{"_id":"5911f7994f1c1b1157851546","slug":"gachadaar-nepal-s-vice-primeminister","type":"story","status":"publish","title_hn":"गच्छदार बने नेपाल के उपप्रधानमंत्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गच्छदार बने नेपाल के उपप्रधानमंत्री
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
Updated Tue, 09 May 2017 10:38 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेपाल का राजनीतिक रंग पल-पल बदलता नजर आ रहा है। सरकार चलाने को जोड़-तोड़ का फार्मूला भी अपनाया जा रहा है। बीते दिवस नेपाल सरकार ने नेपाल लोकतांत्रिक फोरम के विजय कुमार गच्छदार को सरकार में शामिल कर उपप्रधानमंत्री समेत कई महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंप दिए हैं। राष्ट्रपति विद्या भंडारी ने उन्हें शपथ भी दिलाई।
नेपाल में ओली सरकार के गिरने के बाद पिछले वर्ष सितंबर में नेपाल कांग्रेस, माओवादी केंद्र और मधेशी मोर्चा ने सरकार का गठन किया था। सहमति के आधार पर पुष्प दहल कमल उर्फ प्रचंड को प्रधानमंत्री बनाया गया। तय किया गया था कि नौ माह प्रचंड और नौ माह कांग्रेस के शेर बहादुर देऊबा सरकार चलाएंगे। इधर, ज्येष्ठ माह (15 मई के बाद से) को सरकार का पहला सत्र (वर्तमान प्रचंड नेतृत्व वाली सरकार का) समय पूरा होने जा रहा है।
इसके बाद दूसरा सत्र कांग्रेस को चलाना है, लेकिन इस बीच प्रचंड नेतृत्व वाली नेपाल सरकार पर संख्या बल का संकट भी मंडराने लगा। संविधान संशोधन को लेकर मधेशी मोर्चा ने वर्तमान सरकार से समर्थन वापस ले लिया। सरकार ने राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) गठबंधन को सरकार में शामिल कराने को मनाकर कमल थापा को उपप्रधानमंत्री बना दिया, लेकिन नेपाल की सुप्रीम कोर्ट की प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की के खिलाफ लाए गए महाभियोग पर राप्रपा ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया।
विज्ञापन
अल्पमत के नजदीक पहुंचने के आसार बनने से पूर्व ही सरकार ने नेपाल लोकतांत्रिक फोरम के विजय कुमार गच्छदार को सरकार में शामिल कराने को मना लिया। उन्हें उपप्रधानमंत्री, स्थानीय विकास मंत्रालय, संघीय मामला मंत्रा
लय का मंत्री पद सौंप दिया। इसके बाद यह सरकार अल्पमत में आने से बच गई। अब सरकार के दूसरे सत्र यानी कांग्रेस नेतृत्व को भी गच्छदार समर्थन देते रहेंगे। इसी दल के जितेंद्र देव को भी संस्कृति, पर्यटन, नागरिक उड्डयन मंत्रालय सौंपा गया है। बीते दिवस सोमवार को उन्हें शपथ भी दिला दी गई है।
विज्ञापन
नेपाल में ओली सरकार के गिरने के बाद पिछले वर्ष सितंबर में नेपाल कांग्रेस, माओवादी केंद्र और मधेशी मोर्चा ने सरकार का गठन किया था। सहमति के आधार पर पुष्प दहल कमल उर्फ प्रचंड को प्रधानमंत्री बनाया गया। तय किया गया था कि नौ माह प्रचंड और नौ माह कांग्रेस के शेर बहादुर देऊबा सरकार चलाएंगे। इधर, ज्येष्ठ माह (15 मई के बाद से) को सरकार का पहला सत्र (वर्तमान प्रचंड नेतृत्व वाली सरकार का) समय पूरा होने जा रहा है।
विज्ञापन
इसके बाद दूसरा सत्र कांग्रेस को चलाना है, लेकिन इस बीच प्रचंड नेतृत्व वाली नेपाल सरकार पर संख्या बल का संकट भी मंडराने लगा। संविधान संशोधन को लेकर मधेशी मोर्चा ने वर्तमान सरकार से समर्थन वापस ले लिया। सरकार ने राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) गठबंधन को सरकार में शामिल कराने को मनाकर कमल थापा को उपप्रधानमंत्री बना दिया, लेकिन नेपाल की सुप्रीम कोर्ट की प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की के खिलाफ लाए गए महाभियोग पर राप्रपा ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया।
विज्ञापन
अल्पमत के नजदीक पहुंचने के आसार बनने से पूर्व ही सरकार ने नेपाल लोकतांत्रिक फोरम के विजय कुमार गच्छदार को सरकार में शामिल कराने को मना लिया। उन्हें उपप्रधानमंत्री, स्थानीय विकास मंत्रालय, संघीय मामला मंत्रा
लय का मंत्री पद सौंप दिया। इसके बाद यह सरकार अल्पमत में आने से बच गई। अब सरकार के दूसरे सत्र यानी कांग्रेस नेतृत्व को भी गच्छदार समर्थन देते रहेंगे। इसी दल के जितेंद्र देव को भी संस्कृति, पर्यटन, नागरिक उड्डयन मंत्रालय सौंपा गया है। बीते दिवस सोमवार को उन्हें शपथ भी दिला दी गई है।