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विश्व रिकाॅर्ड बनाकर हनी ने भाला फेंक में जीता गोल्ड, बहन बोलीं-पहले से था जीत का भरोसा
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10 गांव गोरिया में हनी के परिजन जीत का चिन्ह दिखाते हुए। परिजन
- फोटो : Samvad
रोहतक। जापान में आयोजित पैरा एशियाड में हनी ने दूसरा पदक विश्व रिकॉर्ड के साथ जीता। उन्होंने 60.49 मीटर का भाला फेंक कर गोल्ड हासिल किया। इस मौके पर झज्जर जिले के गोरिया गांव स्थित उनके घर पर जश्न मनाया गया। बहन युक्ता बोलीं-पदक आने का पहले से भरोसा था।
सुबह करीब आठ बजे घर में टेलीविजन पर हनी के खेल का प्रसारण चल रहा था। पूरा कुनबा टीवी के आगे बैठकर पदक का इंतजार कर रहा था। बहन युक्ता ने बताया कि हनी ने जब पहला थ्रो फेंका तो वह करीब 50 मीटर तक गया। दूसरा थ्रो कुछ खास दूर नहीं जा सका।
उस समय थोड़ी चिंता हुई लेकिन विश्वास था कि पदक तो आ ही जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि पहले भी कई बार होता रहा है कि हनी ने कुछ खराब थ्रो के बाद अपना बेस्ट थ्रो देकर मेडल जीता।
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इस बार भी ऐसा ही हुआ। हनी ने अपने पांचवें थ्रो में चीन के एक एथलीट का 57.81 मीटर का रिकॉर्ड तोड़ दिया। मेडल पक्का होते ही परिजन खुशी से झूम उठे और घर में मिठाई बांटी। अब वे 26 अक्तूबर को हनी के गांव आने पर स्वागत करेंगे। हनी मूल रूप से झज्जर के रहने वाले हैं। लंबे समय से जिले के राजीव गांधी खेल परिसर में अभ्यास करते हैं।
दो दिन पहले डिस्कस थ्रो जीता था कांस्य पदक
हनी ने इसी पैरा एशियाड में 21 अक्तूबर को डिस्कस थ्रो में भी कांस्य पदक जीता था। कोच सुनील फोगाट ने कहा कि यह हनी की ही नहीं बल्कि पूरे देश की उपलब्धि है। हनी की मेहनत और देशवासियों की दुआएं दोनों रंग लाई हैं। अब कोशिश यह रहेगी कि इस रिकॉर्ड को आगामी ओलंपिक में और भी अच्छा किया जाए।
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सुबह करीब आठ बजे घर में टेलीविजन पर हनी के खेल का प्रसारण चल रहा था। पूरा कुनबा टीवी के आगे बैठकर पदक का इंतजार कर रहा था। बहन युक्ता ने बताया कि हनी ने जब पहला थ्रो फेंका तो वह करीब 50 मीटर तक गया। दूसरा थ्रो कुछ खास दूर नहीं जा सका।
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उस समय थोड़ी चिंता हुई लेकिन विश्वास था कि पदक तो आ ही जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि पहले भी कई बार होता रहा है कि हनी ने कुछ खराब थ्रो के बाद अपना बेस्ट थ्रो देकर मेडल जीता।
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इस बार भी ऐसा ही हुआ। हनी ने अपने पांचवें थ्रो में चीन के एक एथलीट का 57.81 मीटर का रिकॉर्ड तोड़ दिया। मेडल पक्का होते ही परिजन खुशी से झूम उठे और घर में मिठाई बांटी। अब वे 26 अक्तूबर को हनी के गांव आने पर स्वागत करेंगे। हनी मूल रूप से झज्जर के रहने वाले हैं। लंबे समय से जिले के राजीव गांधी खेल परिसर में अभ्यास करते हैं।
दो दिन पहले डिस्कस थ्रो जीता था कांस्य पदक
हनी ने इसी पैरा एशियाड में 21 अक्तूबर को डिस्कस थ्रो में भी कांस्य पदक जीता था। कोच सुनील फोगाट ने कहा कि यह हनी की ही नहीं बल्कि पूरे देश की उपलब्धि है। हनी की मेहनत और देशवासियों की दुआएं दोनों रंग लाई हैं। अब कोशिश यह रहेगी कि इस रिकॉर्ड को आगामी ओलंपिक में और भी अच्छा किया जाए।