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घने कोहरे में ही बैंकों पर पहुंच गए थे
अमर उजाला ब्यूरो, जौनपुर
Updated Wed, 30 Nov 2016 12:59 AM IST
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मंगलवार को शहर के बैंक आफ बड़ौदा में पैसा लेने के लिए लगी उपभोक्ताओं की भीड़।
- फोटो : jounpur
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शादी-विवाह, दवा इलाज, खेती किसानी और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए रुपये की खातिर इस कदर लोग परेशान हैं कि मंगलवार को घने कोहरे में ही लोग आकर बैंकों पर लाइन में खड़े हो गए थे। कई बैंक शाखाओं पर तीसरे पहर तक लोग लाइन में खड़े रहे लेकिन पैसा नहीं मिला।
सोमवार की रात से ही घना कोहरा छा गया था। ठंड भी बढ़ गई थी।
बावजूद इसके अपनी जरूरतों को पूरा करने की गरज से लोग सुबह पांच बजे से ही आकर लाइन में खड़े हो गए थे। यूबीआई की नौपेड़वा और धनियामऊ शाखा के बाहर तो लोग अलाव जलाकर ताप रहे थे। बैंक खुला तो लोगों को दो दो हजार रुपये का भुगतान शुरू किया गया। लाइन में करीब 60 से 70 लोग बचे थे तभी बैंक का खजाना खाली हो गया।
लोगों को मायूस लौटना पड़ा। हलांकि लाइन में खड़े लोगों को बैंक की ओर से टोकन दिया गया। इससे उन्हें अगले दिन प्राथमिकता के आधार पर भुगतान किया जा सकेगा।
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एसबीआई की नौपेड़वा शाखा से रुपये निकालने आए पंधारी यादव ने बताया कि तीन घंटे तक लाइन में खड़ा रहा। जब काउंटर के करीब पहुंचने का समय आया तभी बताया गया कि कैश खत्म हो गया। उन्हें गेहूं की बुवाई करनी है। यहीं पर अपने बैंक खाते से रुपये निकालने के लिए लाइन में खड़े रामकुमार यादव ने बताया कि हजार व पांच सौ रुपये के जो नोट थे उसे बैंक खाते में जमा कर दिया। अब जेब में फूटी कौड़ी भी नहीं है। मंगलवार को वह दूसरे दिन बैंक में लाइन लगाए तो भी पैसा नहीं मिला।
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सोमवार की रात से ही घना कोहरा छा गया था। ठंड भी बढ़ गई थी।
बावजूद इसके अपनी जरूरतों को पूरा करने की गरज से लोग सुबह पांच बजे से ही आकर लाइन में खड़े हो गए थे। यूबीआई की नौपेड़वा और धनियामऊ शाखा के बाहर तो लोग अलाव जलाकर ताप रहे थे। बैंक खुला तो लोगों को दो दो हजार रुपये का भुगतान शुरू किया गया। लाइन में करीब 60 से 70 लोग बचे थे तभी बैंक का खजाना खाली हो गया।
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लोगों को मायूस लौटना पड़ा। हलांकि लाइन में खड़े लोगों को बैंक की ओर से टोकन दिया गया। इससे उन्हें अगले दिन प्राथमिकता के आधार पर भुगतान किया जा सकेगा।
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एसबीआई की नौपेड़वा शाखा से रुपये निकालने आए पंधारी यादव ने बताया कि तीन घंटे तक लाइन में खड़ा रहा। जब काउंटर के करीब पहुंचने का समय आया तभी बताया गया कि कैश खत्म हो गया। उन्हें गेहूं की बुवाई करनी है। यहीं पर अपने बैंक खाते से रुपये निकालने के लिए लाइन में खड़े रामकुमार यादव ने बताया कि हजार व पांच सौ रुपये के जो नोट थे उसे बैंक खाते में जमा कर दिया। अब जेब में फूटी कौड़ी भी नहीं है। मंगलवार को वह दूसरे दिन बैंक में लाइन लगाए तो भी पैसा नहीं मिला।