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केन-बेतवा लिंक पर सहमति के आसार
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 27 Sep 2017 11:42 PM IST
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मध्य प्रदेश के बरियारपुर बांध के पास खोदी जा रही नहर
- फोटो : amarujala
अटल बिहारी वाजपेयी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘केन-बेतवा नदी गठजोड़’ में भाजपा के नेतृत्व वाली यूपी-एमपी सरकारों में पहली बार सहमति के आसार दिख रहे हैं। लंबे समय तक इस मसले पर दोनंो राज्यों में इस योजना को लेकर तनातनी रही है। केंद्र सरकार की मध्यस्थता में दो दिन पहले दिल्ली में दोनंो राज्यंो के मुख्यमंत्रियंो की बैठक में भले ही कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया। पर संकेत मिले हैं कि इस योजना को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ अक्तूबर में फिर दोनंो राज्यंो के मुख्यमंत्री और अफसर बैठक करेंगे।
2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में नदियंो को आपस में जोड़ने की योजना स्वीकृत हुई थी। इसमें बुंदेलखंड की दो बड़ी केन और बेतवा भी शामिल थीं। योजना की शुरूआत केंद्र ने इन्हीं दोनंो नदियंो से की। इसकी लागत 7615 करोड़ रुपये है। केंद्र और यूपी-एमपी की सरकारंो में योजना पर सहमति 2005 में बन गई थी। राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण ने इस परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (डीपीआर) दिसंबर 2008 में तैयार कर ली। लेकिन प्रदेश की पिछली बसपा और सपा सरकारंो में इस योजना की गति में खास प्रगति नहीं हुई। केंद्र में फिर से भाजपा सरकार बनने और बुंदेलखंड की ही नेता उमा भारती के केंद्रीय जल संसाधन मंत्री बनने के बाद इस परियोजना में फिर से तेजी आई। उमा भारती ने इसमें खास दिलचस्पी लेकर तमाम औपचारिकताएं और अधूरी कार्रवाइयां पूरी कराकर केन-बेतवा पर काम शुरू होने की स्थिति ला दी।
लेकिन सूत्रों का कहना है कि यूपी और एमपी की सरकारंो में अब भी इस परियोजना को लेकर कुछ असहमति के बिंदू हैं। पानी बंटवारे में हिस्सेदारी को लेकर दोनंो राज्यंो के बीच असहमति सबसे बड़ी बाधा है। इसके अलावा एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का कहना है कि परियोजना में कई गांव प्रभावित हो रहे हैं। उनके तत्काल पुनर्वास की व्यवस्था करनी होगी ताकि विस्थापितंों को न्याय मिल सके। उमा भारती के बाद केंद्र में जल संसाधन मंत्री बनाए गए नितिन गडकरी ने 25 सितंबर को दिल्ली में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की मौजूदगी में बैठक की। दोनंो राज्यंो के संबंधित वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल थे। अंतत: केंद्रीय मंत्री की मध्यस्थता से फिलहाल दोनंो राज्यंो के बीच चल रहे विवादंो में सकारात्मक रुख नजर आया है। दोनंो मुख्यमंत्रियंो ने इन्हें सुलझाने की सहमति जता दी है। हालांकि इस बैठक में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका।
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2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में नदियंो को आपस में जोड़ने की योजना स्वीकृत हुई थी। इसमें बुंदेलखंड की दो बड़ी केन और बेतवा भी शामिल थीं। योजना की शुरूआत केंद्र ने इन्हीं दोनंो नदियंो से की। इसकी लागत 7615 करोड़ रुपये है। केंद्र और यूपी-एमपी की सरकारंो में योजना पर सहमति 2005 में बन गई थी। राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण ने इस परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (डीपीआर) दिसंबर 2008 में तैयार कर ली। लेकिन प्रदेश की पिछली बसपा और सपा सरकारंो में इस योजना की गति में खास प्रगति नहीं हुई। केंद्र में फिर से भाजपा सरकार बनने और बुंदेलखंड की ही नेता उमा भारती के केंद्रीय जल संसाधन मंत्री बनने के बाद इस परियोजना में फिर से तेजी आई। उमा भारती ने इसमें खास दिलचस्पी लेकर तमाम औपचारिकताएं और अधूरी कार्रवाइयां पूरी कराकर केन-बेतवा पर काम शुरू होने की स्थिति ला दी।
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लेकिन सूत्रों का कहना है कि यूपी और एमपी की सरकारंो में अब भी इस परियोजना को लेकर कुछ असहमति के बिंदू हैं। पानी बंटवारे में हिस्सेदारी को लेकर दोनंो राज्यंो के बीच असहमति सबसे बड़ी बाधा है। इसके अलावा एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का कहना है कि परियोजना में कई गांव प्रभावित हो रहे हैं। उनके तत्काल पुनर्वास की व्यवस्था करनी होगी ताकि विस्थापितंों को न्याय मिल सके। उमा भारती के बाद केंद्र में जल संसाधन मंत्री बनाए गए नितिन गडकरी ने 25 सितंबर को दिल्ली में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की मौजूदगी में बैठक की। दोनंो राज्यंो के संबंधित वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल थे। अंतत: केंद्रीय मंत्री की मध्यस्थता से फिलहाल दोनंो राज्यंो के बीच चल रहे विवादंो में सकारात्मक रुख नजर आया है। दोनंो मुख्यमंत्रियंो ने इन्हें सुलझाने की सहमति जता दी है। हालांकि इस बैठक में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सका।
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