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पहले चंदे से कराई इलाज, अब प्राचार्य से गुहार
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Sat, 03 Dec 2016 01:44 AM IST
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इंद्रकला।
नोटबंदी की वजह से एक महिला पति के इलाज के लिए भटक रही है। मेडिकल कॉलेज मेें भर्ती पति के इलाज के लिए फुटकर रकम न होने पर महिला ने गांव वालों से दो हजार रुपये चंदे के रूप में जुटाए। अब वह भी खत्म हो गए तो शुक्रवार को महिला प्राचार्य के पास गुहार लेकर पहुंची, जिसके बाद कुछ दवाएं तो मिल गईं, मगर बाकी दवाओं के लिए अभी वह परेशान है।
गोला बाजार के रहने वाले रवि प्रकाश टीबी से पीड़ित हैं। चार दिन पहले उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई, जिसके बाद पत्नी इंद्रकला उन्हें मेडिकल कॉलेज ले आई और पुरुष मेडिसिन वार्ड में भर्ती कराया। मेडिकल कॉलेज में कुछ दवाएं न मिलने पर उन्हें बाहर से खरीदनी पड़ी। ऐसे में छोटे नोटों की कमी ने समस्या खड़ी कर दी। पहले तो इंद्रकला ने गांव वालों से मदद मांगी तो तीन लोगों ने दो हजार रुपये उन्हें दिए। इससे अब तक का खर्च तो चल गया, मगर अब उनके पास न तो कैंटीन में खाने के रुपये हैं और न ही दवा के लिए। परेशान होकर शुक्रवार को वह प्राचार्य के पास पहुंचीं, मगर अस्पताल में दवाएं न होने की वजह से वह भी उनकी ज्यादा मदद नहीं कर पाए।
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गोला बाजार के रहने वाले रवि प्रकाश टीबी से पीड़ित हैं। चार दिन पहले उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई, जिसके बाद पत्नी इंद्रकला उन्हें मेडिकल कॉलेज ले आई और पुरुष मेडिसिन वार्ड में भर्ती कराया। मेडिकल कॉलेज में कुछ दवाएं न मिलने पर उन्हें बाहर से खरीदनी पड़ी। ऐसे में छोटे नोटों की कमी ने समस्या खड़ी कर दी। पहले तो इंद्रकला ने गांव वालों से मदद मांगी तो तीन लोगों ने दो हजार रुपये उन्हें दिए। इससे अब तक का खर्च तो चल गया, मगर अब उनके पास न तो कैंटीन में खाने के रुपये हैं और न ही दवा के लिए। परेशान होकर शुक्रवार को वह प्राचार्य के पास पहुंचीं, मगर अस्पताल में दवाएं न होने की वजह से वह भी उनकी ज्यादा मदद नहीं कर पाए।
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