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ढोल-नगाड़ों के साथ गांव पहुंचीं स्वर्ण पदक विजेता ज्योति रमावत
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-फोटो 82 : गांव कुलासी में पहुंचने पर एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक विजेता ज्योति रमावत का स्वागत
बहादुरगढ़। एशियन गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम के साथ स्वर्ण पदक जीतने वाली ज्योति रमावत का वीरवार को पैतृक गांव कुलासी में जोरदार स्वागत किया। गांव के बस अड्डे पर पहुंचते ही परिजनों और ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों बजाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद गाड़ी में बैठाकर पूरे गांव में सम्मान यात्रा निकाली गई।
रास्ते में जगह-जगह ग्रामीणों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने फूल बरसाकर गांव की बेटी का अभिनंदन किया। ज्योति का फूलों और नोटों की मालाओं से स्वागत किया गया। गांव के सामुदायिक भवन में ज्योति के सम्मान में समारोह आयोजित किया गया।
दरअसल, ज्योति का परिवार करीब 35 साल पहले कुलासी गांव से सोनीपत चला गया था। इसके बावजूद गांव से उनका जुड़ाव बना रहा। उनकी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर गांव के लोगों में खुशी का माहौल है।
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ज्योति के गांव पहुंचने पर कानोंदा मोड़ पर ढोल-नगाड़ों के साथ गाड़ी में वाटिका तक लाया गया। समारोह में सरपंच प्रतिनिधि हवा सिंह उर्फ पप्पू, बलवान स्वामी, भगवान स्वामी, मनजीत स्वामी, धर्मपाल, दिनेश, मुकेश, रवि खत्री, जगजीत सहित ग्रामीण मौजूद रहे।
2019 में सीनियर भारतीय टीम में किया था पदार्पण
ज्योति रमावत ने भारतीय महिला हॉकी टीम में अपनी मेहनत और शानदार खेल के दम पर अलग पहचान बनाई है। वह टीम में डिफेंडर के रूप में खेलती रही है। वर्ष 2019 में उन्होंने सीनियर भारतीय टीम में पदार्पण किया था। इसके बाद उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पदक जीते हैं।
संघर्षों भरा रहा है जीवन
ज्योति ने बताया कि उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उनके पिता नरेंद्र सिंह का एक दुर्घटना में निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां ने परिवार चलाने के साथ बेटी की पढ़ाई और खेल का खर्च उठाने के लिए काफी संघर्ष किया। ज्योति की प्रतिभा को पूर्व भारतीय कप्तान और द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच प्रीतम रानी सिवाच ने पहचाना। उन्होंने ज्योति की फीस और हॉकी प्रशिक्षण का खर्च उठाकर उन्हें आगे बढ़ने में मदद की।
एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भी जीत चुकी हैं स्वर्ण
ज्योति ने एशियन चैंपियंस ट्रॉफी, एशिया कप, कॉमनवेल्थ गेम्स और हॉकी नेशन्स कप समेत कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। वर्ष 2026 में एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतना उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। इसके अलावा 2023 और 2024 में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीता।
सफलता का श्रेय परिजनों और कोच को दिया
ज्योति ने अपने सम्मान पर ग्रामीणों का आभार जताया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिजनों और अपने कोच को दिया। ज्योति ने कहा कि देश के लिए पदक जीतना उनके लिए गर्व की बात है। भविष्य में होने वाली प्रतियोगिताओं में भी वह इसी तरह बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करेंगी और देश के लिए अधिक से अधिक पदक जीतना उनका लक्ष्य रहेगा।
नेताओं ने नोटों और गदा भेंट कर किया स्वागत
ज्योति का स्वागत करने वालों में विधायक राजेश जून ने 21 हजार, पूर्व विधायक नरेश कौशिक ने गदा भेंट की। वहीं जिला पार्षद एवं भाजपा जिला महामंत्री रविंद्र छिल्लर बराही ने 11 हजार के नोटों की माला पहनाकर स्वागत किया।
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रास्ते में जगह-जगह ग्रामीणों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने फूल बरसाकर गांव की बेटी का अभिनंदन किया। ज्योति का फूलों और नोटों की मालाओं से स्वागत किया गया। गांव के सामुदायिक भवन में ज्योति के सम्मान में समारोह आयोजित किया गया।
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दरअसल, ज्योति का परिवार करीब 35 साल पहले कुलासी गांव से सोनीपत चला गया था। इसके बावजूद गांव से उनका जुड़ाव बना रहा। उनकी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर गांव के लोगों में खुशी का माहौल है।
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ज्योति के गांव पहुंचने पर कानोंदा मोड़ पर ढोल-नगाड़ों के साथ गाड़ी में वाटिका तक लाया गया। समारोह में सरपंच प्रतिनिधि हवा सिंह उर्फ पप्पू, बलवान स्वामी, भगवान स्वामी, मनजीत स्वामी, धर्मपाल, दिनेश, मुकेश, रवि खत्री, जगजीत सहित ग्रामीण मौजूद रहे।
2019 में सीनियर भारतीय टीम में किया था पदार्पण
ज्योति रमावत ने भारतीय महिला हॉकी टीम में अपनी मेहनत और शानदार खेल के दम पर अलग पहचान बनाई है। वह टीम में डिफेंडर के रूप में खेलती रही है। वर्ष 2019 में उन्होंने सीनियर भारतीय टीम में पदार्पण किया था। इसके बाद उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पदक जीते हैं।
संघर्षों भरा रहा है जीवन
ज्योति ने बताया कि उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उनके पिता नरेंद्र सिंह का एक दुर्घटना में निधन हो गया था। इसके बाद उनकी मां ने परिवार चलाने के साथ बेटी की पढ़ाई और खेल का खर्च उठाने के लिए काफी संघर्ष किया। ज्योति की प्रतिभा को पूर्व भारतीय कप्तान और द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच प्रीतम रानी सिवाच ने पहचाना। उन्होंने ज्योति की फीस और हॉकी प्रशिक्षण का खर्च उठाकर उन्हें आगे बढ़ने में मदद की।
एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भी जीत चुकी हैं स्वर्ण
ज्योति ने एशियन चैंपियंस ट्रॉफी, एशिया कप, कॉमनवेल्थ गेम्स और हॉकी नेशन्स कप समेत कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। वर्ष 2026 में एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतना उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। इसके अलावा 2023 और 2024 में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीता।
सफलता का श्रेय परिजनों और कोच को दिया
ज्योति ने अपने सम्मान पर ग्रामीणों का आभार जताया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिजनों और अपने कोच को दिया। ज्योति ने कहा कि देश के लिए पदक जीतना उनके लिए गर्व की बात है। भविष्य में होने वाली प्रतियोगिताओं में भी वह इसी तरह बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करेंगी और देश के लिए अधिक से अधिक पदक जीतना उनका लक्ष्य रहेगा।
नेताओं ने नोटों और गदा भेंट कर किया स्वागत
ज्योति का स्वागत करने वालों में विधायक राजेश जून ने 21 हजार, पूर्व विधायक नरेश कौशिक ने गदा भेंट की। वहीं जिला पार्षद एवं भाजपा जिला महामंत्री रविंद्र छिल्लर बराही ने 11 हजार के नोटों की माला पहनाकर स्वागत किया।

-फोटो 82 : गांव कुलासी में पहुंचने पर एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक विजेता ज्योति रमावत का स्वागत

-फोटो 82 : गांव कुलासी में पहुंचने पर एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक विजेता ज्योति रमावत का स्वागत