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बिजनौर में दीवार गिरी, मलबे में दबकर पांच लोगों की मौत, 15 घायल
टीम डिजिटल
Updated Mon, 10 Oct 2016 11:25 PM IST
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बिजनौर में दीवार गिरी
- फोटो : अमर उजाला
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शुगर मिल के डिस्टलरी प्लांट में सोमवार की रात निर्माण के दौरान दीवार भरभराकर गिरने से मलबे में दबकर पांच श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि 15 मजदूर घायल हो गए। छह मजदूरों को सीएचसी में भर्ती कराया गया है। आठ मजदूरों को मुरादाबाद रेफर कर दिया गया है जहां तीन मजदूरों की हालत गंभीर बताई जा रही है। मलबे में कुछ और लोग दबे हो सकते हैं।
जिलाधिकारी जगतराज त्रिपाठी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने मृतकों के आश्रित को दो दो लाख रुपये और घायलों के परिजनों को पचास पचास हजार रुपये देने की घोषणा की है। स्योहारा शुगर मिल के डिस्टलरी प्लांट में अंडरग्राउंड टैंक बनाने के लिए सीमेंट कंक्रीट से बेसमेंट बनाया जा रहा था। 30 मीटर चौड़े और 50 मीटर लंबे गड्ढे में ही 12 फीट ऊंची दीवार खड़ी थी। करीब 24 मजदूर गड्ढे में बेसमेंट बनाने के काम में लगे थे।
सोमवार रात करीब आठ बजे गड्ढे में खड़ी दीवार भरभराकर गिर गई और कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए। दीवार गिरते ही बाकी मजदूरों ने शोर मचा दिया। डिस्टलरी के कर्मचारी, पुलिस व आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंच गए। इन लोगों ने मजदूरों को निकालने का काम शुरू कर दिया। कई मजदूरों को घायलावस्था में बाहर निकाला और मुरादाबाद भेजवाया। चार मजदूरों को मुरादाबाद के कास्मास अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया। जिलाधिकारी जगतराज त्रिपाठी ने श्रमिक ओमप्रकाश, रामौतार सिंह, संजीव और मुनेश के मरने की पुष्टि की है। इसके अलावा छोटे को साई अस्पताल में ब्राट डेड लाया गया।
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साईं अस्पताल में ही राजू पुत्र सोनार का इलाज चल रहा है। कास्मास अस्पताल में संजय पुत्र नरेंद्र (मुकरपुरी थाना स्योहारा) और बबलू पुत्र छुट्टी सिंह भूतपुरी थाना अफजलगढ़ का इलाज चल रहा है। इनकी स्थिति गंभीर बताई गई है। ठेकेदार सुरेंद्र सिंह के मुताबिक बबलू, राहुल और प्रमोद को गंभीर अवस्था में मुरादाबाद रेफर किया गया है। छह घायलों को सीएचसी में भर्ती कराया गया है। सभी मजदूर आसपास के गांवों के हैं।
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जिलाधिकारी जगतराज त्रिपाठी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने मृतकों के आश्रित को दो दो लाख रुपये और घायलों के परिजनों को पचास पचास हजार रुपये देने की घोषणा की है। स्योहारा शुगर मिल के डिस्टलरी प्लांट में अंडरग्राउंड टैंक बनाने के लिए सीमेंट कंक्रीट से बेसमेंट बनाया जा रहा था। 30 मीटर चौड़े और 50 मीटर लंबे गड्ढे में ही 12 फीट ऊंची दीवार खड़ी थी। करीब 24 मजदूर गड्ढे में बेसमेंट बनाने के काम में लगे थे।
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सोमवार रात करीब आठ बजे गड्ढे में खड़ी दीवार भरभराकर गिर गई और कई मजदूर मलबे के नीचे दब गए। दीवार गिरते ही बाकी मजदूरों ने शोर मचा दिया। डिस्टलरी के कर्मचारी, पुलिस व आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंच गए। इन लोगों ने मजदूरों को निकालने का काम शुरू कर दिया। कई मजदूरों को घायलावस्था में बाहर निकाला और मुरादाबाद भेजवाया। चार मजदूरों को मुरादाबाद के कास्मास अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया। जिलाधिकारी जगतराज त्रिपाठी ने श्रमिक ओमप्रकाश, रामौतार सिंह, संजीव और मुनेश के मरने की पुष्टि की है। इसके अलावा छोटे को साई अस्पताल में ब्राट डेड लाया गया।
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साईं अस्पताल में ही राजू पुत्र सोनार का इलाज चल रहा है। कास्मास अस्पताल में संजय पुत्र नरेंद्र (मुकरपुरी थाना स्योहारा) और बबलू पुत्र छुट्टी सिंह भूतपुरी थाना अफजलगढ़ का इलाज चल रहा है। इनकी स्थिति गंभीर बताई गई है। ठेकेदार सुरेंद्र सिंह के मुताबिक बबलू, राहुल और प्रमोद को गंभीर अवस्था में मुरादाबाद रेफर किया गया है। छह घायलों को सीएचसी में भर्ती कराया गया है। सभी मजदूर आसपास के गांवों के हैं।
पलक झपकते ही काल बन गई दीवार
बिजनौर में दीवार गिरी
- फोटो : अमर उजाला
पांच मजदूरों को काल का ग्रास बनाने वाली दीवार केवल दो महीने पहले ही बनी थी। नई दीवार सोमवार शाम को पलभर में ही भरभराकर गिर गई। पलक झपकते ही पांच मजदूरों की मौत से परिवारों में कोहराम मच गया। परिवार के सदस्यों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। उधर, नई दीवार गिरने पर सभी लोग निर्माण कार्य को लेकर उंगली उठा रहे हैं।
सरकारी निर्माण कार्यों में अनियमितता मिलना आम बात है। हालांकि निजी क्षेत्र में नई दीवार गिरने का यह शायद पहला मामला है। मजदूरों के अनुसार दीवार दो महीने पहले ही बनाई गई थी। दीवार 12 फीट ऊंची और 12 इंच चौड़ी थी। बेसमेंट में होने के कारण ऐसी दीवार मजबूत बनाई जाती हैं। दो महीने पहले बनी ये दीवार सोमवार को रेत की दीवार की तरह ढह गई। दीवार के मलबे के नीचे दबकर पांच मजदूरों की मौत हो गई। प्लांट में काम करने वाले मजदूरों के अनुसार जैसा माल मिलता था, वैसा ही वे काम में लगा देते थे। उनको नहीं पता दीवार कैसे अचानक गिर गई। अगर दाईं ओर भी दीवार गिर गई होती तो उसकी चपेट में बाकी मजदूर आ जाते, तब हादसा और गंभीर हो सकता था।
इन गांवों के लोग करते थे काम
डिस्टलरी प्लांट में मुकरपुरी, टांडा, भूतपुरी आदि गांवों के मजदूर काम करते थे। मजदूर अक्सर देर तक काम करते थे। इसके अलावा कस्बे के मजदूर भी यहा काम करते थे।
ठेकेदार देर तक कराता था काम
प्लांट में काम करने वाले कर्मचारियों के अनुसार ठेकेदार काम जल्दी निपटाने के लिए मजदूरों से देर तक काम कराते हैं। सोमवार को भी मजदूर देर तक काम कर रहे थे। अगर मजदूरों को देर तक काम करने के लिए नहीं रोका जाता तो यह हादसा नहीं होता।
सरकारी निर्माण कार्यों में अनियमितता मिलना आम बात है। हालांकि निजी क्षेत्र में नई दीवार गिरने का यह शायद पहला मामला है। मजदूरों के अनुसार दीवार दो महीने पहले ही बनाई गई थी। दीवार 12 फीट ऊंची और 12 इंच चौड़ी थी। बेसमेंट में होने के कारण ऐसी दीवार मजबूत बनाई जाती हैं। दो महीने पहले बनी ये दीवार सोमवार को रेत की दीवार की तरह ढह गई। दीवार के मलबे के नीचे दबकर पांच मजदूरों की मौत हो गई। प्लांट में काम करने वाले मजदूरों के अनुसार जैसा माल मिलता था, वैसा ही वे काम में लगा देते थे। उनको नहीं पता दीवार कैसे अचानक गिर गई। अगर दाईं ओर भी दीवार गिर गई होती तो उसकी चपेट में बाकी मजदूर आ जाते, तब हादसा और गंभीर हो सकता था।
इन गांवों के लोग करते थे काम
डिस्टलरी प्लांट में मुकरपुरी, टांडा, भूतपुरी आदि गांवों के मजदूर काम करते थे। मजदूर अक्सर देर तक काम करते थे। इसके अलावा कस्बे के मजदूर भी यहा काम करते थे।
ठेकेदार देर तक कराता था काम
प्लांट में काम करने वाले कर्मचारियों के अनुसार ठेकेदार काम जल्दी निपटाने के लिए मजदूरों से देर तक काम कराते हैं। सोमवार को भी मजदूर देर तक काम कर रहे थे। अगर मजदूरों को देर तक काम करने के लिए नहीं रोका जाता तो यह हादसा नहीं होता।