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मंडी में फसल बेचने पर व्यापारियों के लिए आयकर विभाग की नई शर्त
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Wed, 23 Nov 2016 05:42 PM IST
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किसान
- फोटो : File Photo
नोटबंदी के चलते अब किसानों को मंडी में धान आदि की फसल बेचने के लिए आयकर विभाग की एक नई शर्त पूरी करनी होगी। दरअसल, किसानों को व्यापारी से ‘जे’ फार्म लेना होगा।
इस फार्म में उतनी ही राशि लिखी जाएगी जितने की फसल बेची है। आयकर विभाग ने निर्देश जारी करते हुए किसानों को व्यापारियों से ‘जे’ फार्र्म लेने को कहा है। अगर खाते में या किसी लेन देन का मामला पाया जाता है तो किसानों से ब्योरा पूछा जाएगा।
ऐसे में अनाज आदि की बिक्री का रुपया होने पर ‘जे’ फार्र्म दिखाना जरूरी है। दरअसल, अभी तक मंडी में फसल बेचने के बाद किसान रुपये का किसान कोई सरकारी हिसाब किताब नहीं रखते थे। नोटबंदी के इस दौर में अब किसानों को भी इन रुपये का पूरा हिसाब-किताब देना होगा।
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इस फार्म में उतनी ही राशि लिखी जाएगी जितने की फसल बेची है। आयकर विभाग ने निर्देश जारी करते हुए किसानों को व्यापारियों से ‘जे’ फार्र्म लेने को कहा है। अगर खाते में या किसी लेन देन का मामला पाया जाता है तो किसानों से ब्योरा पूछा जाएगा।
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ऐसे में अनाज आदि की बिक्री का रुपया होने पर ‘जे’ फार्र्म दिखाना जरूरी है। दरअसल, अभी तक मंडी में फसल बेचने के बाद किसान रुपये का किसान कोई सरकारी हिसाब किताब नहीं रखते थे। नोटबंदी के इस दौर में अब किसानों को भी इन रुपये का पूरा हिसाब-किताब देना होगा।
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फार्म में देना होंगी ये सब जानकारियां
किसान
- फोटो : File Photo
आयकर विभाग के नियमों के अनुसार किसान की सामान्य फसल पर 25 हजार रुपये और स्पेशल क्रॉप (केसर, फूल की फसल) आदि पर एक लाख रुपये प्रति एकड़ आमदनी मानी जाती है। इसी के मुताबिक किसान के पास रुपये होने चाहिए।
सीए संजय धरेजा के अनुसार, किसान यदि मंडी में 50 हजार से अधिक रुपयों में कोई फसल बेच रहा है तो व्यापारी से जे फार्म अवश्य लें। ‘जे’ फार्म में ब्यौरा होगा कि कौन सी फसल, कितनी और कितने की बेची है।
इसके बाद यदि किसान इस धनराशि से लोन जमा करता है या फिर अपने बचत खाते में डालता है तो उसके पास आयकर विभाग की तरफ से नोटिस भेजा जा सकता है। इसमें उससे एक साथ इतनी धनराशि कहां से आयी, इनकम सोर्स आदि की जानकारी मांगी जाएगी।
इस नोटिस के बाद किसान मंडी से मिला ‘जे’ फार्म दिखा सकता है। यदि किसान जे फार्म नहीं दिखा पाता तो उसे ब्लैक मनी माना जा सकता है।
सीए संजय धरेजा के अनुसार, किसान यदि मंडी में 50 हजार से अधिक रुपयों में कोई फसल बेच रहा है तो व्यापारी से जे फार्म अवश्य लें। ‘जे’ फार्म में ब्यौरा होगा कि कौन सी फसल, कितनी और कितने की बेची है।
इसके बाद यदि किसान इस धनराशि से लोन जमा करता है या फिर अपने बचत खाते में डालता है तो उसके पास आयकर विभाग की तरफ से नोटिस भेजा जा सकता है। इसमें उससे एक साथ इतनी धनराशि कहां से आयी, इनकम सोर्स आदि की जानकारी मांगी जाएगी।
इस नोटिस के बाद किसान मंडी से मिला ‘जे’ फार्म दिखा सकता है। यदि किसान जे फार्म नहीं दिखा पाता तो उसे ब्लैक मनी माना जा सकता है।
एनआरआई को एनआरओ अकाउंट में डालनी होगी करेंसी
बैंक
सीए संजय धरेजा ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति 180 दिन विदेश में रहता है तो उसे एनआरआई माना जाता है। नोटबंदी के इस समय में यदि उसके पास पुरानी कैरेंसी है तो वह एनआरओ (नॉन रेजिडेंट ओडनरी अकाउंट) में डाल सकता है। 31 दिसंबर से पहले यह धनराशि अकाउंट में होनी चाहिए, अन्यथा यह वैलिड नहीं मानी जाएगी।