{"_id":"5a22d89b4f1c1b8e698bf6e2","slug":"eid-miladunnabi","type":"story","status":"publish","title_hn":"ईद मिलादुन्नबी पर निकाला जुलूस-ए-मोहम्मदी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ईद मिलादुन्नबी पर निकाला जुलूस-ए-मोहम्मदी
अमर उजाला ब्यूरो/औरैया
Updated Sat, 02 Dec 2017 10:15 PM IST
विज्ञापन
जुलूस
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हजरत मोहम्मद साहब के यौमे पैदाइश पर ईद मिलादुन्नबी हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया। जुलूस ए मोहम्मदी निकाला गया। वहीं, देर शाम को मगरिब के बाद रोशनी से पूरा शहर नहा गया।
शहर में निकले जुलूस के चलते यातायात पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी। यातायात सुगम बनाए रखने के लिए कई बार रूट डायवर्जन करना पड़ा। जुलूस के दौरान शहर की बिजली आपूर्ति भी ठप रही। पैगंबर साहब के यौमेपैदाइश को लेकर सुबह से मुस्लिम बस्तियों में रौनक दिखाई पड़ी। जमालशाह, तकिया, पक्का तालाब, खिड़की साहबराय, पक्का तालाब पर लोग एकत्रित हुए। यहां से अलग-अलग जुलूस के रूप में संजय गेट पहुंचे। जुलूस बड़े-बड़े झंडे व डीजे साथ चल रहे थे। जुलूस सदर बाजार, तहसील रोड, सुभाष चौक होता हुआ जमालशाह में समाप्त हुआ।
समाजसेवी राजू खान, रशीद अली आदि ने जुलूस में चल रहे लोगों को पानी व छोटे-छोटे बच्चों को चाकलेट व टाफी दिया। संजय गेट, सुभाष चौक पर जुलूस की स्थिति के हिसाब से कई बार रूट डायवर्जन भी करना पड़ा। इससे राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ी।
विज्ञापन
फफूंद प्रतिनिधि के अनुसार, शनिवार को ईद मिलादन्नबी का जुलूस सुबह आठ बजे आस्ताना आलिया समादिया मिसबहिया से उठकर मोहल्ला भराव, मोतीपुर, जुबैरी, केशरवानी, मेवातीयान गोविंदगंज, चमनगंज तिराह बाजार होमगंज, मुख्य बाजार से होता हुआ आस्ताना आलिया पर दोपहर 1:30 बजे पहुंच कर समाप्त हुआ। जुलूस का नेतृत्व आस्ताना आलिया समादिया के सज्जादा नशीं हजरत सैय्यद मोहम्मद अख्तर चिश्ती ने किया। संचालन हजरत सैय्यद मुजफ्फर मियां चिश्ती व हजरत सैय्यद गिजाली मियां चिश्ती ने किया।
जुलूस-ए-मोहम्मदी ईद मिलाद उन नबी हुजूर का दामन नहीं छोड़ेंगे के नारे लग रहे थे। जुलूस को रोक रोक कर नाते पढ़ी जा रही थी। जुलूस के रास्ते में हजरत सैय्यद अख्तर चिश्ती को सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम भाइयों व कस्वे के हिंदू भाई डा. कपिल गुप्ता ,भोले पोरवाल ,थानाध्यक्ष अनिल कुमार पांडेय सहित कस्बे के व्यापारियों ने उनका माल्यार्पण कर पान इलायची गरी व नजर पेश करके स्वागत किया। जुलूस में सम्मिलित मुस्लिम भाई आस्ताना आलिया में पहुंचे जहां पर परचम कुशाई हुई। लोगों को तबरुक बांटा गया। शाम को मगरिब के बाद रोशनी की गई, जिससे पूरा नगर रोशनी से नहा गया ।
विज्ञापन
शहर में निकले जुलूस के चलते यातायात पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी। यातायात सुगम बनाए रखने के लिए कई बार रूट डायवर्जन करना पड़ा। जुलूस के दौरान शहर की बिजली आपूर्ति भी ठप रही। पैगंबर साहब के यौमेपैदाइश को लेकर सुबह से मुस्लिम बस्तियों में रौनक दिखाई पड़ी। जमालशाह, तकिया, पक्का तालाब, खिड़की साहबराय, पक्का तालाब पर लोग एकत्रित हुए। यहां से अलग-अलग जुलूस के रूप में संजय गेट पहुंचे। जुलूस बड़े-बड़े झंडे व डीजे साथ चल रहे थे। जुलूस सदर बाजार, तहसील रोड, सुभाष चौक होता हुआ जमालशाह में समाप्त हुआ।
विज्ञापन
समाजसेवी राजू खान, रशीद अली आदि ने जुलूस में चल रहे लोगों को पानी व छोटे-छोटे बच्चों को चाकलेट व टाफी दिया। संजय गेट, सुभाष चौक पर जुलूस की स्थिति के हिसाब से कई बार रूट डायवर्जन भी करना पड़ा। इससे राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ी।
विज्ञापन
फफूंद प्रतिनिधि के अनुसार, शनिवार को ईद मिलादन्नबी का जुलूस सुबह आठ बजे आस्ताना आलिया समादिया मिसबहिया से उठकर मोहल्ला भराव, मोतीपुर, जुबैरी, केशरवानी, मेवातीयान गोविंदगंज, चमनगंज तिराह बाजार होमगंज, मुख्य बाजार से होता हुआ आस्ताना आलिया पर दोपहर 1:30 बजे पहुंच कर समाप्त हुआ। जुलूस का नेतृत्व आस्ताना आलिया समादिया के सज्जादा नशीं हजरत सैय्यद मोहम्मद अख्तर चिश्ती ने किया। संचालन हजरत सैय्यद मुजफ्फर मियां चिश्ती व हजरत सैय्यद गिजाली मियां चिश्ती ने किया।
जुलूस-ए-मोहम्मदी ईद मिलाद उन नबी हुजूर का दामन नहीं छोड़ेंगे के नारे लग रहे थे। जुलूस को रोक रोक कर नाते पढ़ी जा रही थी। जुलूस के रास्ते में हजरत सैय्यद अख्तर चिश्ती को सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम भाइयों व कस्वे के हिंदू भाई डा. कपिल गुप्ता ,भोले पोरवाल ,थानाध्यक्ष अनिल कुमार पांडेय सहित कस्बे के व्यापारियों ने उनका माल्यार्पण कर पान इलायची गरी व नजर पेश करके स्वागत किया। जुलूस में सम्मिलित मुस्लिम भाई आस्ताना आलिया में पहुंचे जहां पर परचम कुशाई हुई। लोगों को तबरुक बांटा गया। शाम को मगरिब के बाद रोशनी की गई, जिससे पूरा नगर रोशनी से नहा गया ।