टिहरी झील में बंद हुई यह सेवा, लोगों को उठानी पड़ेगी परेशानी
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टिहरी झील का जल स्तर कम होने के चलते फिलहाल यहां गांव वालों को दी जाने वाली यह सेवा बंद कर दी गई है। झील से आर-पार जाने के लिए एक मात्र साधन छाम-बल्डोगी के बीच संचालित होने वाली बोट सेवा बंद होने से गुसाईं पट्टी और बिचलीगमरी पट्टी के दर्जनों गांव के लोगों को अपने नाते-रिश्तेदारी में जाने के लिए अब 44 किमी का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ेगा। इससे समय के साथ ही ग्रामीणों के धन की बर्बादी भी होगी।
2006 में छामतलसौड़ में बना पुल टिहरी झील में समा गया था। तब से उत्तरकाशी जिले के बिचलीगमरी पट्टी के दर्जनों गांवों और टिहरी के गुसाईं पट्टी के गांवों के बीच झील से आर-पार जाने के लिए एक मात्र साधन बोट (नाव) है।
इन दिनों झील का जल स्तर घटकर आरएल 760.55 मीटर पहुंच गया है। पानी कम होने से झील के किनारे जगह-जगह रेत के ढेर जमा हो गए है। बोट तक पहुंचने के रास्ते में दल-दल की समस्या उत्पन्न हो गई है।
दल-दल को देखते हुए पुनर्वास विभाग ने मंगलवार शाम से झील में बोट का संचालन पूरी तरह से बंद कर दिया है, जिससे बिचलीगमरी पट्टी के दर्जनों गांवों और टिहरी के गुसाईं पट्टी के गांव के लोगों को अपने नाते-रिश्तेदारी में जाने के लिए धरासू, चिन्यालीसौड़ सड़क मार्ग से 44 किमी का अतिरिक्त सफर तय करने पड़ेगा। अब तक नाव से यह सफर महज 10 से 15 मिनट में पूरा होता था।
इन गांवों के बीच बढ़ गई दूरी
स्थानीय निवासी जीत सिंह, असाड़ सिंह, तारादत्त थपलियाल व उत्तम सिंह का कहना है कि 2006 के बाद प्रदेश में 2007 में भाजपा और 2012 में कांग्रेस की सरकारें सत्ता में आई है, लेकिन दोनों सरकारों ने छामतलसौड़ में झूला पुल निर्माण की स्थानीय लोगों की मांग पर गौर नहीं किया। अब राज्य में डबल इंजन सरकार बनने से समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है।
बोट सेवा बंद होने से इन गांवों के बीच बढ़ गई दूरी
गुसाईं पट्टी के धरवाल गांव, सुनारगांव, कंडीसौड़, जसपुर, पदोगी, रमोलसारी, धरोगी, कौशल और इडियान बिचलीगमरी पट्टी के बल्डोगी, कुमराड़ा, मुडरसेरा, खालसी, मणि, बरोल, वनकोट, जोगत, क्यारी, सर्फ।
इनका क्या है कहना
झील का जल स्तर कम होने से छाम-बल्डोगी में चलने वाली बोट सेवा बंद कर दी गई है। आगामी जुलाई-अगस्त माह में जब जल स्तर बढ़ेगा तो फिर से बोट की सेवा शुरू कर दी जाएगी।
-शरद श्रीवास्तव, ईई पुनर्वास विभाग टिहरी