घोड़े पर सियासत गर्म, सदन से लेकर सड़क तक हंगामा
- शून्यकाल के दौरान जमकर हंगामा।
- माफी मांगने की बात पर अड़ी कांग्रेस।
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सदन से लेकर सड़क तक मंगलवार को पुलिस के घायल घोड़े ‘शक्तिमान’ का मु्ददा ही छाया रहा। विधानसभा में शून्यकाल के दौरान इस मामले में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था की दुहाई देते हुए बहस को विधायक गणेश जोशी द्वारा घोड़े ‘शक्तिमान’ को घायल करने की तरफ मोड़ने का प्रयास किया।
विपक्ष भाजपा की रैली में कार्यकर्ताओं पर घोड़े चढ़ाने के लिए सरकार से माफी मांगने पर डटा रहा, वहीं सत्ता पक्ष शक्तिमान को बर्बरता से पीटने और घायल करने के लिए माफी मांगने की बात पर अड़ गया। हंगामा शांत नहीं होने पर विधानसभा अध्यक्ष ने दो बार सदन को स्थगित किया। उधर, कांग्रेस ने मुद्दे को हवा देने के लिए एस्लेहाल चौक पर विधायक गणेश जोशी का पुतला फूंका और गिरफ्तारी की मांग की।
दोपहर 12.20 बजे शून्यकाल शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने सदन में दी जानी वाली सूचनाओं को शामिल नहीं किए जाने पर आपत्ति जताई। विपक्ष कानून व्यवस्था के मुद्दे पर भाजपा की रैली में पुलिस की कार्यवाही को नियम 310 में उठाना चाहता था, लेकिन संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश ने सुबह नौ से साढ़े नौ बजे तक सूचनाएं मिलने पर ही उसे ग्रहीत करने की व्यवस्था पर विपक्ष का ध्यानाकर्षित किया।
हमारे कार्यकर्ताओं पर दौड़ाए गए घोड़े: अजय भट्ट
अजय भट्ट ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था का हाल अंग्रेजों के जमाने जैसा हो गया है। अमानवीय तरीके से भाजपा की रैली में कार्यकर्ताओं पर घोड़े दौड़ाए गए। भाजपा कार्यकर्ता जितेंद्र रावत मौनी घोड़े का खुर सिर पर लगने से आईसीयू में भर्ती हैं और उसके एक हिस्से को लकवा मार गया है।
इस बीच, विधायक गणेश जोशी सदन में सीडी लेकर पहुंचे, जिसमें भाजपा रैली के दौरान घुड़सवार पुलिस और घोड़े के घायल होने की घटना कैद थी। नेता प्रतिपक्ष ने तुरंत विधायक जोशी के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करवाने की बात कही। इस पर इंदिरा हृदयेश ने कहा कि यह वीडियो पूरे देश में वायरल है। आपको इसे स्वीकार करना चाहिए और इसके लिए क्षमा मांगनी चाहिए। इस पर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया।
सभी विधायक वेल में आने को उठ खड़े हुए, लेकिन नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हम हंगामा कर सदन छोड़कर नहीं जाएंगे। इंदिरा चाहती हैं कि हम हाउस से वॉकआउट करें, लेकिन ऐसा नहीं होगा।
इस बीच फिर इंदिरा और समूचे विपक्ष की नोकझोंक शुरू हो गई। इंदिरा ने अकेले मोर्चा संभाले रखा। 20 मिनट तक पक्ष-विपक्ष में चली बहस और हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने एक बजे तक सदन स्थगित कर दिया। एक बजे दोबारा सदन जुटा तो अध्यक्ष ने कार्यवाही शुरू होने से पहले तीन बजे तक हाउस को स्थगित करने का आदेश दिया।