जब आधार हीं बन गया परिवार से मिलन का आधार
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अदालती आदेश पर आधार बनाने की प्रक्रिया ने मानसिक रूप से पीड़ित महिला को उसके परिवार से मिलवा दिया है। चार माह पहले महिला भटकती हुई पुलिस को मिली थी। इसके बाद अदालत ने उसका आधार बनाने का निर्देश पुलिस को दिया था।वहीं, महिला का रिकार्ड आधार प्राधिकरण के पास पहले से ही मौजूद था।
तीस हजारी अदालत के महानगर दंडाधिकारी अभिलाष मल्होत्रा को कश्मीरी गेट पुलिस ने बताया कि महिला की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाना मालाखेड़ा जिला अलवर राजस्थान में 30 नवंबर 2017 को दर्ज करवाई गई थी।
दिल्ली पुलिस ने जब उसके पति से संपर्क किया तो वह पीड़िता को साथ ले जाने के लिए तैयार हो गया। वहीं, अदालत ने कानूनी औपचारिकताओं के बाद महिला को उसके पति के सुपुर्द करने का आदेश दिया। साथ ही महिला का उचित इलाज कराने की हिदायत अदालत ने उसके पति को दी है।
प्राधिकरण के पास था विवरण
अदालती आदेश पर जब महिला का आधार बनाया जाने लगा तो पता चला कि उसका विवरण पहले से आधार प्राधिकरण के पास मौजूद था। इससे पुलिस को उसके नाम व निवास स्थान आदि की जानकारी मिली। पुलिस ने परिजनों से संपर्क किया। जिसके बाद महिला को आशा किरण होम से घर वालों को सौंपने का रास्ता साफ हो गया।
कश्मीरी गेट मिली थी महिला
बता दें कि यह महिला पुलिस को कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास फरवरी में भटकती थी। महिला को इहबास में भर्ती कराया गया था। अदालत ने जब उससे बातचीत की तो पाया कि उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है।
अदालत ने यौन शोषण की शंका के मद्देनजर उसकी जांच का निर्देश दिया था। जांच में दुष्कर्म की कोई बात सामने नहीं आई।