मणिपुर में नाकेबंदी बना मुख्य चुनावी मुद्दा, बीजेपी के निशाने पर कांग्रेस
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मणिपुर में 1 नवंबर से नाकाबंदी कर रहे नागा समूह के लोगों को कल 100 दिन पूरे होने जा रहे हैं। इसके साथ ही ये मुद्दा मणिपुर में होने वाले विधानसभा चुनावों में सबसे चुनौतीपूर्ण मुद्दे के रुप में देखा जा रहा है। इस नाकाबंदी के कारण मणिपुर में लोगों को खाने-पीने सहित कई अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विधानसभा चुनावों को मद्देनजर रखते हुए केन्द्र ने आज नाकाबंदी के दो मास्टरमाइंड को बातचीत के लिए बुलाया है। बता दें कि ये मास्टरमाइंड नाकाबंदी के चलते जेल में थे।
उल्लेखनीय है कि मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकराम ईबोबी सिंह ने मणिपुर में 7 नए जिले बनाए थे, जिससे वहां के लोगों को महंगाई और कई अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। इसके विरोध में ही 1 नवंबर से नागा समूह के लोगों ने वहां नाकाबंदी शुरु कर दी थी।
शुक्रवार को केन्द्र सरकार ने कोर्ट से अनुमति लेते हुए गाएदोन कामेई और स्टीफन शैंक्रिल को बातचीत में मामला सुलझाने के लिए दिल्ली बुलाया है। ये दोनों यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) के शीर्ष नेताओं में से है। इससे पहले भी 7 फरवरी को इस मामले पर बातचीत हुई थी लेकिन कोई हल नहीं निकल सका था।
गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने बताया कि हमारे अधिकारियों का जनादेश स्पष्ट है और हमें किसी भी तरह से हम इस संकट का समाधान खोजने की जरूरत है जिसके लिए बातचीत का आयोजन किया जा रहा है। नाकाबंदी बीजेपी के लिए सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है। इसलिए विधानसभा चुनावों को देखते हुए ये चुनावों से पहले इसका हल चाहती है।
पिछले साल असम में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने जीत हासिल की थी और अब इस पार्टी की निगाहें मणिपुर में सरकार बनाने पर टिकी हैं। पिछले 6 महीनों में राज्य में शासित कांग्रेस के एक दर्जन नेताओं ने भाजपा में शामिल हो गए।
मणिपुर में बीजेपी के चुनाव प्रचार के दौरान केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए नाकाबंदी का जिम्मेदार मुख्यमंत्री ओकराम ईबोबी सिंह को बताया और राज्य की सत्ता दोबारा उनके हाथों में ना देने की अपील की।