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आज शिव का जलाभिषेक करेंगे गोला के कांवड़िये
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 13 Jul 2017 11:41 PM IST
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छोटी काशी शुक्रवार को क्षेत्र के 200 कांवड़ियों के जयकारों से गूंजेगी। गोला से गए कांवड़ियों का जत्था 38 खडेश्वरी कांवड़ लेकर शाम लगभग चार बजे भोले बाबा का गंगाजल से जलाभिषेक करेगा।
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कांवड़िये फर्रुखाबाद के घटियाघाट पर स्नान कर कांवड़ पूजन के बाद गंगाजल भरकर पैदल चले हैं। खड़ेश्वरी कांवड़ें होने के कारण इन कांवड़ों को लाने के लिए 200 कांवड़िये 25 वाहनों के साथ कांवड़ ढोने में लगे हैं। घटिया घाट पर भोले बाबा कांवड़िया दल के महंत रामचंद्र राजपूत ने कांवड़िये दल को खड़ेश्वरी कांवड़ यात्रा के नियमों को बताया। कहा, कांवड़ लाने वाला श्रद्धालु संत माना जाता है। उसे नशा पान, अपशब्द कहना, अन्न ग्रहण करना, केश और नख काटना, किसी के ऊपर गलत निगाह डालना, होली खेलना वर्जित है। ब्रह्मचर्य पालन करना अनिवार्य है। खड़ेश्वरी कांवड़ हमेशा कांवड़िये के कंधे पर ही रखी जाती है। जब तक कि शिवजी का जलाभिषेक पूर्ण नहीं हो जाता। जलाभिषेक के बाद ही कांवड़िये को इन नियमों से मुक्ति मिल जाती है। महंत ने बताया कि बहुत से कांवड़ियों को रास्ते में स्वयं किसी न किसी रूप में भोले बाबा के दर्शन भी प्राप्त होते हैं। उसे गुप्त रखना चाहिए और मन ही मन भोले बाबा का ध्यान कर जयकारे लगाते, कीर्तन गाते हुए, कांवड़ लेकर चलना चाहिए। खडेश्वरी कावड़िया दल में सुरेंद्र भारद्वाज, शिवम वर्मा, प्रमोद कुमार, श्यामकुमार गुप्त, सुरेश शर्मा, महेश पटवारी, संदीप गिरि, प्रदीप दीक्षित, रामरक्षपाल राजपूत, जितेंद्र गट्टानी, शाश्वत केडिया, लालराम वर्मा, सुभांशु शर्मा, आशीष गुप्ता आदि शामिल हैं।
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बोल बम के जयकारों से गूंजने लगी छोटी काशी
गोला गोकर्ण नाथ। छोटी काशी सावन माह में कांवड़ियों के बम भोले और हर हर महादेव के जयकारों से गूंजने लगी है। कंधों पर रखी सजी-धजी कांवड़, तन पर भगवा वस्त्र, मुख पर ओम नम: शिवाय का जाप, पैरों में घुंघरू की छम छम के साथ नगर की सड़कों पर निकलते कांवड़ियों के जत्थे आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
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ममरी। प्राचीन शिव मंदिर और अहमदनगर के क्लेशहरण मंदिर में जल भरकर कावड़ों को लेकर जलाभिषेक करने वाले फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर, बरेली आदि स्थानों के पदयात्री कांवड़ियों का वृहस्पतिवार को सड़कों पर सैलाब उमड़ पड़ा। कावड़िये नाचते-गाते डमरुआ बाले की जय जयकार करते हुए मंदिर की ओर बढ़ रहे थे। फरुर्खाबाद के गंगाघाट से कांवड़े लेकर आए कांवड़ियों का महेशपुर, ममरी, कंजा के बरमबाबा स्थान पर स्वागत कर उन्हें फलाहार कराया।
कौड़ियाला से जल भरकर कांवड़ियों का जत्था गोला रवाना
कौड़ियाला घाट से कांवड़ियों का पहला जत्था वृहस्पतिवार को जल भरकर छोटी काशी गोला गोकर्णनाथ के लिए रवाना हो गया। कांवड़ियों के जत्थे का जगह-जगह कस्बावासियों ने भव्य स्वागत किया। भोले के जयकारों के साथ मस्त शिव भक्त अबीर-गुलाल उड़ाकर डांस करते हुए अपनी मंजिल की ओर निकल गए। कांवरियों को विदाई देने के लिए आस-पास के गांव कस्बे के बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
कौडियाला घाट पर सुबह पांच बजे पहुंचे करीब दो सौ कांवड़ियों के जत्थे ने विधि विधान से पूजा पाठ कर कलश में जल भरा। कावड़ियों को बड़ी संख्या में लोग बेलरायां के क्लेश हरण मंदिर तक छोडने पहुंचे। कोतवाल अजय सिंह कावड़ियों की सुरक्षा व्यवस्था में लगे रहे। इस दौरान दीपक श्रीवास्तव, ज्ञान, गोपीराम, मनोज निषाद, शुभम श्रीवास्तव, गोलू मिश्रा, दिनेश, नेतराम चौहान, मुन्ना, संतोष चौहान, रिंकू, मनोज कुमार, राम किशोर, राहुल, बाबू, विक्रम शाह, राजू शाह आदि शामिल रहे।