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36 बिरादरी की महापंचायत में जाट महासभा भाग लेगी
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Sun, 02 Oct 2016 09:24 AM IST
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डिंगरहेड़ी कांड को लेकर 8 अक्तूबर को नूंह की अनाज मंडी में 36 बिरादरी की महापंचायत होगी। जिला बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित इस महापंचायत में पीड़ितों को न्याय दिलाने संबंधी कई मुद्दों को शामिल किया जाएगा।
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इस महापंचायत को जाट महासभा मेवात ने भी अपना समर्थन दिया है। शनिवार को किरा गौशाला में जाट महासभा की एक बैठक आयोजित की गई। जिसमें फैसला लिया गया कि पंचायत में जाट समाज के लोग बढ़चढ़कर भाग लेंगे।
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डिंगरहेड़ी में जो घटना घटी वह पूरी तरह निंदनीय है और जाट महासभा मांग करती है कि उसके दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। यह पंचायत 36 बिरादरी के नाम से आयोजित की जा रही है और आयोजकों को चाहिए कि वे सभी बिरादरी प्रमुखों व समाज के प्रमुख लोगों के पास पंचायत का निमंत्रण भेजें।
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यदि आयोजक पंचायत का निमंत्रण नहीं भेजेंगे तो जाट महासभा इस पंचायत का बहिष्कार करेगी, क्योंकि निमंत्रण न दिए जाने तथा पंचायत में 36 बिरादरी की समस्याओं को न रखने पर यह पंचायत चंद लोगों के हाथों में सिमट जाती है और वे समाज के लोगों को गुमराह कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम करते है।
डिंगरहेड़ी घटना की आड़ में चंद असामाजिक लोग मजहबी राजनीति कर रहे है और वे इस प्रकार से मेवात के आपसी भाईचारे में दरार डालना चाहते है। जिला बार एशोसिएशन ऐसे मजहबी लोगों के हाथों की कठपुतली न बने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सभी वर्गों व समाजों का सहयोग लेकर आगे बढ़े।
वे सभी बिरादरियों के प्रमुखों व समाज के हर वर्ग के प्रमुख लोगों के पास महापंचायत का निमंत्रण भेंजें तथा मेवात में व्याप्त 36 बिरादरी की समस्याओं को भी पंचायत में उठाएं।
जाट महासभा मेवात की बैठक में प्रस्ताव पास हुआ कि आयोजक उन्हें निमंत्रण देंगे तो वे बढ-चढकर इसमें भाग लेंगे और पीड़ितों के हक की लड़ाई में उनका साथ देंगे और यदि निमंत्रण नहीं दिया गया तो महापंचायत का बहिष्कार किया जाएगा, क्योंकि फिर यह महापंचायत 36 बिरादरी की नहीं बल्कि एक समुदाय विशेष की होगी।
जिसमें चंद लोग अपनी राजनीति चमकाने के लिए समाज को तोड़ने का काम करेंगे। जाट महासभा के अध्यक्ष बलजीत डागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रणजीत पंवार, शिवचरण, दलबीर, समय सिंह, जगदेव सरपंच, देशराज इंड़री, कैप्टन सुमेर, रामजीलाल रावत, धर्मबीर डागर सहित जाट समाज के प्रमुख लोगों ने प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति दी और महापंचायत में शामिल होने का निर्णय लिया।