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कुलविंदर एनकाउंटर मामले अदालत का फैसला

Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
Chandigarh
Chandigarh Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। 23 साल पुराने कुलविंदर एनकाउंटर मामले में मोगा के एसएसपी सुरजीत सिंह ग्रेवाल और पंजाब पुलिस के छह जवानों को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बरी होने वालों में सब इंस्पेक्टर निक्का राम, रिटायर्ड एएसआई गुरचरण सिंह, रिटायर्ड एएसआई अमरजीत सिंह, रिटायर्ड एएसआई चन्ना सिंह, रिटायर्ड कांस्टेबल दयाल सिंह और सोहाना के पूर्व थाना प्रभारी बीरबल दास शामिल हैं।
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इस मामले की सुनवाई के दौरान बीरबल दास की मौत हो चुकी है। अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि कुलविंदर सिंह उर्फ किड को पुलिस ने मोहाली से उठाया था और टंगोरी में उनका एनकाउंटर किया था। रोपड़ पुलिस के रिकार्ड के मुताबिक आज भी कुलविंदर सिंह किड भगौड़ा है। गवाहों के बयान भी अलग-अलग पाए गए थे। अदालत के फैसले के बाद एसएसपी सुरजीत सिंह ग्रेवाल समेत सभी पुलिस जवानों के चेहरे खिल गए। वहीं कुलविंदर सिंह किड के 73 वर्षीय पिता रिटायर्ड प्रिंसिपल (खालसा स्कूल कुराली) त्रिलोचन सिंह बेहद निराश दिखे।
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बचाव पक्ष के वकील राजन मल्होत्रा ने बताया कि कुलविंदर के पिता त्रिलोचन सिंह ने आरोप लगाया था कि पटियाला में तत्कालीन सीआईए इंचार्ज सुरजीत सिंह ग्रेवाल (अब एसएसपी) और एएसआई अमरजीत सिंह ने उनके मोहाली स्थित घर पर छापा मारा। पुलिस ने मोहाली निवासी कुलविंदर सिंह भोला का एनकाउंटर कर दिया और उनके बेटे कुलविंदर सिंह किड का अपहरण कर लिया। सीबीआई की ओर से पेश किए गए गवाह मोहाली के सरपंच के बेटे सुरजीत ने अदालत में बयान दिया था कि 22 जुलाई 1989 की रात कुलविंदर किड उनके घर आया था। त्रिलोचन सिंह ने आरोप लगाया कि 23/24 जुलाई 1989 की राज कुलविंदर सिंह किड का एनकाउंटर टंगोरी गांव के पास किया गया था। वहीं पुलिस के रिकार्ड के मुताबिक घटना वाले दिन मारुति कार में सवार चार आतंकियों में से दो की मौत हो गई थी और दो फरार हो गए थे। अभी तक पुलिस के रिकार्ड में दोनों आतंकियों की पहचान नहीं हो सकी। वहीं पिता त्रिलोचन सिंह ने 22 नवंबर 1989 को हाईकोर्ट में उनके बेटे को पेश करवाने के लिए पंजाब पुलिस के खिलाफ याचिका दायर की थी। उनके कहना था कि जब एनकाउंटर हो गया तो पंजाब पुलिस कुलविंदर किड को अदालत में कैसे पेश कर सकती थी।
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यह है मामला
दायर मामला 22 जुलाई 1989 का है। मोहाली निवासी रिटायर्ड स्कूल प्रिंसिपल त्रिलोचन सिंह ने शिकायत दी थी कि पटियाला सीआईए इंचार्ज (तत्कालीन इंस्पेक्टर व मौजूदा एसएसपी मोगा) सुरजीत सिंह ग्रेवाल और एएसआई (मौजूदा एसआई) अमरजीत सिंह ने मोहाली में एक युवक कुलविंदर सिंह उर्फ भोला को गोली मार दी थी। त्रिलोचन सिंह के अनुसार बाद में इसी मामले में सुरजीत सिंह और अमरजीत सिंह ने मोहाली फेज पांच स्थित उनके घर से बेटे कुलविंदर सिंह किड को जबरदस्ती उठा लिया। बाद में तत्कालीन सोहाना थाना प्रभारी बीरबल दास, एएसआई गुरचरण सिंह, एएसआई चन्ना सिंह और कांस्टेबल दयाल सिंह ने सुरजीत और अमरजीत के साथ मिलकर 23/24 जुलाई 1989 की रात उनके बेटे का एनकाउंटर कर दिया।



जेल भी जा चुका था कुलविंदर :
कुलविंदर सिंह किड जब चंडीगढ़ के डीएवी स्कूल में 10वीं में पढ़ता था तो उसे एक राजनीतिक छात्र संगठन से संबंध रखने के आरोप में 1986 में गिरफ्तार किया गया था। इस संगठन पर चरमपंथियों के साथ गठजोड़ का आरोप था। वह दो साल तक जेल में रहने के बाद वह 1988 में रिहा हुआ। उसकी 1989 में शादी हुई और वह अपने परिवार से अलग रहने लगा ताकि पुलिस उन्हें प्रताड़ित न करें।
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