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर मनीष बंसल, पूर्णचंद सुनेजा, सीताराम शर्मा, कृष्णलाल सरदाना सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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