{"_id":"571000b14f1c1ba63d4a6ed3","slug":"amit-shah-no-comments-on-president-rule","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड के सियासी हालात से शाह ने बनाई दूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड के सियासी हालात से शाह ने बनाई दूरी
राजेश शर्मा/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Fri, 15 Apr 2016 02:12 AM IST
विज्ञापन
अमित शाह
- फोटो : AmarUjala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कुंभनगरी हरिद्वार के अपने दौरे के दौरान उन सभी लोगों को निराश किया जो यह उम्मीद लगाए बैठे थे कि वे उत्तराखंड के राजनीतिक हालात पर चर्चा करेंगे। राष्ट्रपति शासन लगाने के बारे में बात करेंगे और वर्ष 2017 के मिशन के बारे में भी संदेश देंगे।
विज्ञापन
अमित शाह ने उत्तराखंड के राजनीतिक हालात पर कोई चर्चा नहीं की। मीडिया से दूरी बनाए रखी और कार्यकर्ताओं से भी नहीं मिले। अलबत्ता उन्होंने केंद्र सरकार की उपलब्धियों का खूब बखान किया।
विज्ञापन
कांग्रेस की भी थी नजर
27 मार्च को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने के बाद अमित शाह पहली बार उत्तराखंड आए थे। ऐसे में उनके दौरे पर भाजपा ही नहीं कांग्रेस के दिग्गजों की भी नजर लगी हुई थी। हर कोई यह उम्मीद कर रहा था कि अमित शाह अपने संबोधन में चर्चा करेंगे कि किन कारणों के चलते राष्ट्रपति शासन लगाया गया और कार्यकर्ताओं को आगे क्या करना है।
विज्ञापन
चुनावों के लिए तैयारी करनी है या फिर भाजपा सरकार बनाएगी। अमित शाह जब हैलीपैड पर उतरे तो वहां से सीधे भेल के त्रिशूल गेस्ट हाउस में चले गए। यहां कार्यकर्ता उनसे मिलने के लिए काफी जोश में थे कई बार उन्होंने नारेबाजी भी की।
पार्टी कार्यकर्ताओं से नहीं मिले
अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों ने पार्टी कार्यकर्ताओं को अमित शाह के कमरे तक नहीं जाने दिया। इस बात को लेकर कार्यकर्ताओं की अधिकारियों से नोकझोंक भी हुई। ज्वालापुर के अंबेडकर पार्क में भी वे केवल एक मिनट के लिए गए।
समरसता सम्मेलन के मंच पर अपने संबोधन में भी उन्होंने डॉ. अंबेडकर, नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाई और कांग्रेस की आलोचना की। अमित शाह से मिलने के लिए कार्यकर्ता अंत तक प्रयास करते रहे लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। नेताओं ने तर्क दिया कि स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण शाह जल्दी चले गए।