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Hindi News ›   City & states ›   95% of school children are reluctant to raise their voice against violence

हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने से कतरा रहे 95% स्कूली बच्चे

Amar Ujala Bureau Updated Thu, 23 Apr 2026 02:04 AM IST
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धर्मशाला। जिला कांगड़ा में स्कूली छात्र अपनी समस्याओं और हिंसा के खिलाफ आवाज तो उठा रहे हैं, लेकिन गुरुजी के खौफ और रिकॉर्ड खराब होने के डर से अपनी पहचान छिपाने को मजबूर हैं। चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) पर आने वाली शिकायतों में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि केवल 5 फीसदी छात्र ही अपना असली नाम बताते हैं। 95 फीसदी बच्चे सामने आने से कतराते हैं।
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अधिकांश बच्चे स्कूल में होने वाली हिंसा या अन्य परेशानियों की जानकारी देते समय अपना नाम बदल लेते हैं। चाइल्ड हेल्पलाइन के जिला प्रभारी मनमोहन चौधरी ने बताया कि जब टीम शिकायतों के आधार पर स्कूलों में पहुंचती है, तो कई बार उस नाम का बच्चा ही नहीं मिलता, जिसने कॉल किया होता है। इसकी मुख्य वजह डर है।
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उन्होंने कहा कि छात्रों को लगता है कि यदि उनका नाम सामने आया, तो शिक्षक परीक्षाओं में उनके नंबर काट सकते हैं या उनका स्कूल रिकॉर्ड खराब किया जा सकता है। हालांकि, पहचान छिपाने के बावजूद टीम की जांच में 99 फीसदी शिकायतें सही पाई जा रही हैं।
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तकनीक से कसी फर्जी कॉल पर नकेल
हेल्पलाइन नंबर में नया रिकॉर्डिंग और लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम लागू होने के बाद फर्जी शिकायतों में भारी कमी आई है। पहले शिकायतों को केवल रजिस्टर पर दर्ज किया जाता था, जिससे शरारती तत्वों को मौका मिल जाता था। अब कॉलर की आवाज और लोकेशन रिकॉर्ड होने के कारण केवल एक फीसदी लोग ही हेल्पलाइन का दुरुपयोग करते हैं। इस तकनीक ने कर्मचारियों का काम भी आसान किया है और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हुई है। संवाद
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