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बुकनाला सादात में वन विभाग की टीम ने पिंजरे को नए स्थान पर लगवाया
Updated Sat, 03 Nov 2018 03:57 AM IST
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ओबरी/संभल। असमोली थाना क्षेत्र के बुकनाला सादात और डोंडी के जंगल में तेंदुआ और चीता के अंदेशे में लोग डर रहे हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को वन विभाग की टीम पहुंची। टीम ने यह तो स्पष्ट नहीं किया कि जंगल में तेंदुआ है या चीता लेकिन खूंखार जानवर की उपस्थिति के अंदेशे को माना है। इसके लिए ग्रामीणों को सतर्क किया है। एक पिंजरा लगवा कर उसमें बकरा बांधा गया है। ताकि जानवर आए और पिंजरे में कैद हो जाए।
असमोली थाना इलाके के बुकनाला सादात और डोंडी गांव के जंगल में बुधवार की शाम कई लोगों चीता होने का अंदेशा व्यक्त किया था। वन विभाग को गुरुवार को यह जानकारी दी गई थी कि चीते ने नीलगाय को शिकार बनाया है। बुकनाला सादात के एक गन्ने के खेत में नीलगाय को घसीटने से पूरा गलियारा बन गया है। वन विभाग के दरोगा ख्याली राम लखचौरा ने शुक्रवार को उस खेत को देखा जहां पर जानवर द्वारा शिकार किए जाने की बात कही गई है। इसी बीच बुकनाला सादात निवासी यावर अब्बास तथा डोंडी निवासी ओमवीर सिंह से जानवर के बारे में जानकारी हासिल की।
वन विभाग के कर्मचारियों को गन्ने के खेत में चीता या तेंदुआ के पग चिह्न तो नहीं मिले। फिर भी गांव के पश्चिम दिशा में पहले से एक खेत में लगे पिंजरे को शुक्रवार को हटाया गया। अब पिंजरे को जानवर द्वारा किए गए शिकार वाले खेत पर लगवाया गया है। पिंजरे को तीन तरफ से घास से ढक कर उसके अंदर बकरा बांधा गया है ताकि रात के समय बकरे के चिल्लाने की आवाज सुनकर जानवर पिंजरे में आए और कैद हो जाए। यह भी कहा गया है कि ग्रामीण सतर्क रहें। समूह के रूप में लाठी डंडे लेकर ही जंगल को निकलें। ताकि खतरे के वक्त सुरक्षा हो सके।
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असमोली थाना इलाके के बुकनाला सादात और डोंडी गांव के जंगल में बुधवार की शाम कई लोगों चीता होने का अंदेशा व्यक्त किया था। वन विभाग को गुरुवार को यह जानकारी दी गई थी कि चीते ने नीलगाय को शिकार बनाया है। बुकनाला सादात के एक गन्ने के खेत में नीलगाय को घसीटने से पूरा गलियारा बन गया है। वन विभाग के दरोगा ख्याली राम लखचौरा ने शुक्रवार को उस खेत को देखा जहां पर जानवर द्वारा शिकार किए जाने की बात कही गई है। इसी बीच बुकनाला सादात निवासी यावर अब्बास तथा डोंडी निवासी ओमवीर सिंह से जानवर के बारे में जानकारी हासिल की।
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वन विभाग के कर्मचारियों को गन्ने के खेत में चीता या तेंदुआ के पग चिह्न तो नहीं मिले। फिर भी गांव के पश्चिम दिशा में पहले से एक खेत में लगे पिंजरे को शुक्रवार को हटाया गया। अब पिंजरे को जानवर द्वारा किए गए शिकार वाले खेत पर लगवाया गया है। पिंजरे को तीन तरफ से घास से ढक कर उसके अंदर बकरा बांधा गया है ताकि रात के समय बकरे के चिल्लाने की आवाज सुनकर जानवर पिंजरे में आए और कैद हो जाए। यह भी कहा गया है कि ग्रामीण सतर्क रहें। समूह के रूप में लाठी डंडे लेकर ही जंगल को निकलें। ताकि खतरे के वक्त सुरक्षा हो सके।
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